MP News: पूर्व सीएम के 'वंशज' भी चुनाव में फंसे, कुछ सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष के हालात, कहीं कड़ा मुकाबला

MP Election News: मध्य प्रदेश में नई सरकार को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो गई है दरअसल, अब परिणाम आने में सिर्फ चार दिन का समय बाकी है। लेकिन इस बार परिणाम रोचक होने वाले हैं। क्योंकि प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटा, भतीजा और बहू 8 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से कुछ सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशियों के बीच कड़ा संघर्ष है। जबकि कुछ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति भी बन रही है।

मध्य विधानसभा चुनाव लड़ रहे पूर्व मुख्यमंत्रियों एवं बड़े नेताओं के वंशज भी चुनाव में फंसते दिखाई दे रहे हैं। प्रदेश में 8 विधानसभा सीट चुरहट, राघौगढ़, खातेगांव, भोपाल मध्य, गोविंदपुरा, भोजपुर, खरगापुर, जावद सीट पर पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटा, भतीजे एवं बहू प्रत्याशी हैं।

MP assembly elections in Descendants of former CM also trapped result amid triangular conflict

इन सीटों पर निर्दलीय और बागी प्रत्याशी भी चुनाव लड़े। जिससे पूर्व मुख्यमंत्रियों के वंशजों के समीकरण गड़बड़ा गए। हालांकि नाम वापसी से पहले तक दोनों ही दलों ने बागियों को मनाने की हर संभव कोशिश की थी, लेकिन बागी टस से मस नहीं हुए।

पूर्व मुख्यमंत्रियों के 'वंशज' भी चुनाव में फंसे, 8 सीटों पर वंशज का आमना सामना

चुरहट से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह फिर चुनाव लड़ रहे हैं। वे 2018 में विधानसभा चुनाव भाजपा के शरदेंदु तिवारी से 6402 बोटों से हार गए थे। इस बार फिर दोनों प्रत्याशी आमने सामने हैं। इस बार समीकरण बदले हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के दत्तक पुत्र सुरेन्द्र पटवा

भोजपुर से यहां से पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के दत्तक पुत्र सुरेन्द्र पटवा भाजपा के टिकट पर फिर चुनाव लड़ रहे हैं। वे 2003 से इसी सीट से विधायक चुनते आ रहे हैं। इस बार कांग्रेस ने यहां से पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल को चुनाव में उतारा है।

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह

राघौगढ़ से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह राघौगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। पिछला चुनाव में जयवर्धन सिंह ने 46697 वोटों से जीता था। ये 2013 में पहली बार विधायक बने। इस बार तीसरा चुनाव लड़ रहे हैं। स्थिति बेहतर बताई जा रही है।

खरगापुर से पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी

भाजपा प्रत्याशी है। राहुल ने 2018 में कांग्रेस की चंद्रा गौर को 11665 वोटों से चुनाव हराया था। गौर ने राहुल को 5677 इस चुनाव में यह 2013 में चंद्रा बोटों से हराया था। सीट फंसी है।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरेन्द्र कुमार सकलेचा का बेटा चुनावी मैदान में

जावद से पूर्व मुख्यमंत्री वीरेन्द्र कुमार सकलेचा के बेटे ओमप्रकाश सकलेचा 2003 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। इस सीट से उनके पिताजी भी विधायक चुने जाते थे। कांग्रेस ने यहां से समंदर पटेल को प्रत्याशी बनाया है। पटेल कुछ समय के लिए भाजपा में गए थे। पिछले चुनाव में पटेल कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय लड़े और 33712 वोट लाए। तब सकलेचा ने कांग्रेस के राजकुमार अहीर को मात्र 4271 वोटों से हराया था। इस बार भाजपा के लिए पिछली बार जैसी स्थिति नहीं बताई जा रही।

खातेगांव से दीपक जोशी

खातेगांव इस बार यहां पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं। दीपक ने पिछला चुनाव हाटपिपल्या सीट से भाजपा के टिकट पर लड़ा था। वे अब कांग्रेस में हैं. और खातेगांव सीट से भाजपा के आशीष शर्मा से मुकाबला है।

पूर्व सीएम बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर

पूर्व मुख्यमंत्री गोविंदपुरा बाबू लाल गौर की बहू कृष्णा गौर गोविंदपुरा सीट से लगातार दूसरी बार भाजपा प्रत्याशी हैं। पहला चुनाव उन्होंने 46380 वोटों से जीता था। भोपाल जिले के भाजपा प्रत्याशियाँ में सबसे बेहतर स्थिति कृष्णा की ही बताई जा रही है।

गोविंदनारायण सिंह के बेटे ध्रुव नारायाण सिंह

भोपाल मध्य सीट पर समविद सरकार में सीएम रहे गोविंदनारायण सिंह के बेटे ध्रुव नारायाण सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। ये 2008 में भी इसी सीट से कांग्रेस के नासिर इस्लाम को 2254 वोटों से हराकर विधायक बने थे। कांग्रेस से मौजूदा विधायक आरिफ मसूद मैदान में हैं। मतदान प्रतिशत कम होने से यहां भाजपा को नुकसान बताया जा रहा है।

भाजपा प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी का कहना है कि बीजेपी में है और इसे हम परिवार बात नहीं कहेंगे क्योंकि जो भी इस बार मैदान में उतरा है वह सब बीजेपी के कर्मठ कार्यकर्ता के तौर पर काम किए हुए हैं फिर नेता बने हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता भी कह रही है कि जिन पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों को बता रहा है वह भी जनता के दिलों में राज करते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता ने बताया पूर्व मुख्यमंत्री के पढ़ते हुए नजर आए हैं अलग अलग समीकरण की बात करे तो कई जगह पर अभी भी सीट फांसी हुई है। हालांकि सभी की किस्मत ईवीएम के पिटारे में बंद है और 3 तारीख को किस्मत खुलेगी पर पिछले वर्षों की बात करें तो कई जगहों पर दिग्गजों के वंशज भी हराते हुए नजर आए हैं।

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