जानें कौन हैं दादा धूनीवाले और क्यों खास है यह मंदिर, 100 करोड़ से नवनिर्माण, CM मोहन यादव करेंगे भूमिपूजन
MP News: मध्य प्रदेश के खंडवा में आज श्री दादा धूनीवाले मंदिर के भव्य नवनिर्माण की नींव रखी जाएगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, और कई प्रमुख संतों की उपस्थिति में सुबह 11:40 से 12:15 के बीच भूमिपूजन समारोह आयोजित होगा।
यह मंदिर मध्य प्रदेश की एक प्राचीन धार्मिक धरोहर है, जिसके नवनिर्माण की मांग लंबे समय से चली आ रही थी। 100 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले इस मंदिर में 108 खंभों का भव्य डिज़ाइन होगा, जिसमें उच्च गुणवत्ता के मकराना मार्बल का उपयोग किया जाएगा। इस लेख में हम दादा धूनीवाले के जीवन, उनके मंदिर की महत्ता, और इस नवनिर्माण परियोजना के महत्व को विस्तार से समझेंगे।

कौन हैं दादा धूनीवाले?
दादा धूनीवाले, जिन्हें श्री दादा जी या बड़े दादाजी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के महान संतों में से एक हैं। उनका जन्म और प्रारंभिक जीवन रहस्यमयी रहा है, लेकिन उनकी लीलाएं और चमत्कार आज भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय हैं। दादा धूनीवाले का असली नाम केशवानंद जी महाराज था, और उनके शिष्य हरिहर भोले भगवान, जिन्हें छोटे दादाजी कहा जाता है, भी उनके साथ समाधिस्थ हैं।
दादा धूनीवाले मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के साईखेड़ा (निमावर) गांव में एक पेड़ के नीचे प्रकट हुए थे। वहां उन्होंने अपनी कई चमत्कारी लीलाएं कीं और एक धूनी (पवित्र अग्नि) प्रज्वलित की, जो आज भी साईखेड़ा में जल रही है। कहा जाता है कि दादा जी इस धूनी में चने डालकर हीरे-मोती बना देते थे और भक्तों द्वारा दी गई कीमती वस्तुओं को भी धूनी में समर्पित कर देते थे। बाद में, वे खंडवा आए और वहां भी एक धूनी प्रज्वलित की, जो आज श्री दादा धूनीवाले मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।
1930 में दादा जी ने खंडवा में समाधि ली, और तब से यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। मंदिर के सेवादारी सुभाष नागौरी के अनुसार, "दादा जी ने प्रचार-प्रसार की मनाही की थी। उनकी आज्ञा थी कि जो आए, वही जाने, और उसे अनुभव हो जाएगा।" यही कारण है कि यह मंदिर बिना किसी बड़े प्रचार के भी लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
मंदिर की महत्ता और गुरु-शिष्य परंपरा
श्री दादा धूनीवाले मंदिर खंडवा में न केवल एक पूजास्थल है, बल्कि यह गुरु-शिष्य परंपरा का एक जीवंत प्रतीक भी है। हर साल गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यहां चार से पांच लाख श्रद्धालु समाधि दर्शन के लिए आते हैं। इस दौरान मंदिर ट्रस्ट द्वारा तीन दिवसीय उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें भक्तों को मुफ्त भोजन और प्रसादी वितरित की जाती है।
मंदिर की धूनी (पवित्र अग्नि) को धूनी माई के नाम से जाना जाता है, जहां श्रद्धालु नारियल और हवन सामग्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है। मंदिर में बड़े दादाजी (केशवानंद जी) और छोटे दादाजी (हरिहर भोले भगवान) की समाधियां हैं, जो इसे एक अनूठा आध्यात्मिक केंद्र बनाती हैं।
मंदिर नवनिर्माण, 100 करोड़ की भव्य परियोजना
वर्तमान मंदिर का ढांचा सीमेंट-कॉन्क्रीट का है, जो 50 वर्ष से अधिक पुराना है और जर्जर हो चुका है। मंदिर के नवनिर्माण की मांग कई वर्षों से थी, लेकिन मंदिर ट्रस्ट और भक्तों के बीच मंदिर के डिज़ाइन को लेकर विवाद था। कुछ भक्त 84 खंभों वाला मंदिर चाहते थे, जबकि ट्रस्ट ने लाल पत्थर से 108 खंभों वाला मंदिर बनाने की शुरुआत की थी। इस विवाद के कारण मामला कोर्ट में पहुंच गया, और निर्माण कार्य पर रोक लग गई।
