MP: भाजपा विधायक व उमा के भतीजे राहुल को हाईकोर्ट से झटका, निर्वाचन शून्य करने का आदेश
उमा भारती के भतीजे व खरगापुर विधायक राहुल लोधी की विधानसभा की सदस्यता को शून्य करने के आदेश जबलपुर हाईकोर्ट ने दिए हैं। मामले में पूर्व विधायक चंदा सिंह गौर की चुनाव पिटीशन याचिका पर एचसी ने यह आदेश दिया है।

जबलपुर हाईकोर्ट ने खरगापुर से भाजपा विधायक और उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह लोधी का निर्वाचन शून्य कर दिया है। बीते विधानसभा चुनाव 2018 में टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा क्रमांक 47 से राहुल सिंह बीजेपी के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। हाईकोर्ट ने राहुल को करप्ट प्रैक्टिस का दोषी पाए जाने के बाद निर्वाचन शून्य घोषित करते हुए उनको विधायक पद के वेतन और सभी लाभों से वंचित करने का आदेश दिया है।
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रिटर्निंग अधिकारी वंदना राजपूत पर भी कार्रवाई के लिए लिखा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में तत्कालीन खरगापुर विधानसभा चुनाव की रिटर्निंग अधिकारी वंदना राजपूत पर भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने शासन से कहा है कि भविष्य में उनकी निर्वाचन कार्य में ड्यूटी न लगाई जाए।
यह है पूरा मामला
भाजपा विधायक राहुल लोधी के सामने कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी और पूर्व विधायक चंदा सिंह गौर पति सुरेंद्र सिंह गौर ने हाईकोर्ट में चुनाव पिटीशन याचिका 5-2019 दायर की थी। जिस लंबी सुनवाई और निर्वाचन आयोग व राहुल सिंह लोधी सहित तमम पक्षों को सुना गया। इधर निर्वाचन के समय राहुल सिंह द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया था। बुधवार शाम को कोर्ट ने राहुल का निर्वाचन शून्य करने का आदेश जारी किया है। दरअसल याचिकाकर्ता चंदा गौर ने याचिका में राहुल सिंह द्वारा नामांकन फॉर्म में जानकारी छुपाने की शिकायत की थी। राहुल शासन से लाभ ले रही फर्म में पार्टनर थे, लेकिन उन्होंने यह जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी थी। हाईकोर्ट ने पूर्व में राहुल पर 10 हजार की कास्ट लगाई थी, लेकिन वह भी जमा नहीं कराई गई।
विधायक रहते हुए एक दिन पहले ही तलवार से 42 केक काटे थे

विधायक राहुल सिंह लोधी का बीते रोज ही जन्मदिन था। खरगापुर में वे अपने समर्थकों के साथ जन्मदिन का जश्न अलग ही अंदाज में मनाते नजर आ रहे थे। इसमें उन्होंने तलवार से एक साथ 42 केक काटे थे। वे बच्चे के साथ मंच पर सामने की तरफ एक लाइन में रखे केक को तलवार से काट रहे थे। बता दें कि इस कार्यकाल में बतौर विधायक यह उनका आखिरी केस माना गया, क्योंकि दूसरे दिन ही हाईकोर्ट ने उनका निर्वाचन शून्य करने का आदेश जारी कर दिया।












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