हाईकोर्ट की अवमानना के आरोप में छतरपुर के पूर्व Collector-CEO को 7-7 साल की सजा, कोर्ट रूम से गिरफ्तार
हाईकोर्ट (High Court) जबलपुर ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना व अवमानना का दोषी मानते हुए छतरपुर जिले के पूर्व कलेक्टर और तत्कालीन एडिशनल कलेक्टर अमर बहादुर सिंह को 7-7 दिन की सजा सुनाई है। दोनों पर 50-50 हजार का जुर्माना लगाया गया है। मामला छतरपुर जिले में 2020 में स्वच्छता मिशन की समन्वयक रचना द्विवेदी के स्थानांतरण और जबरन ट्रांसफर और सेवा से बर्खास्त करने के मामले से जुड़ा है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर के पूर्व कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह और तत्कालीन एडिशनल कलेक्टर अमर बहादुर सिंह को अवमानना का दोषी करार दिया है। साथ ही उन्हें सात दिन के कारावास की सजा से दंडित किया है। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अहलुवालिया की एकल पीठ ने दोनों अधिकारियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। दोनों अधिकारियों को कोर्ट रूम में गिरफतार किया गया था। हालांकि वकील के माध्यम से दोनों अधिकारियों ने सजा के फौरन बाद सीजे कोर्ट में अपील की थी, जिसमें सुनवाई के बाद दोनों को स्टे मिल गया।
स्वच्छता मिशन की जिला समन्वयक को बर्खास्त कर दिया था
कोर्ट में प्रस्तुत प्रकरण के अनुसार छतरपुर जिला में स्वच्छता मिशन के तहत जिला समन्वयक के पद पर नियुक्त रचना द्विवेदी का स्थानांतरण बड़ा मलहरा कर दिया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि संविदा नियुक्ति में स्थानांतरण का कोई प्रावधान नहीं है। हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2020 को स्थानांतरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट की रोक के बावजूद याचिकाकर्ता को बड़ा मलहरा में ज्वाइन नहीं करने के कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस कारण याचिकाकर्ता ने उक्त अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की थी।
दोनों अधिकारियों ने कोर्ट से समय मांगा था
शुक्रवार को सुनवाई के बाद जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने दोनों अधिकारियों को अवमानना का दोषी पाया था। हाईकोर्ट ने दोनों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत रहने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आदेश सुनाने के बाद दोनों आईएएस अधिकारियों को कोर्ट रूम से गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों अधिकारियों ने कोर्ट से व्यक्तिगत रूप से क्षमा भी मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने अवमानना के मामले को गंभीर मानते हुए सुजा को बरकरार रखा। इसके पूर्व कोर्ट में दोनों अधिकारियों ने पारित आदेश वापस लेने के लिए हाईकोर्ट के सामने आवेदन भी प्रस्तुत किया था। दोनों अधिकारियों ने सजा के फौरन बाद सीजे कोर्ट में वकील के माध्यम से अपील की थी, जिस पर शाम को स्टे मिल गया है।












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