अब स्थानीय स्तर पर सहमति बनने के बाद मंदिर निर्माण का कार्य एक नई समिति के तहत शुरू हो रहा है, जिसमें प्रशासनिक, राजनीतिक, और सामाजिक लोग शामिल हैं। प्रस्तावित मंदिर में कुल 108 खंभे होंगे, जिनमें 84 खुले और 24 समाधिस्थल व नर्मदा माई मंदिर की दीवारों में कवर्ड होंगे। निर्माण में डेढ़ नंबर मकराना मार्बल का उपयोग होगा, और परियोजना की अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपये है। अब तक मंदिर निर्माण समिति को 37 करोड़ रुपये की दान राशि की घोषणा हो चुकी है।
भूमिपूजन समारोह, सीएम मोहन यादव और संतों की उपस्थिति
30 जून 2025 को होने वाला भूमिपूजन समारोह एक ऐतिहासिक अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर 12 बजे खंडवा पहुंचेंगे और सीधे मंदिर परिसर में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वे धर्मसभा में शामिल होंगे। इस समारोह में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, और मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, तुलसी सिलावट, धर्मेंद्र लोधी, और विजय शाह शामिल होंगे। इसके अलावा, संत राजेंद्र महाराज, उत्तम स्वामी, विवेकानंद पुरी, दादा गुरु, और छोटे सरकार जैसे प्रमुख संत भी उपस्थित रहेंगे।
विशेष रूप से, भूमिपूजन का कार्य न तो मुख्यमंत्री और न ही संत करेंगे। इसके लिए पांच कन्याओं को चुना गया है, जो पारंपरिक वैदिक रीति से भूमिपूजन करेंगी। अतिथि केवल पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। यह निर्णय मंदिर की परंपराओं और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुरूप लिया गया है।
बारिश के बीच आयोजन की तैयारियां
मौसम विभाग की बारिश की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल पर 25,000 वर्ग फीट का वाटरप्रूफ डोम लगाया गया है। मंच पर कोई कुर्सी या सोफा नहीं होगा; इसके बजाय गादी और चादर बिछाई गई हैं। मुख्यमंत्री के लिए 1,000 वर्ग फीट और संतों के लिए 800 वर्ग फीट का मंच तैयार किया गया है, जबकि 23,500 वर्ग फीट का क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित है। सभी को पंडाल में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतारने होंगे, और अतिथियों का स्वागत चादर प्रसादी से किया जाएगा।
सामाजिक और धार्मिक महत्व
दादा धूनीवाले मंदिर का नवनिर्माण न केवल खंडवा, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। यह मंदिर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। गुरु पूर्णिमा और नए साल जैसे अवसरों पर यहां भक्तों का मेला लगता है।
इस नवनिर्माण से मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक आकर्षण और बढ़ेगा, जिससे यह एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में उभरेगा। मंदिर निर्माण समिति में प्रशासन और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि परियोजना पारदर्शी और सामुदायिक सहमति के साथ पूरी हो।
विवादों का इतिहास और समाधान
मंदिर निर्माण को लेकर पहले हुए विवादों ने इस परियोजना को कई वर्षों तक प्रभावित किया था। 2022 में भक्तों के एक समूह ने 84 खंभों वाला संगमरमर का मंदिर बनाने की मांग की थी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में संगमरमर की शिलाएं मंदिर परिसर में लाए थे। लेकिन ट्रस्ट के लाल पत्थर वाले 108 खंभों के मॉडल के कारण विवाद बढ़ गया, और पुलिस ने मंदिर पहुंच मार्गों को बंद कर दिया था।
इस बार, स्थानीय प्रशासन, भक्तों, और सामाजिक संगठनों की सहमति से विवाद को सुलझाया गया है। नई समिति के गठन और मकराना मार्बल के उपयोग ने सभी पक्षों को संतुष्ट किया है। यह समिति अब मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया की देखरेख करेगी।












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