पूर्व RTO आरक्षक सौरभ शर्मा कैसे बना करोड़पति? लोकायुक्त की छापेमारी में खुली पोल, करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के घर और दफ्तर पर छापा मारा।
इस छापेमारी के दौरान लोकायुक्त की टीम को कई चौंकाने वाली चीजें मिलीं, जिनसे यह साफ हो गया कि सौरभ शर्मा ने अपनी सीमित नौकरी के दौरान एक बड़ा अवैध साम्राज्य खड़ा कर लिया था।

छापेमारी में मिली संपत्ति
लोकायुक्त टीम ने सौरभ शर्मा के घर और दफ्तर से भारी मात्रा में संपत्ति बरामद की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारियों को सौरभ के घर से 4 करोड़ रुपये नकद मिले, जो इस छापेमारी के दौरान सबसे बड़ा खुलासा था। इसके अलावा, 50 लाख रुपये के सोने-हीरे और 60 किलो चांदी भी बरामद की गई। इतना ही नहीं, टीम ने सौरभ के पास मौजूद 4 एसयूवी और 22 प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी जब्त किए।
इसके अलावा, छापेमारी के दौरान नोट गिनने के लिए 7 मशीनें भी बरामद हुईं, जो यह दर्शाती हैं कि सौरभ ने इस पैसे को कहां और कैसे प्रबंधित किया था। यह सब देख कर अधिकारी भी चौंक गए कि इतने बड़े पैमाने पर धन और संपत्ति कैसे एक छोटे से सरकारी कर्मचारी के पास इकट्ठी हो गई।
घर के इंटीरियर पर दो करोड़ रुपये खर्च
सौरभ शर्मा के आलीशान घर की सजावट और इंटीरियर डिज़ाइनिंग पर दो करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उनके घर में कीमती सेनेटरी सामान, झूमर और अन्य लग्जरी सामान मौजूद था, जो किसी बड़े उद्योगपति के घर के समान था। इस प्रकार के महंगे सामान और सजावट से यह साफ जाहिर होता है कि सौरभ ने अपनी अवैध कमाई से आलीशान जीवनशैली अपनाई थी।
इसके अलावा, लोकायुक्त की टीम को सौरभ के घर से चांदी की सिल्लियां भी मिलीं, जो उसकी संपत्ति और अवैध कमाई के और संकेत हैं।
आरक्षक से बिल्डर बनने तक का सफर
सौरभ शर्मा की कहानी यह बताती है कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी अपनी नौकरी के दौरान ही भ्रष्टाचार और अवैध धंधों में शामिल हो सकता है। सौरभ ने परिवहन विभाग में एक आरक्षक के तौर पर काम शुरू किया था, लेकिन उसने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेने के बाद रियल एस्टेट कारोबार में हाथ डाला। सूत्रों के अनुसार, सौरभ की प्रदेश के कई रसूखदार बिल्डरों से करीबी दोस्ती थी, जिनकी मदद से उसने बड़े पैमाने पर प्रॉपर्टी में निवेश किया।
लोकायुक्त को उसके द्वारा भोपाल और अन्य जिलों में की गई संपत्ति निवेश के भी प्रमाण मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि वह किस तरह से अवैध रूप से संपत्ति इकट्ठा कर रहा था। इसके साथ ही लोकायुक्त ने यह भी बताया कि सौरभ के एक होटल और स्कूल में भी निवेश के प्रमाण मिले हैं।
लोकायुक्त की कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में 24 नवंबर को इंदौर में सौरभ शर्मा के खिलाफ ट्रायल किया था और अब दिसंबर में भोपाल सहित विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की। डीजी लोकायुक्त, जयदीप प्रसाद ने इस छापेमारी की पुष्टि करते हुए बताया कि सौरभ शर्मा के दो अलग-अलग ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई के दौरान टीम ने 4 करोड़ रुपये नकद, 60 किलो चांदी, 50 लाख रुपये के सोने-हीरे के जेवरात, 4 एसयूवी, 22 प्रॉपर्टी के दस्तावेज और नोट गिनने की 7 मशीनें भी बरामद की हैं। यह छापेमारी तब हुई जब सौरभ के खिलाफ पहले से ही शिकायत मिली थी और इसकी जांच के बाद लोकायुक्त पुलिस ने यह कदम उठाया।
सौरभ शर्मा की अनुकंपा नियुक्ति और वीआरएस
सौरभ शर्मा को अनुकंपा नियुक्ति के तहत परिवहन विभाग में नौकरी मिली थी। उनके पिता पहले इसी विभाग में कार्यरत थे। सौरभ का जन्म ग्वालियर के एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन चंद सालों में उसकी जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया। यह बदलाव अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया था।
इस पर विभाग ने शिकायतें भी की थीं, जिसके बाद सौरभ ने वीआरएस लेकर बिल्डर बनने का फैसला किया। इसके बाद सौरभ ने कई नामचीन बिल्डरों के साथ मिलकर प्रॉपर्टी में निवेश किया और अपनी संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि की।
सामान्य परिवार से लेकर करोड़पति बनने तक
सौरभ शर्मा का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था, लेकिन कुछ ही वर्षों में उसकी जीवनशैली पूरी तरह से बदल गई। ट्रांसपोर्ट विभाग में नौकरी करने के बाद अचानक सौरभ के जीवन में बड़े बदलाव आए, जिससे वह जल्दी ही अपने लिए आलीशान घर, गाड़ियां और कई प्रॉपर्टी खरीदने में सफल हो गया।
सौरभ शर्मा ने खुद को बचाने के लिए वीआरएस लिया, और उसके बाद विभिन्न बिजनेस और प्रॉपर्टी डीलिंग के माध्यम से अपनी संपत्ति बढ़ाने की योजना बनाई। अब लोकायुक्त की टीम ने उसकी इस पूरी काली कमाई का पर्दाफाश कर दिया है।
लोकायुक्त की कार्यवाही
लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार कुछ भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी सरकारी नौकरी का गलत फायदा उठाकर जनता की मेहनत की कमाई से संपत्ति बना लेते हैं। लोकायुक्त पुलिस अब इस मामले की गहरी जांच कर रही है और सौरभ शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है।
इस मामले से यह भी सामने आया है कि सरकार और प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके जो भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति जमा करने में लिप्त हैं।
पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा का यह मामला एक उदाहरण है कि कैसे कुछ सरकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलकर करोड़ों रुपये कमाते हैं। लोकायुक्त पुलिस की छापेमारी और कार्रवाई ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि ऐसे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। सरकार को अब इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोका जा सके।












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