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चीतों की मौत का कारण 'रेडियो कॉलर' तो नहीं, गले में मिला संक्रमण! विशेषज्ञों ने जताई आशंका

cheetah project in india: कूनो नेशनल पार्क में हाल में ही चीता तेजस और सूरज की मौत के पीछे उनके गले में बंधी रेडियो कॉलर आईडी के कारण त्चचा में संक्रमण हो सकता है। मौसम के कारण कॉलर आईडी के बेल्ट के नीचे सूजन और घाव व उस पर भिनभिनाती मक्खियां सेप्टिसीमिया व बैक्टीरिया ब्लड में संक्रमण का कारण हो सकते हैं। कूनो पार्क प्रबंधन के सूत्रों की माने तो चीतों का पोस्टमार्टेम करने वाले डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से इस खतरे की तरफ इशारा किया है। बाकी जिंदा बचे चीतों के रेडियो कॉलर व गले की जांच की आवश्यकता जताई गई गई है।

cheetah_kuno_रेडियो कॉलर आईडी से संक्रमण हो सकता है चीतों की मौत का कारण!

कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में एक के बाद एक चीतों की मौत ने सबको चिंता में डाल दिया है। #चीता प्रोजेक्ट पर ही सवाल उठाए जाने लगे हैं। हर चीते की मौत और पीएम रिपोर्ट आने से पहले कुछ न कुछ कारण बताया जाता है। बीते एक हफ्ते में दो चीतों की मौत ने एक बार फिर चीतों की सुरक्षा, प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए हैं। लेकिन इस दफा कूनो के अंदर से नया मामला निकलकर आया है। इसमें चीतों की मौत का कारण उनके गले में बंधी सैटेलाइट गहना अर्थात रेडियो कॉलर आईडी को बताया जा रहा है। सूत्रों की माने तो चीतों के पीएम के दौरान इस तरफ ईशारा किया गया है कि कॉलर आईडी के नीचे त्वचा में फैलने वाला संक्रमण इनकी मौत की बड़ी वजह बन सकता है।

कूनो नेशनल पार्क श्योपुर का एक सोशल मीडिया पर कूनो चीता जंगल सफारी डॉट कॉम नाम से अकाउंट बना हुआ है। इस पर अधिकांश आफिसियल जानकारी साझा की जाती है। इस पर शनिवार को कुछ जानकारी साझा की गई है। इसमें बताया गया है कि हाल ही में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का कारण रेडिया कॉलर से संबंधित संक्रमण माना जा रहा है, रेडियो कॉलर आईडी के नीचे की त्वचा की सूजन ने मक्खियों को आकर्षित किया और घातक सेप्टिसीमिया व संक्रमण पनप सकता है जो बैक्टीरिया द्वारा ब्लड में इंफेक्शन पहुंच गया या। डॉ. लॉरी मार्कर ने बताया कि रेडियो कॉलर चीतों के लिए बहुत तंग और भारी थे। इससे उनकी त्वचा पर खरोंच और घाव हो गए। उन्होंने कहा कि कूनो में नमी वाले मौसम की स्थिति में यह समस्या और बढ़ गई।

cheetah_kuno_रेडियो कॉलर आईडी से संक्रमण हो सकता है चीतों की मौत का कारण!

रेडियो कॉलर आईडी कैसे बन सकती है मौत का कारण?
चीतों के गले में बंधी रेडियो कॉलर आईडी कैसे चीतों की मौत का कारण बन सकती है। इसको लेकर कूनो के सोशल अकाउंट पर ही जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि बारिश के मौसम के कारण चीतों की त्वचा हमेशा गीली रहती है और संक्रमण का कारण बनती है। चीता इसे ठीक करने के लिए अपने शरीर के उस हिस्से को चाट नहीं पाता है और मक्खियां अंडे देती रहती हैं। लार्वा ऊतकों को खाते हैं और प्रणालीगत संक्रमण का कारण बनते हैं। चीतों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ऐसे कीड़ों से बने घावों की ओर इशारा किया गया है।

सभी चीतों के गले की जांच की आवश्यकता है
कूनो नेशनल पार्क से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कूनो में बाड़े के अंदर और फ्री रेंज में छोड़े गए सभी चीतों की जांच की आवश्यकता है। यह इसलिए भी जरूरी है कि देखना होगा कि कहीं उन्हें भी रेडियो कॉलर से संक्रमण तो नहीं हो रहा है। हालांकि मामला चीता प्रोजेक्ट से जुड़ा होने के कारण इस मामले में कोई भी अधिकारी-कर्मचारी खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। फिर भी सूत्र बताते हैं कि रेडियो कॉलर के नीचे संक्रमण की इस आशंका से प्रोजेक्ट के वरिष्ठ अधिकारियों तक मामला पहुंचाया गया है।

दोनों चीतों के गले में घाव व शरीर में संक्रमण
कूनो में बीते मंगलवार को चीता तेजस और उसके बाद शनिवार को चीता सूरज की मौत का कारण उनके शरीर के अंदरूनी अंगों में गंभीर संक्रमण बताया गया है। दोनों में एक बा​त कामन रही कि इनके गले में घाव और उस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। पीएम के दौरान दोनों के गले में रेडियो कॉलर बेल्ट के नीचे घाव और संक्रमण मिला है। हालांकि यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। वन इंडिया हिन्दी इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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