MP Election: कैंडिडेट नहीं, पीएम मोदी के इस मास्टर स्ट्रोक से एमपी फतह करेगी बीजेपी!
Madhya Pradesh BJP List: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। अभी तक एमपी में कुल 78 सीटों पर बीजेपी ने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। गौरतलब है कि एमपी में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। दूसरी सूची में बीजेपी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों को उम्मीदवारों को डालकर सबको चौंका दिया है। सबसे चौंकाने वाला नाम केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का है, जिनको पार्टी ने मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है। आपको बता दें कि इस बार बीजेपी ने उन्हें चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष भी बनाया है और ऐसे में चुनाव मैनेजमेंट का पूरा काम उनके जिम्मे है। दरअसल, एमपी विधानसभा चुनाव में नरेंद्र सिंह तोमर को लेकर पहले भी कई तरह की अटकलें लगती रही हैं। इस बार भी उन्हें सीएम पद का दावेदार बताया जा रहा था और ऐसे में उनके मैदान में उतरने के बाद इस तरह की अटकलों को बल मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को पार्टी ने नरसिंहपुर से टिकट दिया है। इसी सीट से उनके भाई जालम सिंह पटेल का टिकट काट दिया गया है। प्रहलाद सिंह पटेल की गिनती ओबीसी के बड़े चेहरों में होती है और उनके नाम को लेकर भी चर्चा का बाजार गर्म है। बीजेपी ने उन्हें टिकट देकर उन चर्चाओं को और भी बल दे दिया है। केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को भी बीजेपी ने निवास सुरक्षित सीट से मैदान में उतारा है।

इसके अलावा, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की इस बार फिर से एमपी की राजनीति में वापसी हो गई है। इंदौर-1 सीट से पार्टी ने कैलाश विजयवर्गीय को टिकट दिया है। विजयवर्गीय भी लंबे अर्से से एमपी में सक्रिय थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में उनके बेटे को टिकट मिला था और इस बार बीजेपी ने उन्हें ही मैदान में उतार दिया है।
पार्टी ने चुनावी मैदान में आधा दर्जन सांसदों को भी उतार दिया है। जबलपुर पश्चिम सीट से सांसद राकेश सिंह, सीधी से सांसद रीती पाठक और सतना से सांसद गणेश सिंह चुनावी मैदान में हैं जबकि पार्टी ने होशंगाबाद से सांसद उदय प्रताप सिंह को गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र से टिकट थमाया है।
एमपी में बीजेपी इस बार मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरे को लेकर पत्ते नहीं खोल रही है। तमाम नेता यह कहते रहे हैं कि चुनाव के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के कद के बराबर बीजेपी ने कई चेहरों को मैदान में उतारकर यह संकेत दे दिए हैं कि उनके लिए आगे की राह आसान नहीं होने वाली है। चुनावी विश्लेषकों की मानें तो बीजेपी ने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान ही यह संकेत दे दिए थे, जब प्रमुख चेहरों में सीएम शिवराज सिंह चौहान नहीं थे। अब तक के चुनावी आयोजनों में सीएम शिवराज सिंह को पीछे करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा आगे रखा गया है। यही नहीं, कार्यकर्ताओं में जोश भरने न सिर्फ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी भोपाल भी पहुंचे बल्कि उन्होंने नए और महिला मतदाताओं पर फोकस कर चुनावी हवा को बदलने की कोशिश भी की। राजनीति के जानकार मानते हैं कि पीएम मोदी के इसी मास्टरस्ट्रोक के जरिए बीजेपी एमपी विधानसभा चुनाव में जीत के दावे कर रही है और पार्टी की रणनीति भी इसी के इर्द-गिर्द घूमेगी।
मध्य प्रदेश में करीब 19 लाख ऐसे मतदाता हैं, जो इस चुनाव में पहली बार वोट डालने वाले हैं। हालांकि, यह आंकड़ा चुनाव आते तक और बढ़ सकता है। इस लिहाज से औसत रूप से देखें तो प्रदेश की कुल 230 विधानसभा में 8200 मतदाता ऐसे हैं जो पहली बार वोट करने जा रहे हैं। इतने मतदाता किसी भी प्रत्याशी को जिताने-हराने का क्षमता रखते हैं। 2018 के विधानसभी चुनाव के नतीजों के मुताबिक, 8 सीटों पर जीत-हार का मार्जिन 1517 से 511 मतों के बीच थी जबकि 35 से अधिक सीटों पर जीत का अंतर 8 हजार से नीचे है। कुल मिलाकर अगर यह मतदाता वर्ग चाह ले तो राज्य की 50 से अधिक सीटों के समीकरण को बदल सकते हैं।
इन युवाओं ने एमपी में ज़्यादातर बीजेपी सरकार ही देखी है। ये करीब पिछले 2 दशकों से शिवराज सिंह चौहान को ही सीएम के तौर पर देखते आ रहे हैं। इनको यह नहीं पता कि कांग्रेस शासनकाल किस तरह की समस्याएं थी इसलिए बीजेपी को ऐसे उदाहरण पेश करने होंगे, जो कांग्रेस के शासनकाल से अलग बात करते हों। वहीं, इन मतदाताओं को लुभाने के लिए कांग्रेस को यह बताना होगा कि वह बीजेपी से अलग किस तरह का शासन देगी और उसके पिटारे में युवाओं और महिलाओं के लिए क्या है। इन युवाओं को अपनी ओर खींचने के लिए दोनों दलों के लिए ज़रूरी है कि अतीत की कहानियां न सुनाकर, वर्तमान में ऐसे बदलाव और भविष्य की ऐसी संभावनाएं गिनाई जाएं तो इन्हें अपनी ओर खींच सकें।
जहां तक महिला मतदाताओं की बात है, चुनाव से पहले ही दोनों दल महिला शक्ति को अपने पाले में करने में जुटी है। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में सरकार बनाने और गिराने की ताकत महिला मतदाताओं के पास है। यही कारण है कि पिछले दिनों सीएम शिवराज सिंह चौहान लाड़ली बहनों को हजार रुपए महीने, फ्री में घर, 450 रुपए में गैस सिलेंडर देने के वादे कर चुके हैं।
मध्य प्रदेश का इतिहास और वर्तमान देखा जाए तो 19 विधानसभा सीटों में महिला मतदाता, पुरुष मतदाताओं से अधिक हैं। दिलचस्प बात यह है कि साल 2018 के विधानसभा चुनावों में इन 19 में से 14 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल कर ली थी, जबकि बीजेपी को चार सीटों पर ही संतुष्ट होना पड़ा था। मामला सिर्फ 19 सीटों तक ही नहीं सीमित है। महिला शक्ति प्रदेश के 96 सीटों की हार-जीत तय करने की स्थिति में हैं। 24 विधानसभा सीटों में 1000 पुरुष वोटर में 980 महिला मतदाता हैं, जबकि 77 सीटें ऐसी हैं, जहां पर एक हजार पुरुष मतदाताओं में महिला मतदाताओं की संख्या 950 से भी अधिक है। कांग्रेस ने भी अपने 11 वचनों में महिलाओं को 15 सौ रुपए हर महीने देने का वादा किया है। महिलाओं को 500 रुपए में गैस सिलेंडर, 100 रुपए में बिजली बिल का वादा भी कांग्रेस कर चुकी है। दोनों पार्टियां इन मतदाताओं को रिझाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है, यह तो वक्त ही बताएगा कि मतदाता ईवीएम में कौन सा बटन दबाते हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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