MP News: मध्य प्रदेश में आखिर क्यों महंगा बिक रहा है पेट्रोल-डीजल, जानिए, कीमतों में बढ़ोतरी: क्या है कारण

MP news: पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से न केवल आम जनता को परेशानी हो रही है, बल्कि विपक्ष भी राज्य सरकार को महंगाई रोकने में नाकाम होने का आरोप लगा रहा है।

देशभर में ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, और मध्य प्रदेश में भी यह कीमतें अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक हैं। आखिर क्यों मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल महंगे बिक रहे हैं? आइए जानते हैं इसके कारण और इसके पीछे की वजह।

Increase in prices of petrol and diesel in Madhya Pradesh Know the reason cess on VAT

मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल पर उच्चतम टैक्स

मध्य प्रदेश देश में उन राज्यों में शामिल है जहां पेट्रोल और डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स वसूला जाता है। राज्य में पेट्रोल और डीजल पर टैक्स की दरें अत्यधिक हैं, और यही कारण है कि यहां के लोग पेट्रोल और डीजल की उच्च कीमतों से परेशान हैं। राज्य में पेट्रोल और डीजल पर कुल मिलाकर कई तरह के टैक्स लगाए जाते हैं, जो कीमतों में भारी इजाफे का कारण बनते हैं।

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी सामने आई कि मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर लगाए जाने वाले टैक्स के मामले में राज्य देश में पांचवें स्थान पर है। दक्षिण भारत के चार राज्यों-आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक-के बाद मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स लगाए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश में वैट और उपकर का सिस्टम

मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर कई तरह के टैक्स लगाए जाते हैं, जो कीमतों को और बढ़ाते हैं। पेट्रोल पर राज्य सरकार 29% वैट, 2.5% प्रति लीटर वैट और 1% उपकर वसूलती है। वहीं, डीजल पर 19% वैट, 1.5 रुपए प्रति लीटर वैट और 1% उपकर लिया जा रहा है। इस प्रकार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर टैक्स की कई परतें हैं, जो कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण हैं।

यह व्यवस्था मध्य प्रदेश की सरकार के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन इस व्यवस्था के कारण राज्य के नागरिकों को पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ता है।

देश में अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा टैक्स

वहीं, अगर हम अन्य राज्यों के मुकाबले पेट्रोल और डीजल पर टैक्स की दरों की तुलना करें, तो मध्य प्रदेश में इन पर सबसे ज्यादा टैक्स लिया जाता है। पेट्रोल और डीजल पर सबसे कम टैक्स अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में लिया जाता है, जहां एक-एक फीसदी टैक्स लिया जाता है। लक्षद्वीप में भी पेट्रोल और डीजल पर 10-10% वैट वसूला जाता है। दादरा और नगर हवेली, दमन एवं दीव में पेट्रोल पर 12.75% वैट और डीजल पर 13.50% वैट लिया जाता है। इसके अलावा, गुजरात में भी पेट्रोल पर 13.7% वैट और 4% उपकर लिया जाता है।

इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर टैक्स की दरें काफी अधिक हैं, जिसके कारण यहां पर इनकी कीमतें अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा हैं।

क्या है इसका असर?

मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का असर सीधे तौर पर आम जनता पर पड़ रहा है। बढ़ी हुई कीमतों से न केवल परिवहन खर्चों में इजाफा हो रहा है, बल्कि जीवन यापन के अन्य खर्चों पर भी दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा, व्यवसायों की लागत भी बढ़ रही है, जिसका असर माल और सेवाओं की कीमतों पर पड़ रहा है।

विपक्ष ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि सरकार महंगाई पर काबू पाने में नाकाम रही है। विपक्ष का कहना है कि जब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, तो राज्य सरकार को इसे नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।

मध्य प्रदेश में पिछले 10 दिनों में डीज़ल की कीमतों में मामूली गिरावट

मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतें हमेशा ही चर्चा का विषय बनी रहती हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों में डीज़ल के दामों में एक मामूली गिरावट देखी गई है। आज के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में डीज़ल की कीमत 92.69 रुपये प्रति लीटर है, जो कि पिछले महीने की आखिरी तारीख से 0.05 फीसदी कम है। पिछले 10 दिनों की औसत कीमत भी 92.69 रुपये प्रति लीटर रही है।

मध्य प्रदेश में डीज़ल के दाम में गिरावट का विश्लेषण

पिछले महीने के अंतिम दिन (31 जनवरी) को मध्य प्रदेश में डीज़ल की औसत कीमत 92.74 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब घटकर 92.69 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह मामूली गिरावट 0.05 फीसदी है, जो प्रत्यक्ष रूप से बहुत बड़ी नहीं मानी जा सकती। हालांकि, छोटे बदलावों का भी आम जनता पर असर पड़ता है, खासकर उन लोगों के लिए जो डीज़ल का अधिक उपयोग करते हैं, जैसे ट्रक चालकों, परिवहन कंपनियों और किसानों के लिए।

दामों में गिरावट क्यों?

डीज़ल के दामों में इस हल्की गिरावट का कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कमी हो सकती है। आम तौर पर, डीज़ल के दाम वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होते हैं। जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटती हैं, तो इसका सीधा असर देश में डीज़ल की कीमतों पर पड़ता है।

इसके अलावा, भारत सरकार के द्वारा कुछ राज्य सरकारों से प्राप्त टैक्स राहत या आपूर्ति श्रृंखला में सुधार भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या असर पड़ेगा?

हालांकि यह गिरावट बहुत मामूली है, लेकिन मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए यह थोड़ी राहत देने वाली खबर हो सकती है। खासकर उन व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए जो डीज़ल पर निर्भर रहते हैं, जैसे परिवहन क्षेत्र और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले किसान।

इसके बावजूद, जब तक अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों में और अधिक गिरावट नहीं आती, तब तक इस गिरावट को स्थिर रखना मुश्किल हो सकता है।

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