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Ashoknagar News: किरमिच खेड़ी को सड़क से जोड़ने की पहल, जानिए कैसे सिंधिया के प्रयासों से टूटी सालों की बाधा

Jyotiraditya Scindia Ashoknagar News: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की मुंगावली तहसील के आदिवासी बहुल गांव किरमिच खेड़ी के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। वर्षों से मुख्य सड़क से कटे इस गांव को अब जल्द ही पक्की सड़क से जोड़ा जाएगा। केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के त्वरित हस्तक्षेप से यह लंबे समय से अटकी परियोजना अब हकीकत की ओर बढ़ रही है।

किरमिच खेड़ी के ग्रामीणों को अब तक खेतों और कीचड़ भरे अस्थायी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था, जो बरसात में और भी मुश्किल हो जाता था। सिंधिया के प्रयासों से इस समस्या का स्थायी समाधान होने जा रहा है, जिसने ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ा दी है।

Jyotiraditya Scindia effort to connect Kirmich Khedi in Ashoknagar MP with road

किरमिच खेड़ी की समस्या, सड़क का अभाव

किरमिच खेड़ी, मुंगावली ब्लॉक मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर और मुख्य सड़क से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस आदिवासी बहुल गांव में स्कूल, बिजली, और कुछ अन्य बुनियादी सुविधाएं तो उपलब्ध हैं, लेकिन पक्की सड़क का अभाव ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा है। गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को 14-15 निजी खेतों से होकर गुजरना पड़ता है, जहां अस्थायी और कीचड़ भरे रास्ते हैं। बरसात के मौसम में ये रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों, और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।

ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चे, गर्भवती महिलाएं, और मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। एक ग्रामीण, रामदास आदिवासी, ने कहा, "बरसात में तो रास्ता इतना खराब हो जाता है कि मोटरसाइकिल भी फंस जाती है। कई बार मरीजों को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ता है।" एक अन्य ग्रामीण, श्यामबाई, ने बताया, "हमारे बच्चे स्कूल जाने के लिए कीचड़ में चलते हैं, जिससे उनके कपड़े और किताबें खराब हो जाती हैं। सड़क न होने से हमारा गांव दुनिया से कटा हुआ लगता है।"

सिंधिया का हस्तक्षेप, टूटी बाधाएं

किरमिच खेड़ी की इस समस्या का समाधान तब शुरू हुआ, जब यह मामला केंद्रीय मंत्री और गुना-अशोकनगर के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संज्ञान में आया। ग्रामीणों ने अपनी समस्या को स्थानीय नेताओं और प्रशासन के माध्यम से सिंधिया तक पहुंचाया। सिंधिया ने तत्काल इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन को सड़क निर्माण के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

सड़क निर्माण में सबसे बड़ी बाधा सीमांकन और निजी जमीनों के मालिकों से सहमति का अभाव था। कई खेत मालिकों ने अपनी जमीन से सड़क निकालने की अनुमति देने में हिचक दिखाई थी, जिसके कारण यह परियोजना वर्षों से अटकी हुई थी। सिंधिया ने प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर इस समस्या का समाधान निकाला। उनकी पहल पर जिला प्रशासन ने खेत मालिकों के साथ कई दौर की बातचीत की और उनकी सहमति प्राप्त की। इसके बाद, सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की गई।

प्रधानमंत्री जन-मन योजना: कार्यादेश जारी

किरमिच खेड़ी को मुख्य सड़क से जोड़ने की यह परियोजना प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास करना है ताकि वहां के निवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाएं मिल सकें। 14 मई 2025 को इस परियोजना के लिए कार्यादेश जारी किया गया, और निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "किरमिच खेड़ी में 1.5 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण किया जाएगा, जो गांव को मुख्य सड़क से जोड़ेगी। यह सड़क ग्रेवल और डामर से बनेगी, ताकि यह टिकाऊ और मौसम प्रतिरोधी हो। मानसून समाप्त होने के बाद, यानी सितंबर 2025 से निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।" परियोजना की अनुमानित लागत 2.5 करोड़ रुपये है, और इसे 12 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

ग्रामीणों में खुशी, सिंधिया को दिया धन्यवाद

सड़क निर्माण की इस खबर ने किरमिच खेड़ी के ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ा दी है। गांव के सरपंच, भगवान सिंह आदिवासी, ने कहा, "हम वर्षों से सड़क के लिए मांग कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। सिंधिया जी ने हमारी आवाज सुनी और तुरंत कार्रवाई की। अब हमें उम्मीद है कि हमारे बच्चे आसानी से स्कूल जा सकेंगे, और मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।"

ग्रामीण महिला, राधा बाई, ने भावुक होते हुए कहा, "सड़क बनने से हमारे गांव का भाग्य बदल जाएगा। अब हमें कीचड़ में नहीं चलना पड़ेगा, और हमारे बच्चे सुरक्षित स्कूल जा सकेंगे। सिंधिया जी और सरकार को दिल से धन्यवाद।" ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ गांव में स्ट्रीट लाइट और जल निकासी की व्यवस्था भी की जाए, ताकि बरसात में सड़क की स्थिति खराब न हो।

सियासी और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस परियोजना को लेकर सियासी और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भाजपा के स्थानीय नेता और मुंगावली विधायक ब्रजेंद्र सिंह यादव ने कहा, "सिंधिया जी ने किरमिच खेड़ी के लिए जो किया, वह ग्रामीण विकास का एक शानदार उदाहरण है। उनकी पहल से न केवल इस गांव को लाभ होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में कनेक्टिविटी और विकास को बढ़ावा मिलेगा।"

वहीं, कांग्रेस ने इस परियोजना का स्वागत तो किया, लेकिन इसे देरी से शुरू होने वाला कदम बताया। कांग्रेस नेता लखन घनघोरिया ने कहा, "यह अच्छी बात है कि किरमिच खेड़ी को सड़क मिल रही है, लेकिन यह परियोजना पहले क्यों नहीं शुरू हुई? सरकार को सभी ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए ऐसी परियोजनाओं पर तेजी से काम करना चाहिए।"

सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। एक एक्स यूजर ने लिखा, "सिंधिया जी ने किरमिच खेड़ी के लिए जो किया, वह वास्तव में सराहनीय है। ग्रामीण भारत को सड़कों से जोड़ना ही सच्चा विकास है।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत यह परियोजना आदिवासी समुदाय के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।"

मध्य प्रदेश में ग्रामीण कनेक्टिविटी पर जोर

किरमिच खेड़ी की यह सड़क परियोजना मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की ग्रामीण कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। हाल के वर्षों में, मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कहा था कि मध्य प्रदेश अब बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकल चुका है और सड़कों, मेट्रो, और अन्य परियोजनाओं के माध्यम से देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो रहा है।

प्रधानमंत्री जन-मन योजना (पूर्व में पीएम ग्राम सड़क योजना) के तहत मध्य प्रदेश में हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़ा है। किरमिच खेड़ी की यह परियोजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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