Madhya Pradesh: नए मुख्यमंत्री चेहरे पर BJP कर रही मंथन, शिवराज चौहान ने दिए संकेत

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। तीन प्रमुख राज्यों में बीजेपी नेतृत्व का मुख्यमंत्रियों को चुनने के लिए विचार-मंथन जारी है। तीन राज्यों के नेताओं के साथ बैठक हो रही है। इन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री पद के चयन की अटकलों के बीच, शिवराज सिंह चौहान खुद को अलग किए हुए हैं।

चार बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने 'लाडली बहना' जैसी योजनाओं के दम पर मध्य प्रदेश में अपनी पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। बीजेपी ने एमपी में 230 में से 163 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है। लेकिन, फिर भी पार्टी अन्य संभावित उम्मीदवारों के साथ परामर्श कर रही है। एक पीढ़ीगत परिवर्तन की ओर झुकाव कर रही है। उधर, चौहान लगातार जोर देकर कह रहे हैं कि वह पार्टी के पैदल सैनिक हैं और वह दौड़ में नहीं हैं।

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संविधान निर्माता बीआर अंबेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए, चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी के अनुसार, हम समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। इस टिप्पणी को कई लोगों ने मुख्यमंत्री द्वारा पार्टी नेतृत्व को यह याद दिलाने के एक सूक्ष्म प्रयास के रूप में देखा कि कैसे उनकी सरकार की लाडली बहना जैसी कल्याणकारी योजनाओं ने बीजेपी के लिए चुनाव जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अगले साल होने वाले बड़े चुनाव को ध्यान में रखते हुए, बीजेपी द्वारा केंद्रीय राज्यों के लिए मुख्यमंत्रियों का चयन करते समय दिग्गजों के बजाय पूरी तरह से नए चेहरों पर विचार करने की चर्चा है।

'चौहान दिल्ली से दूर, मजबूत कर रहे लोकसभा वोट'
वहीं, शिवराज चौहान खुद को दिल्ली से दूर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली नहीं जा रहा हूं। मैं छिंदवाड़ा जाऊंगा, जहां हम विधानसभा की सभी 7 सीटें जीतने में सक्षम नहीं थे। मेरा केवल एक ही संकल्प है, बीजेपी को लोकसभा में मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटें जीतनी चाहिए। हम प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक माला तैयार करना चाहते हैं। यह 29 कमलों से बनी होगी, जो हम उन्हें तब भेंट करेंगे, जब वह दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे।

एमपी विधानसभा चुनाव में कमल खिलाने के बाद, शिवराज कडाके की ठंड से पहले व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए भोपाल में रैन बसेरों का दौरा किया। उन्होंने रैन बसेरा का खाना भी चखा। वह भोपाल के एक इलाके में भी गए और 'लाडली बहना' लाभार्थियों के एक ग्रुप से मुलाकात की।

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