कभी चम्बल के इस डकैत पर थे हत्या के 70 मामले दर्ज, आज फिर टांग ली कंधे पर बंदूक
श्योपुर में पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार अब चीता मित्र बन गए हैं, वे अब वन विभाग के अमले के साथ मिलकर लोगों को शिकार न करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं
श्योपुर, 15 सितम्बर। 80 के दशक में जिस डकैत के नाम से चंबल थर्राता था, जिस डकैत का नाम सुनकर लोगों के पसीने छूट जाया करते थे, जिस डकैत पर 70 से ज्यादा हत्याओं के मामले दर्ज थे, जिस डकैत पर ढाई सौ से ज्यादा डकैतियों का आरोप था, उसी पूर्व डकैत ने एक बार फिर से अपने कंधे पर बंदूक टांग ली है।

पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार का था चंबल के बीहड़ में आतंक
चंबल के श्योपुर जिले में रहने वाले पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार का 80 के दशक में चंबल के बीहड़ों में आतंक हुआ करता था। 70 और 80 के दशक में रमेश सिंह सिकरवार की चंबल के बीहड़ों में तूती बोलती थी। हत्या, लूट, अपहरण, डकैती जैसे कई मामले डकैत रमेश सिंह सिकरवार पर दर्ज रह चुके हैं। चंबल में आतंक बरपाने के बाद डकैत रमेश सिंह सिकरवार ने आत्मसमर्पण कर दिया था। अब यही पूर्व दस्यु रमेश सिंह सिकरवार चीतों की जान बचाने के लिए कंधे पर बंदूक टांग कर मैदान में उतर आए हैं।

पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार बन गए हैं चीता मित्र
पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार अब चीता मित्र बन गए हैं। चीता मित्र बनकर चीतों की जान बचाने के लिए पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार अपने कंधे पर बंदूक टांग कर मैदान में उतर आए हैं। वन विभाग की पहल पर रमेश सिंह सिकरवार ने चीता मित्र बनकर चीतोें की जान बचाने का जिम्मा लिया है। अब डकैत रमेश सिंह सिकरवार अलग अलग गांव में बंदूक टांग कर पहुंच रहे हैं। वे चीतों की जान बचाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

वन विभाग के साथ मिलकर लोगों को कर रहे हैं जागरूक
पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार अपने कंधे पर बंदूक टांग कर वन विभाग के अमले के साथ ग्रामीण अंचल में निकल जाते हैं। कूनो नेशनल पार्क इलाके में बसे हुए गांव में वे वन अमले के साथ पहुंचते हैं और लोगों को इस बात के लिए जागरूक करते हैं कि अब शिकार पूरी तरह बंद कर दिया जाए।

कूनो नेशनल पार्क में आ रहे हैं चीते
17 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से चीते लाए जा रहे हैं। इन चीतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कूनो नेशनल पार्क में छोड़ेंगे। चीतों की सुरक्षा को लेकर भी काफी इंतजाम किए जा रहे हैं लेकिन शिकारियों से चीतों को बचाने के लिए इलाके में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहा है और इसी जागरूकता अभियान में काफी अहम भूमिका पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार अदा कर रहे हैं।

इलाके में है रमेश सिंह सिकरवार का रसूख
पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार का उनके इलाके में काफी रसूख है। लोगों उन्हें काफी सम्मान भी देते हैं। इसलिए वन विभाग के अमले ने रमेश सिंह सिकरवार की मदद लेना बेहतर समझा है। वन विभाग के अमले ने पूर्व डकैत रमेश सिंह सिकरवार को चीता मित्र बना दिया है। रमेश सिंह सिकरवार के पास जब यह ऑफर आया तो वे भी इस ऑफर के लिए मना नहीं कह सके और उन्होंने खुशी खुशी चीता मित्र बनना स्वीकार कर लिया। अब वे चीतों को बचाने के लिए कंधे पर बंदूक टांग कर मैदान में डटे हुए है।












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