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MP News: किसान भागवत किरार की मौत पर सियासी विवाद, पूर्व CM कमलनाथ ने बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

MP News: गुना (झागर) के किसान भागवत किरार की मौत ने मध्य प्रदेश में राजनीति को गरमा दिया है। भागवत ने हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसमें वह खाद की कमी और सरकार की नीतियों पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे।

वीडियो में उन्होंने सरकार से अपनी स्थिति सुधारने की अपील की थी और बताया था कि उनके पास बहुत कम जमीन है, और खाद का एक भी दाना उन्हें नहीं मिला। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, और इसके कुछ ही घंटों बाद उनकी मौत की खबर आई, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

Farmer Bhagwat Kirar incident guna haagar Kamal Nath made serious allegations against BJP

वीडियो में क्या कहा था किसान ने?

भागवत किरार ने वीडियो में कहा था, "मैं गरीब छोटा सा किसान हूं। मेरी कानून, सरकार से थोड़ा निवेदन है कि मेरे पास कम से कम जमीन है। मुझे एक भी दाना खाद का नहीं मिला। आजकल पांच-पांच साल, एक-एक साल के बच्चे का आधार कार्ड बन रहा है। अगर आधार कार्ड से खाद दिया जाएगा तो हमारी तो बस्की(हिम्मत) ही नहीं है कि दो-दो बीघा वाले किसान उन कट्टों को खरीद लें।" इस वीडियो के बाद, रविवार रात को उनकी मौत की खबर आई, जिसके बाद सियासत गर्मा गई है।

मृतक के परिजनों का बयान

भागवत किरार के परिजनों के अनुसार, वह अक्सर बीमार रहते थे और बीमारी के कारण ही उनकी मृत्यु हुई। हालांकि, उनके मौत के बाद सियासी हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या उनकी मृत्यु वीडियो की वजह से उत्पन्न तनाव के कारण हुई, या यह मात्र एक संयोग था।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का आरोप

किसान की मृत्यु के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया। कमलनाथ ने भागवत का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, "एमपी में तालिबानी शासन चल रहा है। सरकार नशे में मदमस्त होकर किसानों को रौंद रही है।" कमलनाथ ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने खुलेआम भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है और किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया है।

कमलनाथ के ट्वीट के बाद यह मामला और भी तूल पकड़ गया है, और किसानों के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि भागवत किरार के निधन के तुरंत बाद, बिना पोस्टमॉर्टम कराए उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिससे उनकी मृत्यु के वास्तविक कारणों पर सवाल उठने लगे हैं।

वीडियो में क्या था?

भागवत ने अपने वीडियो में बताया था कि वह और अन्य किसान खाद के लिए परेशान हैं। वीडियो में उन्होंने तहसीलदार पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाते हुए खाद वितरण में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि उचित तरीके से खाद वितरण नहीं किया जा रहा है, जिससे गांवों में विवाद और तनाव पैदा हो रहे हैं।

मृत्यु के बाद पोस्टमॉर्टम की जगह आनन-फानन में अंतिम संस्कार

वीडियो वायरल होने के कुछ घंटे बाद भागवत की अचानक मौत की खबर आई। परिजनों के मुताबिक, वह लंबे समय से बीमार थे, लेकिन यह मौत संदिग्ध स्थिति में हुई। हैरान करने वाली बात यह रही कि प्रशासन ने भागवत का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया और तेज़ी से अंतिम संस्कार कर दिया। यह कदम कई सवालों को जन्म देता है, क्योंकि पोस्टमॉर्टम न कराए जाने से यह सुनिश्चित नहीं हो सका कि उनकी मौत बीमारी के कारण हुई थी या फिर किसी अन्य कारण से।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का आरोप

मृतक किसान के पोस्टमॉर्टम के बिना अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "यह मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है? किसान आवाज उठाता है, और कुछ ही घंटे बाद उसकी मौत की खबर आ जाती है। किसान की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम कराए बिना अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिससे मृत्यु की असल वजह का पता नहीं चल पाया। यह बेहद गंभीर मामला है।"

कमलनाथ ने कहा कि राज्य में खाद और बीज की कमी विकराल रूप ले चुकी है और सरकार किसानों की परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि "किसान अगर सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है तो कुछ घंटे बाद उसकी मृत्यु की खबर आती है। इस 'तालिबानी शासन' का क्या हाल है, यह प्रदेश के लोग देख रहे हैं।"

आत्महत्या की संभावना?

कुछ सूत्रों ने यह भी संभावना जताई है कि किसान की खाद न मिलने से उत्पन्न मानसिक दबाव के कारण उसने आत्महत्या की हो सकती है। हालांकि, इसके लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं क्योंकि पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया। इस मामले में प्रशासन को जवाब देना होगा कि आखिर क्यों बिना पोस्टमॉर्टम के शव का अंतिम संस्कार किया गया और क्या यह कार्रवाई नियमों के खिलाफ थी?

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

कमलनाथ के बयान के बाद, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच तकरार और तीखी आलोचना होने की संभावना है। कांग्रेस किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेर रही है, जबकि बीजेपी इस मामले में शांत रहने की कोशिश कर रही है। इस घटना ने मध्य प्रदेश के किसानों के बीच असंतोष और तनाव को बढ़ा दिया है, क्योंकि खाद और बीज की कमी के कारण प्रदेश के कई इलाकों में किसान आंदोलन भी बढ़ने की संभावना है।

किसानों की मुश्किलें और सरकार की नीतियां

यह मामला साफ तौर पर किसानों की समस्याओं और सरकारी नीतियों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है। राज्य में खाद की भारी कमी और वितरण की समस्याएं पहले से ही चर्चा में रही हैं। हालांकि, सरकार ने कई बार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रयास किए हैं, लेकिन सिस्टम की खामियां और भ्रष्टाचार की वजह से यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

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