MP News Bhopal: सिंहस्थ 2028 से पहले इंदौर-उज्जैन मेट्रो ट्रेन, मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला

Indore-Ujjain metro train News: मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 से पहले इंदौर और उज्जैन के बीच मेट्रो ट्रेन शुरू करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह परियोजना दोनों शहरों के बीच यात्रा समय को काफी कम करेगी और श्रद्धालुओं सहित दैनिक यात्रियों को सुविधाजनक, तेज, और सुरक्षित यातायात का विकल्प प्रदान करेगी।

मध्यप्रदेश कैबिनेट ने इस प्रोजेक्ट को गति देने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और आवश्यक मंजूरियों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

Indore-Ujjain metro train before Simhastha 2028 MP cabinet s big decision in bhopal

मेट्रो परियोजना का विवरण

  • रूट और दूरी: इंदौर-उज्जैन मेट्रो का प्रस्तावित रूट लगभग 47 किलोमीटर लंबा होगा। सड़क मार्ग से दोनों शहरों की दूरी करीब 55 किलोमीटर है, लेकिन मेट्रो कॉरिडोर को अधिक सीधा और कुशल बनाया जाएगा।
  • स्टेशन: इस रूट पर 8 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें लवकुश चौराहा (इंदौर) से शुरू होकर श्री महाकाल लोक (उज्जैन) अंतिम स्टेशन होगा। अन्य स्टेशनों में अरविंदो कॉलेज, बारोली, धरमपुरी, सांवेर, उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज, और नानाखेड़ा शामिल हैं।
  • रफ्तार: मेट्रो ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी, जिससे इंदौर से उज्जैन का सफर कुछ ही मिनटों में पूरा होगा।
  • प्रकार: यह एक रैपिड रेल प्रोजेक्ट होगा, जिसमें स्टेशनों की संख्या कम रखी जाएगी ताकि 'इंटर-सिटी कनेक्टिविटी' को बढ़ाया जा सके। कुछ स्रोतों के अनुसार, यह 'वंदे मेट्रो' के रूप में भी संचालित हो सकती है।

समयसीमा और प्रगति

  • DPR और मंजूरी: दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) इस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जो दिसंबर 2025 तक पूरी हो जाएगी। मार्च-अप्रैल 2026 तक कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
  • निर्माण: मंजूरी के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा, जिसे 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेला से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं इस प्रोजेक्ट की प्रगति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।
  • लागत: प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस परियोजना पर करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 60% फंडिंग लोन के जरिए, जबकि 20-20% केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
  • सिंहस्थ 2028 के लिए महत्व
  • 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। इंदौर-उज्जैन मेट्रो इस मेले के दौरान यात्रियों को सुगम और तेज यातायात सुविधा प्रदान करेगी, खासकर उन श्रद्धालुओं के लिए जो इंदौर हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन से उज्जैन में महाकाल मंदिर या मेला क्षेत्र तक पहुंचना चाहेंगे।
  • ट्रैफिक में कमी: वर्तमान में इंदौर-उज्जैन के बीच 75% यात्री सड़क मार्ग का उपयोग करते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और समय की बर्बादी होती है। मेट्रो शुरू होने से सड़क ट्रैफिक एक तिहाई रह जाएगा।
  • आर्थिक लाभ: यह परियोजना दोनों शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी और उज्जैन के पर्यटन को नई ऊंचाई देगी।

तकनीकी विशेषताएं

  • आधुनिक तकनीक: इंदौर-उज्जैन मेट्रो में ग्रेड ऑफ ऑटोमेशन-4 (GOA-4) तकनीक का उपयोग होगा, जो ड्राइवरलेस संचालन को सक्षम बनाएगी। यह तकनीक अन्य शहरों की मेट्रो (जैसे अहमदाबाद में GOA-3) से अधिक उन्नत है।
  • सुरक्षा: ट्रेनों में जीपीएस, हाई-रेजोल्यूशन कैमरे, और आपस में कनेक्टेड सिस्टम होंगे, जो ट्रेनों की स्थिति और दूरी को नियंत्रित करेंगे।
  • वंदे मेट्रो: मुख्यमंत्री मोहन यादव और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की चर्चा के अनुसार, इस रूट पर 'वंदे मेट्रो' चलाने की भी योजना है, जो 80 किमी/घंटा की तुलना में 160 किमी/घंटा की गति से चलेगी।
  • मध्य प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस प्रोजेक्ट को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का अभिन्न अंग बताया है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिले। इंदौर-उज्जैन मेट्रो न केवल सिंहस्थ के लिए, बल्कि रोजाना महाकाल दर्शन के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए भी वरदान साबित होगी।"
  • अन्य योजनाएं: सिंहस्थ के लिए उज्जैन में 6000 करोड़ रुपये की लागत से इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए हैं, जिनमें सड़कें, पेयजल, सीवेज, और बिजली व्यवस्था शामिल हैं।
  • रेलवे सहयोग: रेल मंत्रालय ने भी सिंहस्थ के लिए रतलाम-नागदा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन की मंजूरी दी है, जो उज्जैन तक रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी।

चुनौतियां

  • समयसीमा: तीन साल में इस प्रोजेक्ट को पूरा करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि मंजूरी, फंडिंग, और निर्माण में देरी हो सकती है।
  • फंडिंग: 1500 करोड़ रुपये की लागत में 60% लोन का प्रबंधन और ब्याज बोझ एक चिंता का विषय हो सकता है।
  • भूमि अधिग्रहण: रूट के लिए भूमि अधिग्रहण में स्थानीय विरोध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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