मध्य प्रदेश: रोजगार की आस में अटका है बुदेंलखंड, युवा करेंगे प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला
सागर। बुंदेलखंड के सागर जिले में इस बार के चुनाव में बेरोजगारी, सूखा, अपराध और मूलभूत सुविधाएं प्रमुख मुद्दे होंगे। जिले में 8 विधानसभा सीटें हैं। जिले की एक विधानसभा में कांग्रेस को छोड़ बांकी सभी पर भाजपा विधायक हैं। सागर जिला भाजपा का गढ़ रहा है। कैसी भी परिस्थिति हो भाजपा को 5 से अधिक सीटें ही मिली हैं। जिला मुख्यालय सागर विधानसभा सीट पर तो 35 सालों से भाजपा का कब्जा है। यहां पर चुनावी मुद्दों की बात करें तो बेरोजगारी व किसानों की समस्याएं प्रमुख हैं। बीना में लगी तेल रिफाइनरी को छोड़ दें तो यहां पर बीड़ी और अगरबत्ती के अलावा किसी भी चीज का उत्पादन नहीं होता। जिले में 66 हजार से अधिक पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं। रोजगार के नाम पर शासन ने अब तक केवल 4800 युवाओं को रोजगार दिलाने का दावा किया है।

जिले से दो कैबिनेट मंत्री
राजनैतिक दृष्टि से देखें तो सागर जिले में प्रदेश के दो कैबिनेट मंत्री हैं। खुरई विधानसभा क्षेत्र से गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह और रहली विधानसभा क्षेत्र से पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव। इसके अलावा हथकरघा आयोग के अध्यक्ष नारायण प्रसाद कबीरपंथी और महिला आयोग की अध्यक्ष लता वानखेडे़ भी सागर जिले से हैं। इसके अलावा सागर संसदीय सीट और नगर निगम की सीट पर भाजपा का कब्जा है।

सूखे से हारा किसान
खेती की बात करें तो जिला का प्रमुख आय का स्त्रोत खेती है लेकिन सिंचाई का साधन न होने और बारिश की दगाबाजी के कारण किसान अपनी लागत भी वसूल नहीं कर पाता। एक साल में दर्जन भर से अधिक किसानों ने कर्ज या अन्य कारणों से आत्महत्या कर ली है। किसानों के लिए शासन द्वारा चलाई गई विभिन्न सरकारी योजनाओं का भी लाभ किसानों को नहीं मिल पाया। यहां पर सिंचाई की ऐसी कोई बड़ी परियोजना नहीं है।

अपराध में बृद्धि
अपराध की बात करें तो जिले में बीतें सालों की अपेक्षा अपराध का ग्राफ भी बढ़ा है। जिले में 2017 में दुराचार के 60 तो 2018 में 62 मामले दर्ज किए गए हैं। इस वर्ष दुष्कर्म के मामले में 4 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के कारण अपराध में खासी बढ़ोत्तरी हुई है। हालांकि प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह का यह गृह क्षेत्र है।

शहर के प्रमुख मुद्दे
सागर शहर को स्मार्ट सिटी तो घोषित कर दिया गया है, लेकिन शहर में डेयरी विस्थापन, जल संकट, बेरोजगारी, प्रमुख मुद्दे हैं। पिछले कुछ दिनों से आईटी पार्क की मांग ने भी जोर पकड़ा है। यहां पर डा. हरिसिंह गौर विवि को सेंट्रल विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाने के बाद राज्य विवि छतरपुर को बना दिया गया। जिसके बाद शहर में महिला विवि की मांग भी एक प्रमुख मुद्दा है। इसके अलावा यातायात, अतिक्रमण, तालाब की सफाई भी प्रमुख समस्याओं में शामिल है।












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