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G-20 Summit: 'पैरेट लेडी' सहित 229 धरोहरों की विदेशों से घर वापसी

खजुराहो की 'पैरेट लेडी' प्रतिमा सहित बीते 9 सालों में देश की 229 ऐतिहासिक ​धरोहरों और विरासत को विदेशों से घर वापसी कराकर उनकी मूल जगहों पर स्थापित कराया गया है।

पैरेट लेडी सहित 229 धरोहरों की विदेशों से घर वापसी

खजुराहो की ऐतिहासिक धरोहर में शुमार 900 साल पुरानी 'पैरेट लेडी' सहित करीब 229 प्रतिमाओं, ऐतिहासिक वस्तुओं, संस्कृति, सभ्यता और इतिहास से जुड़ी धरोहरों की विदेशों से घर वापसी हुई है। दरअसल ये वो विरासत व धरोहरें हैं जिन्हें अवैध तरीके से विदेश ले जाया गया था। भारत सरकार ने इन्हें भारत लाकर इनकी मूल जगह पर स्थापित कराया है। मप्र के खजुराहो में ऐसी ही प्रतिमा 'पैरेट लेडी' की घर वापसी के बाद संग्राहालय में स्थापित कराया है। इसके अलावा अन्य धरोहरों को भी संजोया गया है।

पैरेट लेडी फाइल फोटो

खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन हॉल में सांस्कृतिक संपति की सुरक्षा और बहाली पर 'पोशाक खजाने की वापसी' शीर्षक से प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। इसमें मुख्य रुप से भारत सरकार द्वारा 2014 से 2022 तक 229 देश से लाई गई और विरासत से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं को स्थापित कर प्रदर्शित किया गया है, जिनकी वापसी करवाई गई है। इनमें से चयनित वस्तुएं प्रदर्शनी में प्रदर्शित की गई हैं। बीते रोज जी-20 समिट के पहले दिन केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

पैरेट लेडी फाइल फोटो


जी-20 समिट की बैठकों का मुख्य हिस्सा बनाया गया है
'पोशाक खजाने की वापसी' प्रदर्शनी को जी-20 समिट की संस्कृति समूह की बैठकों का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत और दुनियाभर में सांस्कृतिक विरासत की सफल वापसी के चुनिंदा उदाहरणों के माध्यम से सांस्कृतिक संपत्ति के प्रत्यावर्तन की भावना, आवश्यकता और भविष्य को प्रदर्शित करना है। प्रदर्शनी सांस्कृतिक वस्तुओं, उनके इतिहास और उनकी सफल वापसी के आसपास की कहानियों को दर्शाने का माध्यम बनाया गया है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान और राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा संयुक्त रूप से प्रदर्शनी 'पोशाक खजाने की वापसी' का आयोजन किया जा रहा है। प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए जा रहे सबसे महत्वपूर्ण 'पैरेट लेडी' महिला है, जिसे 2015 में कनाडा से भारत वापस लाया गया था। इसे अब खजुराहो में एएसआई साइट संग्रहालय में रखा गया है। इसके अलावा 26 पुरातत्व महत्व की वस्तुओं को चित्रित भी किया गया है।

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    'पैरेट लेडी' नाम क्यों दिया गया है
    खजुराहो में 'पैरेट लेडी' प्रतिमा का ऐतिहासिक और पुरातात्विक काफी महत्व है। यह प्रतिमा 900 साल पुरानी यह प्रतिमा बलुआ पत्थर से बनी है। इसमें एक महिला (अप्सरा या नृत्यांगना) की भावपूर्ण मुद्रा में प्रदर्शित की गई है। इसके ऊपरी हिस्से में पीछे की तरफ एक तोता बैठा दिखाया गया है। इसलिए इसे 'पैरेट लेडी' नाम दिया गया है। यह प्रतिमा पूर्व के वर्षों में खजुराहो से चोरी हो गई थी। बाद में तस्करों ने इसे कनाडा पहुंचा दिया गया था। वहां की सरकार ने इसे जब्त किया था। साल 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी की कनाडा यात्रा के दौरान इस प्रतिमा को वापस लाया गया था। उस समय यह प्रतिमा दोनों देशों में काफी चर्चा का विषय रही थी। खजुराहो की 900 साल पुरानी 'पैरट लेडी' मूर्ति खुजराहो में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संग्रहालय में वापस लाई गई थी।

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