EV चलाने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी: पार्किंग शुल्क में छूट और सब्सिडी का एलान
MP News: मध्य प्रदेश में डीजल और पेट्रोल आधारित वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के प्रचलन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने राज्य की नई ईवी पॉलिसी-2025 का ड्राफ्ट तैयार किया है।
यह नीति एक साल के इंतजार के बाद तैयार की गई है और इसके इस महीने के अंत तक लागू होने की संभावना है। पॉलिसी के तहत प्रदेश भर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

ईवी को मिलेगा पार्किंग शुल्क में छूट
ड्राफ्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों को एक साल तक पार्किंग शुल्क में पूरी छूट मिलेगी, जो पूरे मध्य प्रदेश में लागू होगी। इसमें मॉल और प्राइवेट शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी शामिल हैं।
ईवी पर सब्सिडी:
- पॉलिसी के तहत, पहले 10,000 इलेक्ट्रिक कारों पर ₹50,000 की सब्सिडी दी जाएगी।
- पहले 100 ईवी बसों पर ₹10 लाख की सब्सिडी।
- पहले 30,000 ई साइकिल पर ₹5,000 की सब्सिडी।
- पहले 1 लाख दो पहिया ईवी वाहनों पर ₹10,000 की सब्सिडी।
- सब्सिडी क्लेम करने के लिए आवेदकों को ईवी पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
सभी सरकारी विभागों के वाहन होंगे ईवी में बदलें
पॉलिसी के तहत, अगले 5 सालों में सभी सरकारी विभागों, बोर्ड, कॉर्पोरेशन और एंबुलेंस आदि को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
मॉडल ईवी शहरों का विकास:
पॉलिसी में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, और उज्जैन को मॉडल ईवी शहरों के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इन शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर निर्माण किया जाएगा।
प्रदूषण सेस:
डीजल से चलने वाले वाहनों पर प्रदूषण सेस लगाया जाएगा, जो प्रति लीटर 10 पैसे होगा। यह सेस ईवी को बढ़ावा देने और प्रदूषण को कम करने के लिए लगाया जाएगा।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्रीन बांड:
नगरीय निकाय चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन बांड जारी करेंगे। इससे राज्य में ईवी चार्जिंग स्टेशन की संख्या में इजाफा होगा।
ई रिक्शा की अनुमति:
ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए कुछ चुनिंदा इलाकों में या बड़े शहरों के बाहरी इलाकों में ई रिक्शा चलाने की अनुमति दी जाएगी।
पॉलिसी के लिए लक्ष्यों का निर्धारण:
- पॉलिसी का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी में वृद्धि करना है:
- टू-व्हीलर श्रेणी में ईवी की हिस्सेदारी बढ़ाकर 40% करना।
- ई-रिक्शा की हिस्सेदारी 70% तक बढ़ाना।
- कारों में ईवी की हिस्सेदारी 15% करना।
- बसों में ईवी की हिस्सेदारी 40% करना।
किसी भी वाहन पर सब्सिडी का मुकाबला:
- राज्य में अभी तक केवल रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स में छूट दी जाती थी, जबकि अन्य राज्य जैसे गुजरात और महाराष्ट्र में दोपहिया और चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी दी जाती रही है। उदाहरण के लिए, गुजरात में दोपहिया ईवी पर ₹20,000 और चार पहिया पर ₹1.5 लाख तक की सब्सिडी है, जबकि महाराष्ट्र में दोपहिया पर ₹25,000 और चार पहिया पर ₹2.5 लाख तक की सब्सिडी दी जाती है।
तरंग पोर्टल और ईवी प्रमोशन बोर्ड:
- पॉलिसी के तहत, इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं के लिए तरंग पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से सभी आवेदन और क्लेम किए जाएंगे।
- इसके अलावा, मध्य प्रदेश ईवी प्रमोशन बोर्ड का गठन भी किया जाएगा, जो प्रदेश में ईवी सिस्टम को संचालन करेगा। बोर्ड में नगरीय प्रशासन, परिवहन और वित्त विभागों के सदस्य होंगे।
महत्वपूर्ण तारीखें और सुझाव:
- पॉलिसी के ड्राफ्ट पर 7 दिन के भीतर सुझाव लिए जाएंगे और पॉलिसी को इस माह के अंत तक लागू किया जा सकता है।
- एडिशनल कमिश्नर, नगरीय विकास एवं आवास, परीक्षित संजयराव झाड़े ने कहा कि सभी सुझावों पर विचार किया जाएगा और उसके बाद पॉलिसी को अंतिम रूप दिया जाएगा।
- यह नई ईवी पॉलिसी प्रदेश में न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, बल्कि ईवी के बढ़ते प्रचलन के साथ साथ रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेगी। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास मध्य प्रदेश को एक हरित राज्य की दिशा में कदम बढ़ाने में मदद करेगा।












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