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Opinion: MP लोक सेवा गारंटी, 10 करोड़ शिकायतों के निपटारे का रिकॉर्ड, संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी सराहा

Opinion: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने करीब 13 साल पहले 26 सितंबर 2010 में सरकारी योजनाओं और सेवाओं को लोक सेवा गारंटी से जोड़ते हुए मप्र में लोक सेवा गारंटी कानून लागू किया था। वर्तमान में प्रदेश में 431 लोक सेवा केंद्र और 701 सरकारी सेवाओं को शामिल किया गया है। बता दें कि अब तक करीब 10 करोड़ आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र संघ भी मप्र के लोक सेवा गारंटी अधिनियम की सराहना कर चुका है।

लोक सेवा गारंटी का सुशासन, मप्र में अब तक 10 करोड़ शिकायतों का निराकरण

मप्र की शिवराज सरकार ने सरकारी विभागों के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं को समयबद्ध अर्थात हर काम की अधिकतम समय सीमा तय कर दी है। इसके लिए प्रदेश में लोक सेवा गारंटी अधिनियम को 13 साल पहले 2010 में लागू किया गया था। धीरे-धीरे कर लोक सेवा गारंटी केंद्रों और सरकारी सेवाओं को इससे जोड़ा गया। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2020 से जुलाई 2023 तक के दौरान इसमें 262 अन्य सरकारी सेवाओं को भी इसके दायरे में लाया गया। इस तरह अब कुल 701 में से 341 सेवाओं को ऑनलाइन भी कर दिया गया है। यह कानून सिटीजन चार्टर के उद्देश्यों को साकार कर रहा है।

मप्र राजस्व विभाग के अधीन प्रदेश के सभी जिलों की सभी तहसीलों में लोक सेवा केंद्र हैं। इसका असर यह भी हुआ कि विभागों या कुछ कर्मचारियों की टालमटोल करने वाली प्रवृत्ति पर भी अंकुल लग गया है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इसी सोची के साथ यह कानून लागू किया था कि प्रदेशवासियों को सरकार की सेवाएं और सुविधा आसानी से मिल सके। बता दें कि लोग सेवा गारंटी में 40 सेवाएं तो ऐसी हैं जो 24 घंटे में निराकृत करने के लिए समाधान एक दिन के दायरे में रखी गई हैं। सरकारी आंकड़ा है कि अब तक ढाई करोड़ से अधिक लोग समाधान एक दिन का लाभ ले चुके हैं।

कानून में दंड का प्रावधान भी है
लोक सेवा गारंटी में दंड का प्रावधान भी है। सरकारी व अधिनियम के नियमानुसार सेवा प्रदान करने में लापरवाही बरतने वालों के लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है। इसमें धारा 7 का प्रावधान किया गया है। अधिनियम में अधिसूचित सेवाएं प्राप्त करना भी जनता का हक है। सेवा नहीं देने पर 5 हजार तक जुर्माना इसे खास बनाता है। इसी कारण यह कानून सरकारी कर्मचारियों को ज्यादा जिम्मेदार बनाता है। हर सेवा के लिए एक समय अ​वधि तय की गई है। जो अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में असफल या विफल रहता है उस पर प्रतिदिन 250 रुपए से लेकर अधिकतम 5 हजार रुपए तक का भुगतान जुर्माने के रुप में करना पड़ता है।

2012 में UNPSA पुरस्कार भी जीता
मप्र सरकार ने साल 2010 में लोक सेवा गारंटी कानून को लागू किया था। मध्य प्रदेश के इस अधिनियम की संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी सराहना की थी। मप्र ने 73 देशों से और 483 नामांकनों में साल 2012 में यूनएनपीएसए अंतर राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था। वहीं लोक सेवाओं के वितरण में सुधार वर्ग में इस अधिनियम को संयुक्त राष्ट्र का वर्ष 2012 का लोक सेवा पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था।

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