Kuno National Park: चीते को समझा था तेंदुआ, लाठी-डंडे उठा लिए थे, गनीमत रही बच गई जान!
कूनो आया चीता आबादी वाले इलाकों तक घूम रहा है। यह उसके लिए जानलेवा व खतरनाक भी हो सकता है। दरअसल ग्रामीण चीता को सामान्य तेंदुआ समझकर हमला कर सकते हैं। झार-बरौदा गांव में वनकर्मियों के कारण लोग उससे दूर हो गए थे।

कूनो के चीते की सुरक्षा को लेकर वन अमले और एक्सपर्ट के हाथ-पैर फूल रहे हैं। दरअसल बीते तीन दिन से 'ओवान' नाम का नर चीता जंगल से बाहर निकलकर गांवों के खेतों तक पहुंच गया था। लोग उसे तेंदुआ समझा लाठी-डंडे और राॅड लेकर घरों से निकल आए थे, गनीमत यह रही कि चीते को ट्रेस कर रहा वन अमला सामने आ गया और लोगों को बताया कि यह तेंदुआ नहीं दुर्लभ चीता है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने कूनों में छोड़ा था। ग्रामीण तुंरत माजरा समझ गए और फिर चीते को देखने के लिए उत्सुक हो गए। यदि चीता ऐसे ही जंगल के बाहर घूमता रहा तो उसकी जान पर बन सकती है।

कूनो के जंगल से तीन दिन पहले भाग चीता ओवान मंगलवार को भी अपने ठिकाने पर नहीं पहुंचा। दोपहर तक वह नहाड़-शिलपुरा गांव के करीब जंगल में मौजूद है। ओवान रोज करीब 30 से 35 किलोमीटर दौड़कर इलाके को बदल रहा। वन विभाग सूत्रों के अनुसार चीता 'ओवान' मंगलवार सुबह गांव से करीब दो किलोमीटर अंदर जंगल में था। उसकी लोकेशन के अलावा उसे देखा भी गया है। वह 24 घंटे में 30 से 34 किलोमीटर का सफर तय कर रहा है। दिन में वह ठंडे स्थान के आसपास मौजूद रहता है।
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कूनो प्रबंधन और विशेषज्ञों की बढ़ रही परेशानी
ओवान के अलग-अलग इलाकों में पहुंचने और कोर एरिया से लगातार दूर जाने के कारण कूनो के विशेषज्ञ और सुरक्षा अमला परेशान है, उसकी टेंशन बढ़ रही हैं। कारण वह जंगल के बजाय खुले इलाके, गांवों में आबादी के नजदीक और भौगोलिक विषमता वाले इलाके में पहुंच गया है। यहां आसानी से वाहन भी नहीं जा सकते वहीं उसकी रफ्तार से वनकर्मी उसका पीछा भी नहीं कर सकते।

तीन दिन में तीन इलाके बदल चुका 'चीता ओवान'
चीता ओवान बीते तीन दिन में करीब 60 से 70 किलोमीटर का सफर तय कर चुका है। पहले दिन वह कूनो से करीब 25 किलोमीटर दूर झार-बरौदा गांव में प्याज के खेत में बैठा मिला था। टीम उसके गले में लगी काॅलर आईडी से उसी लोकेशन ट्रेस कर पीछे-पीछे चल रही थी। दूसरे दिन वह पार्वती बड़ौदा के पास क्वारी नदीं के दूसरे छोर पर पानी पीते और ऊंचाई वाले इलाके में घूमते नजर आया था। मंगलवार तीसरे दिन वह नहाड़-शिलपुरा गांव के पास नजर आया है। उसे देखकर लग रहा है कि वह कूनो के बफर जोन से बाहर शिवपुरी के जंगल की तरफ बढ़ रहा है। बता दें कि चीता ओवान पहली दफा जंगल से बाहर नहीं निकला है, इसके पहले वह 17 मार्च को भी सेसईपुरा मोरावन तो कभी अगरा की तरफ जा चुके हैं।
विशेषज्ञों का मत चीता भाग नहीं रहा, 'एरिया को एक्सप्लोर' कर रहे हैं
चीते ओवान के बार-बार कूनों के जंगल की सरहद पार कर गांव, खेत, नदी के आसपास पहुंचने को लेकर विशेषज्ञों का अपना ही तर्क है। चीता प्रोजेक्ट से जुड़े कमर कुरैशी ने स्थानीय मीडिया से जानकारी साझा करते हुए बताया कि पहला तो आमजन को चीता से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है, चीता खुद से इंसानों पर हमला न हीं करता है। ऐसी कोई हिस्ट्री नहीं है। दूसरा यह कि चीता व अन्य कोई भी जानवर जब नई जगह पर छोड़ा जाता है तो वह उस इलाके को घूमता है, कोने-कोने को एक्सप्लोर करता है। चीता ओवान भी यही कर रहा है, अन्य चीते भी अपने-अपने एरिया को एक्सप्लोर करेंगे। जब यह जंगल को व आसपास के इलाके को घूम लेंगे तो एक किसी स्थान को चुनने का प्रयास करते हैं, जो इनका स्थाई ठिकाना कहलाता है। चीता व अन्य बड़े जानवर जंगल भी घूमते हैं, जंगल के जानवर, अपने शिकार की संभावनाएं, पानी के स्रोत को देखते हैं। इनके आसपास जो वन अमला व प्रबंधन होता है, उसे भी जानवर बारीकि से वाॅच करते हैं। जब यह इलाका एक्सप्लोर कर लेंगे, तो इनकी यह दौड़ रूक जाएगी और एक स्थान विशेष में ये सैटल हो जाएंगे। अभी इन्हें पूरा जंगल खाली दिख रहा है, जब इनके बाद वाले चीते आएंगे तो वे इतनी दौड़ नहीं लगाएंगे, वे इनके साथ आसानी से सैटल हो जाएंगे।












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