भाजपा विधायक प्रदीप पटेल के IG और ASP के सामने दंडवत होने और हाथ जोड़ने का पूरा सच जानिए
क्या मऊगंज के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं? क्या पुलिस के आला अधिकारी अपराधियों का बचाव कर रहे हैं? क्या जिले में अवैध नशे के कारोबार का खात्मा करना पुलिस की प्राथमिकता नहीं है? स्थानीय विधायक प्रदीप पटेल ने इन सवालों को उठाते हुए पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी मौखिक और लिखित शिकायतों को पुलिस नजरअंदाज कर रही है, जिससे यह साफ हो रहा है कि विधायक की हैसियत पुलिस अधिकारियों के सामने कमतर हो गई है।

विधायक की निराशा
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प्रदीप पटेल ने कहा कि उन्होंने जिले में नशे के अवैध धंधे को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। थानों में जाकर अधिकारियों से चर्चा करने के बावजूद उन्हें कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। निराश होकर, उन्होंने एक अलग तरीका अपनाया और रीवा रेंज के आईजी महेंद्र सिंह सिकरवार के कार्यालय पहुंच गए। आईजी के न मिलने पर उन्होंने कार्यालय के बाहर दंडवत होकर लेटने का निर्णय लिया।
विधायक ने एसपी और एएसपी को भी ज्ञापन दिया, जिसमें उन्होंने मऊगंज किला की स्थिति को गंभीरता से प्रस्तुत किया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि हर गांव में अवैध शराब, कोरेक्स, गांजा और नशे की गोलियों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, बावजूद इसके पुलिस ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं।

नशे का खात्मा: एक बड़ा सवाल
विधायक ने स्पष्ट किया कि नशे के कारण हत्या, लूट, चोरी, छेड़खानी और दुष्कर्म के मामलों में इजाफा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी भी अपराधियों का संरक्षण दे रहे हैं, जिससे स्थानीय लोग और खासकर महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नशे के माहौल के कारण कई लड़कियां स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
खुद को कमरे में कर चुके हैं बंद
विधायक प्रदीप पटेल ने पहले भी अपनी आवाज को अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाने के लिए अनोखे तरीके अपनाए हैं। जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्होंने कई बार गांधीवादी तरीके से धरने का सहारा लिया। हनुमना क्षेत्र के मिसिरगवां में 11 हजार क्विंटल धान की बिक्री करवाने के लिए उन्होंने चार दिन तक खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। केवल तब ही वह बाहर आए जब भोपाल से आदेश आया। इसी तरह, केदारनाथ कॉलेज के पास की सड़क निर्माण के लिए उन्होंने कीचड़ में धरने पर बैठकर प्रशासन का ध्यान खींचा और अंततः सड़क बनवाने में सफलता प्राप्त की।
चर्चा यह भी
इस बीच, क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि जिले के एएसपी अनुराग पांडेय और आईजी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि अवैध नशे के कारोबारियों के भी एएसपी से घनिष्ठ संबंध हैं, जिसके कारण वे बिना किसी डर के अपने धंधे को जारी रखे हुए हैं। इस परिस्थिति में, यह कहा जा सकता है कि जब सैयां भये कोतवाल, तो डर काहे का। यदि अपराधियों के सीधे आईजी के साथ संबंध हैं, तो वे क्यों डरेंगे?
इस सबके बीच विधायक प्रदीप पटेल की सक्रियता और उनके अनोखे प्रयास यह संकेत देते हैं कि जब प्रशासनिक तंत्र अपनी जिम्मेदारियों से भागता है, तो जनप्रतिनिधियों को खुद को सामने लाना पड़ता है। उनके दंडवत होने से कहीं बड़ा मुद्दा न बन जाए, यह भी चर्चा का विषय है। विधायक का यह कदम यह दर्शाता है कि वे अपने क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति कितने समर्पित हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या उनके प्रयासों का कोई असर होगा या फिर प्रशासनिक ढांचा ऐसे ही सुस्त बना रहेगा?











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