MP News: पूर्व CM उमा भारती और IPS डी रूपा के खिलाफ यूट्यूब पर झूठा वीडियो वायरल, सचिव ने दर्ज कराई FIR

Bhopal News: मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक विवादास्पद वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें उनके कार्यकाल के दौरान कथित रूप से ठेकेदारों से पैसे लेने का जिक्र किया गया है।

इस वीडियो में IPS अधिकारी रूपा दिवाकर मोदगिल उर्फ डी रूपा के नाम का फर्जी उपयोग किया गया है। उमा भारती के सचिव ने इस मामले में FIR दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच को जांच का आदेश दिया है।

Fake video on social media against former CM Uma Bharti and IPS D Roopa secretary lodged FIR

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में पूर्व CM उमा भारती के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ठेकेदारों से पैसे मांगने के आरोप लगाए गए हैं। वीडियो में कथित तौर पर यह भी दर्शाया गया है कि कैसे उमा भारती के शासन में अनियमितताएं हुईं। यह वीडियो न केवल उमा भारती की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इससे राजनीतिक हलकों में भी उथल-पुथल मची हुई है।

निजी सचिव उमेश गर्ग ने क्राइम ब्रांच में की शिकायत

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के निजी सचिव उमेश गर्ग ने क्राइम ब्रांच में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने एक यूट्यूब वीडियो का जिक्र किया है। इस वीडियो में उमा भारती और महिला आईपीएस अधिकारी डी रूपा (रूपा दिवाकर मोदगिल) के फोटो को एडिट कर उनके बारे में अत्यंत आपत्तिजनक और झूठी सामग्री प्रस्तुत की गई है।

वायरल वीडियो में क्या है ?

उमेश गर्ग ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपने मोबाइल पर एक यूट्यूब चैनल पर एक रील वाला वीडियो देखा, जिसमें उमा भारती और आईपीएस अधिकारी डी रूपा के बारे में बताया गया है। वीडियो में एक पुरुष की आवाज में यह दावा किया गया है कि डी रूपा मुख्यमंत्री के 'काले कारनामों' की जांच करने के लिए नौकरानी बनकर उनके घर गईं।

गर्ग ने कहा कि वीडियो में यह भी दर्शाया गया है कि जब डी रूपा ने मुख्यमंत्री उमा भारती को ठेकेदारों से पैसे मांगते देखा, तब उन्होंने अपना असली चेहरा दिखाया और मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर लिया। इस प्रकार के आरोपों को झूठा, भ्रामक और कुत्रचित बताते हुए उन्होंने कार्रवाई की मांग की है।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस की भूमिका

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 336(4) और 356(2) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

वीडियो को हटाने का प्रयास

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने वीडियो को सार्वजनिक डोमेन से हटाने के लिए भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस ने यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से वीडियो को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की योजना बनाई है।

उमा भारती की छवि को नुकसान

यह वीडियो न केवल उमा भारती की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि यह उनके समर्थकों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे वीडियो का उद्देश्य उमा भारती की छवि को धूमिल करना और उनकी राजनीतिक ताकत को कमजोर करना है।

आईपीएस डी रूपा ने कब उमा भारती को किया था गिरफ्तार

दरअसल, बीजेपी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती उस समय सुर्खियों में आई थी, जब 15 अगस्त 1994 को कर्नाटक के हुबली शहर में ईदगाह पर उमा भारती ने कथित रूप से झंडा फहराया था। इस मामले में करीब 10 साल बाद यानी 2003 में उमा भारती के खिलाफ वारंट में जारी किया गया था। उस वक्त उमा भारती मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री थी। हालांकि उसे समय किसी सीएम को गिरफ्तार करना इतना आसान काम नहीं था। लेकिन डी रूपा उमा भारती को गिरफ्तार करने के लिए हुबली शहर से भोपाल पहुंची और बिना किसी को भनक लगे, सीधे उनके बंगले पर जा पहुंची थी।

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