Sagar News: "नेकी की दीवार" तक जरूरतमंदों की नो एंट्री, पड़े-पड़े खराब हो रहे गरीबों के काम आ सकने वाले कपड़े
सागर, 25 जुलाई। सागर में जनता की "नेकी" और गरीब जरुरतमंदों के बीच निगम ने नियमों और सुरक्षा की "दीवार" खींच दी है। दरअसल नगर निगम ने ऑडिटोरियम के पीछे 'नेकी की दीवार' बनाई है। यहां लोग पुराने कपड़े तो रख गए, लेकिन जरुरत गरीब लोग यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। कारण यहां बोर्ड लगाया गया है, आम लोगों का जाना मना है। सुरक्षाकर्मी भी तैनात है।

नगर निगम की "नेकी की दीवार" शहर के गरीब और जरूरतमंद लोगों की पहुंच से दूर है। मोतीनगर चौराहे पर करीब 14 करोड़ की लागत से तैयार लग्जरी ऑडिटोरियम परिसर में बनी 'नेकी की दीवार' बनाई गई थी, ताकि लोग यहां पुराने कपड़े, बर्तन और पुस्तकें रख सकें। कुछ लोग कपड़े तो रख गए, लेकिन यह नेकी की दीवार आम नागरिकों की पहुंच से दूर कर दी गई है, जिस कारण महीनों से कपड़े वहीं पडे हैं और गरीब व जरुरतमंद उन्हें नहीं ले जा पा रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब गरीबों को यहां नहीं जाने देता था तो ये दीवार बनाई क्यों थीं।
गरीबों के लिए ही बनाई है नेकी की दीवार
ऑडिटोरियम में नेकी की दीवार गरीब और जरुरतमंद के लिए ही बनाई गई है। निगम की तरफ से आम लोगों या जरुरतमंदों के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यह ऑडिटोरियम के पीछे की तरफ बनाई है। यदि बोर्ड लगाया गया है या सुरक्षाकर्मी रोकते हैं तो मैं दिखवाता हूं। किसी गरीब को नहीं रोका जाएगा। ऑडिटोरियम के अंदर की व्यवस्था अलग है। परिसर में तो लोग जा सकते हैं।
- राजेश सिंह राजपूत, सहायक आयुक्त, नगर निगम सागर मप्र।












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