MP के इस जिले के 10 प्राइवेट स्कूलों को लौटाने पड़ेगे छात्रों की फीस के लगभग 65 करोड़ रुपए, जानें पूरा मामला
Jabalpur private school tuition fees़़: मध्य प्रदेश में मोहन सरकार में शिक्षा माफियाओं पर शिकंजा कसना शुरू हो चुका है। छात्रों की ट्यूशन फीस के नाम पर अभिभावकों से मोटी कमाई करने वाले प्राइवेट स्कूलों की शामत आ चुकी है। इसकी शुरूआत जबलपुर के प्राइवेट स्कूलों से हो चुकी है।
जबलपुर में शिक्षा विभाग ने दस प्राइवेट स्कूलों को 81 हजार से अधिक छात्रों की 65 करोड़ रुपये वापस करने का आदेश जारी किया है। ये पूरी धनराशि इन स्कूलों ने पिछले सात सालों में अतिरिक्त ट्यूशन फीस के रूप में वसूली गई थी।

जबलपुर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) घनश्याम सोनी ने इस आदेश का खुलासा करते हुए बताया कि इन स्कूलों ने अवैध रूप से ट्यूशन फीस बढ़ाई है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंध विषयों का विनियमन) अधिनियम, 2017 के तहत जिला स्तरीय समिति ने स्कूलों के खातों की समीक्षा की और ये पाया कि ये अभिभावकों से
अवैध फीस वृद्धि का हुआ पर्दाफाश
समिति ने पाया कि स्कूलों ने शैक्षणिक वर्ष 2018-19 और 2024-25 के बीच 81,117 छात्रों से 64.58 करोड़ रुपये वसूले। अधिकारियों ने इन अवैध फीस बढ़ोतरी को रद्द कर दिया है।
11 FIR हुई थी दर्ज
सोनी ने बताया कि मंगलवार को इन स्कूलों को नोटिस जारी कर अवैध रूप से वसूली गई फीस वापस करने का निर्देश दिया गया है। 27 मई को जबलपुर जिला प्रशासन ने स्कूल अधिकारियों और कुछ किताब दुकान मालिकों के खिलाफ अवैध रूप से फीस और पाठ्यपुस्तकों की कीमतें बढ़ाने के आरोप में 11 एफआईआर दर्ज की थीं। जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना ने बताया कि विसंगतियां पाए जाने के बाद स्कूल अधिकारियों और बुकशॉप मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
फीस वृद्धि के लिए मंजूरी लेना है जरूरी
नियमों के अनुसार अगर कोई स्कूल 10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने की योजना बनाता है तो उसे जिला प्रशासन की मंजूरी लेनी होगी। अगर फीस में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होती है, तो स्कूल को राज्य सरकार की समिति से मंजूरी लेनी होगी। कुछ स्कूलों ने उचित अनुमति के बिना 10 प्रतिशत से अधिक और अन्य ने 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ा दी। शिक्षा विभाग के इस कदम से हजारों प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।












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