MP News: OBC को 27% आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला, खारिज की याचिका
मध्यप्रदेश में वर्ष 2018 में कमलनाथ के नेतृत्व में बनी कांग्रेस सरकार ने ओबीसी वर्ग का आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने का निर्णय लिया था। वहीं आरक्षण के फैसले के विरुद्ध हाई कोर्ट में लगी याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
इधर, इस फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने बताया कि, कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण को बढ़ाने की सभी औपचारिकताएं पूरी करने और इसे विधानसभा और कैबिनेट से स्वीकृति प्रदान करने के बाद लागू भी कर दिया था। लेकिन बीजेपी और इसके अनुवाँशिक संगठनों ने इसे रोकने का षड्यंत्र किया और कुछ संगठनों/लोगों को हथियार बनाकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरक्षण पर रोक लगाने की घृणित साजिश रची।

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा की जबलपुर उच्च न्यायलय में ओबीसी आरक्षण मामले की जानबूझकर कमजोर पैरवी करती रही, ताकि कमलनाथ सरकार के निर्णय को लागू होने से रोका जा सके। बीजेपी इस आरक्षण को रोककर ओबीसी वोटर्स को कांग्रेस के साथ जाने से रोकना चाहती थी, इसलिए बीजेपी ने अप्रत्यक्ष रूप से इस आरक्षण पर रोक लगाने का षड्यंत्र रचा जबकि भाजपा पहले शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मे डॉ. मोहन यादव को पिछड़ा वर्ग से प्रतिनिधित्व देना का झूठा स्वांग रचती रही जबकि यह पोस्टर बॉय बनकर मनुवादी विचारधारा के कठपुतली बने रहे।
अब जबकि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण के विरोध में लगी जनहित याचिका को खारिज कर ओबीसी को 27% आरक्षण देने का रास्ता साफ कर दिया है। उच्च न्यायालय का यह फैसला मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूरी कांग्रेस की बड़ी जीत है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा की ओबीसी को 27% आरक्षण देने का रास्ता साफ़ करता अदालत का यह फैसला कांग्रेस और कमलनाथ जी की ओर से मध्यप्रदेश के ओबीसी वर्ग के लिए अब तक के सबसे बड़े वरदान के तौर पर देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश के राजनीतिक जानकार अब खुलकर कह रहे हैं कि बीजेपी ने ओबीसी वर्ग को सिर्फ़ छला है, जबकि कांग्रेस की अल्पावधि की सरकार ने ओबीसी का आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% कर ओबीसी का सबसे बड़ा हित किया है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा है की हाल ही मे निकली शासकीय भरतीयों के आयोजित इंटरव्यू को निरस्त करते हुए पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण का लाभ देकर पद क्रम अनुसार पुनः नई सूची जारी कर 87/13 के नियम को निरस्त करने के आदेश जारी करना चाहिए वही पिछड़ा वर्ग को मिलने वाली छात्रवृति को भी बढ़ाकर देना चाहिए पिछले 2 वर्षो से पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की छात्रवृति रुकी हुई है।
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