Kuno: भारत का इकलौता चीता शावक, जिसे इंसान पाल रहे, मां ज्वाला ने स्वीकारा ही नहीं
चीता प्रोजेक्ट (Cheetah Project) के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाए आज पूरा एक साल हो गया। इसमें खास मादा चीता ज्वाला का वह इकलौता जीवित बचा शावक है, जो छह माह को होने को आया। जन्म के एक महीने बाद ही जीवन के लिए इस मादा चीता शावक का संघर्ष शुरू हो गया था...दरअसल बीमारी से ठीक होने के बाद जब यह मां के पास लौटा तो मादा चीता ज्वाला ने इसे स्वीकार ही नहीं किया, उसके बाद से यह शावक इंसानों के भरोसे पल रहा है। अर्थात कूना के विशेषज्ञ, डॉक्टर और स्टाफ इसकी देखभाल कर रहे हैंं।

भारत की धरती पर 70 साल बाद व पिंजरे में 410 साल पहली दफा मार्च 2023 में चीतों का जन्म हुआ था। मादा चीता ज्वाला (सियाया) ने चार शावकों को जन्म दिया था। इनमें से 3 शावकों की तेज गर्मी में लू लगने से मौत हो गई थी। चौथे शावक को कूनो के विशेषज्ञों व डॉक्टरों ने करीब 10 दिन तक लगातार इलाज देकर बचा लिया था। अब यह मादा शावक छह महीने का हो गया हैं। इसे छोड़े बाड़े में रखकर कूनो का स्टाफ ही पाल रहा है।
स्वस्थ्य होकर वापस लौटा तो मां ज्वाला ने नहीं अपनाया
भारत की धरती पर जन्में व इकलौते बचे इस मादा चीता शावक के जीवन का छह महीने का सफर काफी संघर्ष पूर्ण है। कारण जन्म के चंद रोज बाद भीषण लू और गर्मी के कारण उसके 3 भाई-बहन खत्म हो गए। जैसे-तैसे डॉक्टरों ने इसे लगाचार उपचारत रखकर बचा लिया। जब यह स्वस्थ्य होकर एक महीने बाद मां के पास वापस लौटा तो उसने अपनाया ही नहींं। दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ भी तमाम प्रयास कर हार गए, लेकिन मां ज्वाला ने अपने शावक को नहीं अपनाया। फिलहाल इस छह माह के शावक को ज्वाला के बाड़े के ठीक बाजू में जाली का परदा लगाकर रखा गया है, ताकि जाली के दोनों तरफ मां चीता को यह शावक देख सके। हालांकि इसे कूनो का स्टाफ, केयर टेकर और डॉक्टरों की टीम पाल रही है। इसे बॉटल से दूध फीडिंग कराया जाता है।
20 आए थे कूनो, 15 चीते बचे हैं
दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से बीते साल कुल 20 चीतों को लाया गया था। 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मादा चीता आशा और नर चीता ओबान को बाड़ों में रिलीज किया था। मार्च 2023 में नामीबियाई चीता सियाया जिसे बाद में ज्वाला नाम दिया गया था। 25 से 28 मार्च के बीच बाड़े में 4 शावकों को जन्म दिया था। इधर कूनो में इंफेक्शन, बीमारी, आपसी संघर्ष और गर्मी के कारण 6 चीतों की मौत हो गई थी। वहीं ज्वाला के चार शावकों में से 3 शावक भी भीषण गर्मी व लू के कारण खत्म हो गए थे। कूनो में अब कुल 15 चीते हैं।












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