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MP News: जस्टिस संजीव सचदेवा, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस, जानिए कौन हैं और क्या है उनका सफर

MP News Chief Justice: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को अपना नया मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) मिल गया है। जस्टिस संजीव सचदेवा को केंद्र सरकार ने 14 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना के तहत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया है।

इससे पहले वे 24 मई 2025 से कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी नियुक्ति पूर्व चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत के 23 मई 2025 को रिटायर होने के बाद हुई थी। जस्टिस सचदेवा का यह सफर उनके कानूनी अनुभव, न्यायिक निष्पक्षता, और पारदर्शिता के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

Justice Sanjeev Sachdeva New Chief Justice of MP High Court know his journey

कौन हैं जस्टिस संजीव सचदेवा?

जस्टिस संजीव सचदेवा का जन्म 26 नवंबर 1964 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली में पूरी की और कानून के क्षेत्र में शानदार करियर बनाया। उनकी शैक्षिक और पेशेवर उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

शिक्षा:

1982: दिल्ली पब्लिक स्कूल, मथुरा रोड से स्कूली शिक्षा पूरी की।

1985: श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय से वाणिज्य स्नातक (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की।

1988: कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी (कानून में स्नातक) की डिग्री प्राप्त की।

प्रोफेशनल करियर:

  • 1988: दिल्ली बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन।
  • 1992: लंदन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज में कॉमनवेल्थ यंग लॉयर्स कोर्स में हिस्सा लिया। इस कोर्स के लिए उन्हें ब्रिटिश काउंसिल स्कॉलरशिप मिली थी।
  • 1995: सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड की परीक्षा पास की।
  • 2011: दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किए गए।
  • 2013: 17 अप्रैल 2013 को दिल्ली हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त।
  • 2015: 18 मार्च 2015 को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीश बने।
  • 2024: 30 मई 2024 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में स्थानांतरित।

जस्टिस सचदेवा ने 20 साल से ज्यादा समय तक दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। उनकी विशेषज्ञता संवैधानिक कानून, वाणिज्यिक कानून, और प्रशासनिक कानून जैसे क्षेत्रों में रही है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में नियुक्ति का सफर

जस्टिस संजीव सचदेवा को 30 मई 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद:

9 जुलाई 2024 से 24 सितंबर 2024: उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम किया।

24 मई 2025: पूर्व चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत के रिटायरमेंट के बाद उन्हें फिर से कार्यवाहक चीफ जस्टिस बनाया गया।

14 जुलाई 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का स्थायी चीफ जस्टिस नियुक्त किया।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की स्थिति

जस्टिस संजीव सचदेवा की नियुक्ति के साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक और जज की नियुक्ति हुई है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह, जो पहले मद्रास हाईकोर्ट में थे, को जबलपुर हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया है। इससे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की संख्या 34 हो गई है, जबकि कुल स्वीकृत पद 53 हैं। यानी अभी भी 19 जजों के पद खाली हैं।

जस्टिस सचदेवा का योगदान और विशेषताएं

  • जस्टिस संजीव सचदेवा अपने निष्पक्ष फैसलों और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। कुछ खास बातें:
  • अनुभव: दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक वकालत और न्यायाधीश के रूप में काम करने का अनुभव।

पुरस्कार: 1992 में ब्रिटिश काउंसिल स्कॉलरशिप सहित कई सम्मान प्राप्त।

धर्म और न्याय: 9 जून 2025 को जस्टिस सचदेवा ने वृंदावन में स्वामी प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की थी। इस दौरान स्वामी ने उन्हें न्याय को धर्म से जोड़ने की सलाह दी थी। स्वामी ने कहा, "धर्मो रक्षति, रक्षितः - जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।"

कुशल प्रशासन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में उनके कार्यकाल में न्यायिक प्रक्रियाओं में सुधार और पारदर्शिता को बढ़ावा मिला।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "जस्टिस संजीव सचदेवा के अनुभव और निष्पक्षता से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया और मजबूत होगी। हम उनकी नियुक्ति का स्वागत करते हैं।"

स्थानीय वकील रमेश परमार ने कहा, "जस्टिस सचदेवा का दिल्ली हाईकोर्ट में शानदार रिकॉर्ड रहा है। उम्मीद है कि वे मध्य प्रदेश में भी तेजी से और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करेंगे।"

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सामने चुनौतियां

खाली पद: हाईकोर्ट में 19 जजों के पद अभी भी खाली हैं, जिससे मामलों का बैकलॉग बढ़ रहा है। लंबित मामलों को जल्द निपटाने के लिए तकनीक और संसाधनों का बेहतर उपयोग करना होगा। न्यायिक प्रक्रियाओं में और अधिक पारदर्शिता लाने की जरूरत है।

कानून विशेषज्ञ डॉ अनिल शर्मा ने कहा, "जस्टिस सचदेवा का अनुभव मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को नई दिशा देगा। लेकिन खाली जजों के पद और लंबित मामलों की चुनौती से निपटना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए।"

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