गोवर्धन पूजा पर अनूठी परंपरा, यहां गायों के पैरों तले कुचले जाते हैं भक्त, VIDEO

MP News: दीपावली के मौके पर देशभर में अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं, लेकिन उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के भिड़ावद गांव की परंपरा अनोखी और विवादास्पद है, जो प्रतिवर्ष की भांति आज भी मनाई गई। इस परंपरा के अनुसार, लोग जमीन पर लेट जाते हैं और उनके ऊपर से गायों को दौड़ाया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसा करने से उनकी मन्नतें पूरी होती हैं।

गोवर्धन पूजा पर निभाई जाती परंपरा

गौरतलब है कि यह परंपरा गोवर्धन पूजा के अवसर पर निभाई जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए गायों के पैरों के नीचे आने से उन्हें आशीर्वाद मिलता है। हालांकि, इस परंपरा को लेकर कई लोग चिंता भी जताते हैं, क्योंकि इसमें लोगों की जान को जोखिम होता है।

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पांच दिन पहले छोड़ना पड़ता है घर

इस आयोजन में भाग लेने वाले व्यक्तियों को पांच दिन का उपवास भी करना पड़ता है। हालांकि, यह परंपरा कब से चली आ रही है, इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है। गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा पीढ़ी तक, सभी ने इसे अपने आस-पास देखा है। आसपास के गांवों के लोग भी इस परंपरा में भाग लेने के लिए आते हैं, और दीवाली के पांच दिन पहले अपने घर छोड़कर माता भवानी के मंदिर में जाकर रहना शुरू करते हैं।

मुराद होती है पूरी

दीपावली के दूसरे दिन, पड़वा पर पूजा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ गांव की परिक्रमा की जाती है। जो लोग अपनी मन्नतें पूरी होने का विश्वास रखते हैं, वे गायों के सामने लेट जाते हैं और गायें उन्हें रौंदते हुए निकल जाती हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इस परंपरा का पालन करने से उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं। इस प्रकार, भिड़ावद गांव की यह परंपरा आस्था और विश्वास का एक अनूठा उदाहरण है, जिसमें लोग अपनी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।

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