चार पैर वाला सांप! या सर्पाकार छिपकली, हर सावन में शिवमंदिर में जरुर दिखती है
सागर, 2 अगस्त। यह तस्वीर देखकर आप हैरान जरुर होंगे! यह चार पैर वाला सांप है या कोई सर्पाकार छिपकली! बुंदेलखंड के कुछ इलाकों में इस तरह का सरीसृप कई बार देखा गया है, लेकिन इस तस्वीर में जो चार पैर वाला सांप के जैसा दिखने वाला जीव है, वह हर साल सावन के महीने में राजघाट मार्ग पर बने शिवमंदिर में शिवलिंग के आसपास कई बाद देखा गया है। यह सिलसिला कई सालों से चल रहा है।

मप्र के सागर शहर से करीब चार किलोमीटर दूर राजघाट मार्ग पर मेनपानी में स्थित एक छोटे से चबूतरे पर स्थापित शिवलिंग के आसपास यह चार पैर वाला सर्प या सर्पाकार प्राणी साल में एक-दो बार दिखता जरूर है। करीब 8 से 10 इंच की लम्बाई वाला यह जीव य शिवलिंग के आसपास घूमकर कुछ समय बाद कच्ची, पथरीली जमीन में समा जाता है। लोग इसे शिव का भक्त और चमत्कार मानते हैं, इसलिए इसको नुकसान नहीं पहुंचाते।
पथरिया जाट के रहने वाले मोहन यादव कहते हैं उनके खेतों के आसपास इस तरह का जीव कई दफा दिख जाता है। इसे बुंदेलीभाषा में चौगोड़ा (चार पैर वाला) कहा जाता है। कुछ लोग इसे दुर्लभ प्रजाति चार पैर वाला सांप मानते हैं।
वैज्ञानिक इसे एक प्रकार की छिपकली मानते हैं
यह प्राणी सर्प की किसी भी प्रजाति से नहीं है। यह एक प्रकार की छिपकली ही है, जो रेप्टिलिया श्रेणी में आता है। इसका जूलाजिकल नाम पसमोडेरमस है। तस्वीर में दिख रही लिजार्ड यंग स्टेज हैं। इनकी पूछ लंबी व डार्क ब्राउन होती है। यह मकडी व कीडे मकोडे खाते हैं।
- प्रो. वर्षा शर्मा, डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि सागर
चार पैर वाले सांप के करोडों साल पुराने जीवाश्म
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही रिसर्च कुछ और ही कहानी कहती है
चार पैर वाले सर्प और सर्पाकार चार पैर वाली छिपकली को लेकर साल 2016 में नई रिसर्च सामने आई थी। इसमें बताया गया है कि इसमें इस तरह के प्राणियों के फॉसिल पर रिसर्च में पाया गया है कि यह करीब 14 करोड साल पहले डायनासोर के युग में धरती पर पाए जाते थे। पहली नजर में इन्हें चार पैर वाला सर्प ही मान लिया गया था, हालांकि बाद में इनके जीवाश्म पर शोध में सामने आया कि इनकी संरचना सांप से अलग है। यह समुद्र से धरती पर आए थे।

इनका वैज्ञानिक नाम डोलिचोसॉर है
शोध के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे थे कि यह सांपों की नहीं बल्कि छिपकली की रिश्तेदार है। यह छिपकली समुद्र में रहती थी, जो अब समय के साथ विलुप्त हो चुकी है। वैज्ञानिकों ने मान लिया है कि यह 4 पैरों के साथ लंबे शरीर वाली छिपकली को क्रिटेशियल पीरियड में पाया जाता था। जिनका आस्तित्व मिट गया था।

इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी में इन पर कई शोध हुए हैं
पुरानी जानकारी अनुसार इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्स माउथ द्वारा चार पैर वाले इन अनोखे प्राणियों के जीवाश्म पर की गई खोज में पाया कि फोसिल, जिसे उन्होंने जर्मन म्यूजियम के प्राप्त किया था वह यह दर्शाता है कि कैसे समुद्री छिपकलियों से वे सांप बनीं। ब्राजील के फोसिल करीब 110 करोड़ साल पुराने हैं, जिसको लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि निश्चित ही ये सबसे ज्यादा पुराना सांप है। डॉ. मार्टिल ने बताया कि आम तौर पर ऐसा स्वीकार किया जाता है कि बेहद पुराने समय की छिपकलियां ही आगे चलकर विकसित होकर सांप बन गईं।












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