मोहर सिंह गुर्जर : नहीं रहा वो डकैत जिसने PM मोदी को लिखा था खत, चंबल बीहड़ में चलती थी इनकी सरकार

भिंड। मोहर सिंह गुर्जर। लंबी-चौड़ी कद-काठी। रौबदार मूंछें। कंधे पर दुनाली। चंबल के बियाबान जंगलों में सिर्फ इसी का खौफ। खुद की समानांतर सरकार और डकैतों के सरदार। कुछ ऐसी शख्सियत थी डकैत मोहर सिंह गुर्जर की। पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे दस्यु मोहर सिंह गुर्जर का 5 मई 2020 की सुबह निधन हो गया। 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। ये भिंड जिले के मेहगांव के वार्ड 14 के रहने वाले थे।

मेहगांव नगर परिषद के अध्यक्ष भी रहे

मेहगांव नगर परिषद के अध्यक्ष भी रहे

बता दें कि 1970 के दशक में चंबल के बीहड़ डकैत मोहर सिंह व उनकी गैंग की गोलियों की गूंजा करते थे। 1980 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष अन्य डकैतों के साथ समर्पण किया था। समर्पण के बाद आत्मसमर्पित दस्यु मोहर सिंह गुर्जर नगर परिषद मेहगांव का चुनाव लड़ा। वर्ष 1996 में नगर परिषद अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुने गए थे।

 पीएम मोदी से किया मंदिरों के जीर्णाद्धार

पीएम मोदी से किया मंदिरों के जीर्णाद्धार

कभी चंबल में डकैतों के सरदार रहे मोहर सिंह गुर्जन ने सम्पर्ण के बाद सामान्य जिंदगी जीना शुरू कर दिया था। सितंबर 2019 को मोहर सिंह ने पीएम नरेन्द्र मोदी को खत लिखकर आग्रह किया कि मुरैना में गुर्जर प्रतिहार राजवंश के निर्मित 9वीं सदी के बटेश्वर स्थित शिव मंदिरों की शृंखला में शामिल जर्जर मंदिरों के जीर्णोद्धार किया जाए। अपने इस खत से एक बार फिर मोहर सिंह सुर्खियों में आ गए थे।

महात्मा गांधी की तस्वीर के सामने डाले हथियार

महात्मा गांधी की तस्वीर के सामने डाले हथियार

मोहर सिंह गुर्जर ने 14 अप्रैल 1972 को मुरैना के जौरा गांधी सेवा आश्रम में महात्मा गांधी की तस्वीर के सामने हथियार डाल सरेंडर कर दिया था। तब 37 वर्षीय मोहर सिंह गुर्जर ने समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की प्रेरणा से बागी जीवन छोड़ दिया था। फिर कभी दोबारा ताउम्र बीहड़ उन्हें आकर्षित नहीं कर पाए। समाज की मुख्यधारा में वापस आए तो लोग उन्हें दद्दा कहकर पुकारने लगे।

मोहर सिंह गिरोह ने की 80 से ज्यादा लोगों की हत्या

मोहर सिंह गिरोह ने की 80 से ज्यादा लोगों की हत्या

कभी मोहर सिंह का गिरोह सबसे खतरनाक हुआ करता था। पुलिस ने सबसे बड़ा ईनाम भी इसी गिरोह पर रखा था। गिरोह पर करीब 80 लोगों की हत्या के आरोप थे। गोहद के जटपुरा गांव में जमीन हथियाने के लिए सताने वाले को गोलियों से छलनी कर 1958 में मोहर सिंह गुर्जर पुत्र भारत सिंह गुर्जर ने बीहड़ की राह पकड़ ली थी। अपनी अलग राह बनाई। एक-एक कर 150 बागियों का गिरोह बनाया। 60 के दशक में यह मोहर सिंह गुर्जर का गिरोह सबसे ज्यादा खूंखार माना जाता था। गिरोह के पास आधुनिक हथियार थे, जो उस जमाने में पुलिस के पास भी नहीं होते थे।

 14 साल बीहड़ में एकछत्र राज

14 साल बीहड़ में एकछत्र राज

यही वजह है कि 1958 से 1972 तक 14 साल कटीले बीहड़ में एकछत्र राज करने के दौरान पुलिस कभी भी पूरी ताकत से सामना नहीं कर पाई थी। मोहर सिंह गिरोह पर 60 के दशक में 12 लाख का इनाम था। खुद मोहर सिंह के सिर पर 2 लाख का इनाम रहा। जौरा में गांधी सेवा आश्रम में आत्मसर्मण किया तब गिरोह के नाम 80 से ज्यादा हत्याएं, 350 से ज्यादा केस थे। आत्मसमर्पण के दौरान उन्होंने एसएलआर, सेमी ऑटोमैटिक गन, 303 बोर चार रायफल, 4 एलएमजी, स्टेनगन, मार्क 5 रायफल सहित बड़ी संख्या में हथियार महात्मा गांधी की तस्वीर के सामने रखे थे।

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