Assembly Elections 2023: सागर जिले में देवरी-बंडा सीट पर भाजपा की व्यूह रचना, कांग्रेस मुक्त जिले का मिशन
सागर जिले की कांग्रेस विधायकों वाली देवरी और बंडा विधानसभा को 2023 में जीतने भाजपा ने अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। जातिगत गणित के आधार पर अभी से प्लानिंग पर काम शुरू कर दिया है।

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 में बुंदेलखंड की कांग्रेस की सीटों पर काबिज होन भारतीय जनता पार्टी ने अभी से जोर लगाना प्रारंभ कर दिया है। जिले में देवरी और बंडा विधानसभा से कांग्रेस के विधायक सदन में पहुंचे थे। कुल आठ में से 6 सीटों पर भाजपा काबिज है। बीजेपी ने सागर जिले को कांग्रेस मुक्त करने और इन विधानसीटों को जीतने के लिए अभी से व्यूह रचना पर काम शुरू भी कर दिया है।
सागर जिले की बंडा और देवरी विधानसभा भाजपा के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ओबीसी और एससी-एसटी बाहुल्य इन सीटों को जीतना भाजपा चुनौती मानकर चल रही है। वर्तमान में देवरी से कमलनाथ के खास सिपहसालार माने जाने वाले पूर्व मंत्री हर्ष यादव दूसरी दफा यहां से विधायक हैं, जबकि बंडा से तरबर सिंह लोधी विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पूर्व में यह दोनों सीटें भाजपा के खाते में आती रही हैं। बता दें कि भाजपा बंडा विधानसभा को कांग्रेस से छीनने को जहां थोड़ा आसान मान रही है तो देवरी में हर्ष यादव को घेरने के लिए जातिगत कार्ड भी खेल सकती है। यह सीट मोदी-शिवराज की लहर के बावजूद बीते 10 साल से कांग्रेस के खाते में आ रही है।

ओबीसी और एससी-एसटी बाहुल्य सीटें हैं
सागर जिले की देवरी विधानसभा ओबीसी और एससी-एसटी बाहुल्य इलाका है। देवरी के अधीन केसली ब्लाॅक आदिवासी बाहुल्य इलाका है तो गौरझामर में ओबीसी और एससी वोटरों की संख्या अधिक है। यहां की अर्थव्यवस्था का अधिकांश हिस्सा खेती पर आश्रित है। पूर्व में यहां भाजपा के विधायक काबिज रहे हैं। इस विधानसभा की तासीर कुछ अलग है। इसको लेकर एक मिथक भी चलता रहा है कि जो भी देवरी से विधायक बना बाद में उसको पार्टी ने टिकट भी नहीं दिया। काफी हद तक यह मिथक सही भी लगता है, लेकिन कांग्रेस के हर्ष यादव इसके अपवाद हैं। वे लगातार दो बार इस सीट को फतह करने में कामयाब रहे हैं।

बंडा विधानसभा लोधी बाहुल्य भाजपा की पुरातन सीट रही है
बंडा विधानसभा का रिकाॅर्ड भाजपा के पक्ष में रहा है। पूर्व मंत्री व प्रदेश के कद्दावर नेता रहे स्व. हरनाम सिंह राठौर इस सीट से लंबे समय तक विधायक रहे हैं। वे उमा भारती के सीएम के कार्यकाल में मंत्री भी बनाए गए थे। वे अपने जीवन में केवल एक विधानसभा चुनाव लिकर किंग व कांग्रेस के संतोष साहू से हारे थे। उनके बाद उनके बडे़ बेटे हरवंश सिंह यहां से विधायक रहे, लेकिन पिछला चुनाव वे कांग्रेस के नए चेहरे तरबर सिंह लोधी से हार गए थे। बता दें कि इस सीट पर भाजपा नेत्री उमा भारती और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के दखल व प्रभाव वाली सीट रही है। इस दफा भाजपा यहां से नए चेहरे पर दांव लगा सकती है।
देवरी से कांग्रेस के पूर्व विधायक अब भाजपा के पाले में हैं
देवरी सीट से 90 के दशक में कांग्रेस पार्टी के धाकड़ नेता रहे ब्रजबिहारी पटेरिया यहां का प्रमुख चेहरा रहे हैं। एक बार वे विधायक बनकर सदन पहुंच चुके हैं, लेकिन काफी लंबे समय से जातिगत गणित और राजनीति के फेर में हासिएं पर चल रहे थे। पूछपरक कम होने के कारण वे उपेक्षित महसूस कर रहे थे। चंद महीनो ंपहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह की अगुवाई में सीएम से मुलाकात कर उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली है। जाहिर है वे अपने प्रभाव वाले ओबीसी-एसी, एसटी वोटों सहित ब्रह्म्ण वोटों को भाजपा के पक्ष में डायवर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका में रहेंगे।
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भाजपा जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया की सक्रियता भी देवरी में दावेदारी मानी जा रही है
भाजपा के जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया वैसे तो बीना विधानसभा से आते हैं, लेकिन यह सीट वर्तमान में एससी वर्ग के आरक्षित है। इस कारण यहां उनकी चुनावी संभावनाए शून्य हैं। पड़ोसी विधानसभा खुरई में खुद कद्दावर मंत्री भूपेंद्र सिंह अपना गढ़ बना चुके हैं। इस कारण काफी लंबे समय से जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया देवरी में राजनीतिक रूप से सक्रियता बनाकर चल रहे हैं। उनकी खास रूचि के कारण यहां से उनकी विधानसभा की दावेदारी के कयास भी जब-तब लगाए जाते रहे हैं। हालांकि स्पष्ट रूप से उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया।












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