एमपी में गजब कारनामा: जिस जाति का वोटर तक नहीं, उस जाति के लिए आरक्षित कर दी सरपंच सीट
सागर, 13 जून। मप्र के निवाडी जिले में चुनावी प्रक्रिया के दौरान अजब मामला सामने आया है, यहां पर एक ग्राम पंचायत ऐसी है, जहां अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग का एक भी वोटर नहीं है, बावजूद इसके सरपंच सीट को इस वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया। जब एक भी नामांकन नहीं आया तब इस ओर प्रशासन का ध्यान गया। अब यहां सरपंच का चुनाव रद्द कर नए सिरे से आरक्षण होगा उसके बाद चुनाव कराए जाएंगे, तब तक जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त अधिकारी से पंचायत के काम होंगे।

मप्र के बुंदेलखंड में निवाडी जिले की ओरछा तहसील के अधीन ग्राम पंचायत गुजर्रा खुर्द में सरपंच चुनाव की प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। यहां सरपंच पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के लिए आरक्षित किया गया था। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया 6 जून को समाप्त हुई तो यहां एक भी आवेदन जमा नहीं किया गया। बाद में पता चला कि गुजर्रा खुर्द में अनुसूचित जनजाति का एक भी वोटर नहीं है न इस वर्ग का कोई परिवार यहां रहता है।
आरक्षण प्रक्रिया के दौरान ध्यान नहीं दिया
गुजर्रा खुर्द पंचायत में सरपंच पद का चुनाव निरस्त होने की वजह प्रशासन की बडी चूक सामने आई है। जब निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पंचायतों का आबादी के आधार पर आरक्षण किया जा रहा था, इस दौरान उक्त पंचायत की आबादी पर ध्यान नहीं दिया गया और आरक्षण में यह पंचायत सीधे एसटी वर्ग को आरक्षित कर दी गई, इसलिए अब यहां दोबारा आरक्षण प्रक्रिया संपन्न कराना पडेगी।
जिला प्रशासन को जानकारी दे दी गई है
ओरछा के तहसीलदार संदीप शर्मा ने बताया कि आरक्षण के वक्त चूक हुई, इस कारण ग्राम पंचायत गुजर्रा खुर्द की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दी गई। इस कारण किसी ने भी सरपंच पद के लिए आवेदन नहीं किया। जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग को इसकी जानकारी दी गई है। चुनाव होने के बाद अलग से आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर सरपंच का चुनाव कराया जाएगा।
कलेक्टर नियुक्त करेंगे अधिकारी, उनके हस्ताक्षर से चलेगी पंचायत
निर्वाचन आयोग के नियमानुसार 6 महीने में इस ग्राम पंचायत में दोबारा चुनाव कराए जाएंगे। तब तक इस पंचायत का संचालन प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा। अभी वर्तमान में जो चुनाव की आचार संहिता लगी हुई है, उसके रहने तक पंचायत सचिव और कलेक्टर द्वारा नियुक्त अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से इस पंचायत में काम हो सकेंगे। जब आचार संहिता खत्म हो जाएगी, तब चुने गए पंच किसी सदस्य को सरपंच के रुप में चुन लेंगे और छह महीने तक पंचायत का संचालन किया जाएगा।












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