MP News: प्रयागराज महाकुंभ जाने वाले हाईवे और सड़कों पर जाम, राजनीति गर्मा गई, पटवारी और दिग्विजय सिंह का बयान
MP News: प्रयागराज महाकुंभ में शामिल होने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को रास्ते में भारी जाम का सामना करना पड़ रहा है। खासकर मध्य प्रदेश के रीवा, कटनी और सतना जिलों में सड़कों पर जाम के कारण यात्रा प्रभावित हो रही है।
इस पर राजनीति भी गर्मा गई है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस स्थिति को लेकर दोनों प्रदेशों की सरकारों पर निशाना साधा है।

अखिलेश यादव का हमला
अखिलेश यादव ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें कटनी के एक पुलिसकर्मी ने महाकुंभ में जाने के बजाय घर जाने की सलाह दी। वीडियो को शेयर करते हुए अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, "इस पार-उस पार दोनों तरफ़ है 'भाजपा सरकार'। एक कहे आओ महाकुंभ, दूसरा कहे न जाओ पार।" उनका यह ट्वीट भाजपा सरकारों के बीच समन्वय की कमी और जाम की समस्या पर सीधा हमला था।
जीतू पटवारी का बयान
मध्य प्रदेश प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मुद्दे को लेकर ट्वीट किया और सरकार की नाकामी पर सवाल उठाया। पटवारी ने कहा कि प्रयागराज जाने वाले रास्तों पर लगे जाम और अव्यवस्थाओं की वजह से श्रद्धालु परेशान हो रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया, "मप्र के रीवा, कटनी, मैहर, चित्रकूट, जबलपुर से ही 'महा-जाम' यात्रा बाधित कर रहा है। संगम से 250 किमी पहले श्रद्धालुओं को रोक रहे हैं। मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश के बीच अराजकता का डबल-इंजन, बुलेट ट्रेन से तेज दौड़ रहा है और सरकारी समन्वय की कमी परेशानी बढ़ा रही है। सड़कों पर कई किमी कतारें हैं। लोग खाने-पीने की किल्लत का सामना कर रहे हैं। प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पा रहा है।"

सरकार पर तंज
पटवारी का यह बयान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों के बीच समन्वय की कमी को लेकर था, क्योंकि दोनों राज्यों के बीच इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात की स्थिति बेहद जटिल हो गई है। सड़कों पर भारी जाम और यात्री सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने इसे एक प्रशासनिक विफलता करार दिया।
प्रयागराज महाकुंभ की अव्यवस्थाओं पर राजनीति और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं
प्रयागराज महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए रास्ते में भारी जाम और अव्यवस्थाओं को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस पर मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए न केवल प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा किया, बल्कि दोनों राज्यों की सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

जीतू पटवारी का हमला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक ट्वीट में कहा, "करीब ₹7500 करोड़ खर्च करके, 100 करोड़ धर्मप्रेमियों के लिए सुविधा का दावा था, किंतु ये अव्यवस्था आस्था पर भारी है। मप्र और उप्र की बीजेपी सरकारों को बेहतर कोऑर्डिनेशन के लिए तत्काल कॉमन एक्शन प्लान बनाना चाहिए। फिर, महाकुंभ के प्रचार की तरह ही प्राथमिक सुविधाओं की उपलब्धता का प्रचार भी किया जाना चाहिए।" पटवारी ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की परेशानियों को लेकर प्रशासन को अपनी प्राथमिकताओं पर फिर से विचार करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी श्रद्धालु को सड़क पर परेशान न होना पड़े।
दिग्विजय सिंह का बयान
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि कुंभ में 100 करोड़ लोगों के स्नान की व्यवस्था है, लेकिन वे भूल गए कि इतने लोगों के वहां आने के रास्तों की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी।" दिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि उन्हें रीवा से प्रयागराज जाने का मन था, लेकिन जब उन्होंने रास्तों की स्थिति के बारे में जानकारी ली तो पाया कि वहां पहुंचना असंभव था। उन्होंने आगे कहा कि वह दिल्ली संसद भवन के सत्र में पहुंचे, लेकिन भविष्य में प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करने का प्रयास करेंगे।
मुख्यमंत्री का निर्देश
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी और ट्वीट करते हुए कहा, "प्रयागराज महाकुंभ 2025 में सम्मिलित होने जा रहे बड़ी संख्या में प्रदेश एवं अन्य प्रदेशों के श्रद्धालुओं का चाक घाट (रीवा) से लेकर जबलपुर-कटनी-सिवनी जिले तक यातायात प्रभावित होने से मार्ग अवरुद्ध हो गया है, वाहनों में ज्यादातर बुजुर्ग, महिलाएं एवं बच्चे भी शामिल हैं।"
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं और प्रभावित लोगों के लिए तत्काल बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, जैसे कि भोजन, पानी, ठहरने की व्यवस्था, शौचालय और अन्य नागरिक सुविधाएं। इसके साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करें ताकि सुगम आवागमन व्यवस्था बनाई जा सके।
राजनीतिक माहौल
यह घटनाक्रम महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को हो रही समस्याओं पर राजनीति का मुद्दा बना चुका है। जबकि भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, प्रशासनिक स्तर पर कोशिशें जारी हैं कि कैसे इस स्थिति को जल्द सुधारा जा सके।












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