Madhya Pradesh Election Result 2023: कांग्रेस को हराने में BJP के मददगार बने ये 5 फैक्टर, कायम रहा रिकॉर्ड
Madhya Pradesh Election Result 2023: पिछले 20 सालों में से 18 साल तक मध्य प्रदेश पर शासन करने के बावजूद, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सत्ता विरोधी लहर के किसी भी प्रभाव से बचती नजर आई है। राज्य में बीजेपी एक शानदार जीत के साथ सत्ता में लौटने की कगार पर है, जिससे ऐसा लगता है कि कांग्रेस के पास राज्य की 230 सीटों में से केवल एक अंश ही रह गया है।
हालांकि, रविवार दोपहर डेढ़ बजे तक लगभग 42 फीसदी वोटों की गिनती में बीजेपी 163 सीटों पर आगे और कांग्रेस 64 सीटों पर आगे दिखी। आइए जानते हैं क्या हैं बीजेपी की बंपर जीत और कांग्रेस को भारी नुकसान के 5 फैक्टर?

'मोदी के मन में MP और MP के मन में मोदी'
कई नेताओं द्वारा संचालित बीजेपी का उत्साही अभियान 'मोदी के मन में MP और MP के मन में मोदी ने कांग्रेस के कल्याणकारी वादों को नुकसान पहुंचाया। पीएम मोदी अपनी 14 रैलियों के जरिए जनता को यह समझाने में सफल रहे कि उनका मध्य प्रदेश पर विशेष ध्यान है।
कल्याणकारी कार्यक्रम
सत्तारूढ़ दल की लाडली बहना योजनाएं और किसान सम्मान निधि कार्यक्रमों ने जनता का विश्वास जीत लिया। इस नवंबर में दोनों योजनाओं के लाभार्थियों को उनके खातों में 1,250 और 10 हजार रुपए प्राप्त हुए। जिसके कारण मतदाताओं में वोटिंग से पहले ही पार्टी के प्रति विश्वास को नेक्स्ट लेवल तक पहुंचा दिया। इतना ही नहीं, बीजेपी महिलाओं, गरीब मतदाताओं के साथ-साथ दलितों और आदिवासी जनता में मददगार की छवि बनाने में भी बीजेपी सफल रही है।
डबल इंजन का वादा
डबल इंजन सरकार यानी राज्य के निवासियों के लिए राज्य और केंद्र से बेहतर परिणाम दिलाने में मददगार।
तीन केंद्रीय मंत्री समेत 7 सांसद
खास बात यह भी रही कि चुनावी मैदान में तीन केंद्रीय मंत्री समेत 7 सांसद और एक राष्ट्रीय महासचिव का पार्टी को फायदा मिलता दिख रहा है।
खंडित कांग्रेस अभियान
राज्य के मतदाताओं के बीच बीजेपी ने जमीनी सतह पर मजबूती जाहिर की। अक्टूबर में चुनाव की तारीखों की घोषणा होने से काफी पहले ही बीजेपी कैडर नतीजों से सीधे जोड़ने में सक्षम रहा। इसके विपरीत, कांग्रेस का अभियान ज़मीन पर अदृश्य सा रहा। सोशल मीडिया पर बहुत अधिक निर्भर नजर आया। जिसके कारण पार्टी अपनी बात जमीन पर रखने में विफल रही। पार्टी मतदाताओं तक पहुंचने के लिए उम्मीदवारों पर निर्भर रही। इसी वजह से, कांग्रेस अपने घोषणा पत्र के 1,200 वादों में से अधिकांश को लोगों तक पहुंचाने में विफल रही।












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