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MP News: मंदसौर में देवड़ा के बयान के विरोध पर कांग्रेसियों से मारपीट, पुतला दहन बना हिंसा की वजह

MP News: मध्य प्रदेश की सियासत में शनिवार को उस वक्त घमासान मच गया, जब उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विधानसभा क्षेत्र मल्हारगढ़ के बूढ़ा गांव में कांग्रेस के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान हिंसक झड़प हो गई।

आरोप है कि पुतला दहन के बाद भाजपा समर्थकों और खुद उपमुख्यमंत्री देवड़ा की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई, जिसमें ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ईश्वरलाल धाकड़ गंभीर रूप से घायल हो गए।

Congressmen were beaten up and effigy was burnt in protest against Jagdish Devda s statement

घटना के बाद कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा, "प्रदेश में 'भाजपा का गुंडाराज' चल रहा है, जहां लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए लाठी और हिंसा का सहारा लिया जा रहा है।"

पुतला दहन से झड़प तक: घटनाक्रम क्या था?

कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री देवड़ा के उस बयान के विरोध में बूढ़ा गांव में प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने कहा था - "देश की सेना और सैनिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरणों में नतमस्तक हैं।"

कांग्रेस ने इस बयान को सेना का अपमान बताया और पूरे प्रदेश में पुतला दहन का ऐलान किया।
मल्हारगढ़ में जैसे ही पुतला जलाया गया, बीजेपी समर्थकों ने विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं पर हमला बोल दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस मौके पर मौजूद थी लेकिन मूकदर्शक बनी रही, और बाद में बीजेपी समर्थकों का ही बचाव करती दिखाई दी।

कांग्रेस का सीधा आरोप: "देवड़ा की शह पर हमला"

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने X पर लिखा: "प्रदेश में भाजपा का 'गुंडाराज'! उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और भाजपा के गुंडों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।"

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा: "ये केवल कांग्रेस पर हमला नहीं, ये लोकतंत्र और विरोध की आवाज़ पर हमला है। जब उपमुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की हिंसा होती है, तो जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है।"

बयान पर बढ़ता विवाद: क्या कहा था देवड़ा ने?

16 मई को जबलपुर में एक कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा था: "हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर जैसी ऐतिहासिक कार्रवाई हुई। देश, सेना और सैनिक उनके चरणों में नतमस्तक हैं।"

इस बयान पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने X पर लिखा: "भाजपा के नेताओं द्वारा बार-बार सेना का अपमान किया जाना अत्यंत शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है।" सुप्रिया श्रीनेत ने कहा: "सेना प्रधानमंत्री के चरणों में नतमस्तक है - यह कहना सिर्फ झूठा नहीं, खतरनाक भी है।"

देवड़ा की सफाई, "बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया"

घटनाक्रम बढ़ने के बाद देवड़ा ने सफाई देते हुए कहा: "मैंने यह कहा था कि देश की जनता सेना के साहस और पराक्रम के लिए नतमस्तक है। मीडिया ने मेरे बयान को संदर्भ से काटकर दिखाया है।" जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने भी इस पक्ष में बयान दिया कि वीडियो के अंशों को भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

हमले के बाद स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था पर सवाल

घायल ब्लॉक अध्यक्ष ईश्वरलाल धाकड़ को मंदसौर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि हमला पूर्व नियोजित था और प्रशासन ने कोई सुरक्षा नहीं दी। अब कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज करने, दोषियों की गिरफ्तारी और उपमुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

राजनीतिक नजरिया, ये सिर्फ बयानबाजी नहीं, जनभावनाओं की लड़ाई बन चुकी है

सेना जैसे सम्मानित संस्थान को राजनीतिक विमर्श में लाना और फिर उस पर बयान देकर विवाद पैदा करना सिर्फ एक बयान की बात नहीं है - ये सवाल उठाता है कि क्या सत्ता की भाषा अब लोकतंत्र से ज्यादा दमन की बनती जा रही है?

पुलिस की निष्क्रियता का इतिहास

मध्य प्रदेश में पुलिस पर मूकदर्शक रहने या सत्ताधारी दल के समर्थन में काम करने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2025 में भोपाल के आरकेएमपी रेलवे स्टेशन पर गुंडों ने जीआरपी जवान नजर दौलत खान को पीटा, और पुलिस ने देर से कार्रवाई की। इसी तरह, 2023 में कन्नौज में भाजपा सांसद सुब्रत पाठक पर पुलिस चौकी पर हमला करने का आरोप लगा, लेकिन कार्रवाई सीमित रही।

मंदसौर की इस घटना में पुलिस की निष्क्रियता ने इन आरोपों को और हवा दी है। कांग्रेस का दावा है कि स्थानीय पुलिस भाजपा के दबाव में काम कर रही है, जिसके चलते हमलावरों के खिलाफ कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई।

कानूनी और सामाजिक प्रभाव

यह घटना न केवल सियासी विवाद है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और पुलिस की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 325 (गंभीर चोट), और 147 (दंगा) के तहत हमलावरों पर केस दर्ज हो सकता है। लेकिन पुलिस की चुप्पी इस प्रक्रिया को जटिल बना रही है।

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