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Irasti में मासूम के मामले में सजा-ए-मौत, जिला कोर्ट के इतिहास में पहला मुकदमा, 90 दिन में आया फैसला

मध्य प्रदेश के इटारसी में बहुचर्चित मासूम के साथ दुष्कर्म हत्याकांड मामले में अदालत ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई है। फूफा ने सगी भतीजी के साथ वारदात को अंजाम दिया था।

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Capital punishment in case of innocent: मध्य प्रदेश के इटारसी जिले में मासूम भतीजी से दुष्कर्म फिर जघन्य हत्याकांड में आरोपी को मौत की सजा सुनाई है। वारदात के 90 दिनों के भीतर यह बड़ा फैसला आया। यहां की जिला अदालत के इतिहास में सजा-ए-मौत ऐलान का पहला मुकदमा माना जा रहा है। पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें न्याय पर भरोसा था। आगे भी उनको इंसाफ मिलेगा।

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एमपी के इटारसी जिला सत्र न्यायालय के लिए मंगलवार का दिन बेहद ख़ास था। केसला विकासखंड के बहुचर्चित जघन्य हत्याकांड और दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया। सगी मासूम भतीजी के गुनाहगार राहुल कवडे को जब मौत की सजा सुनाई गई, फरियादी पक्ष की आंखे ख़ुशी से भर गई। क्योकि वारदात के 90 दिनों के भीतर फास्ट ट्रेक कोर्ट से इंसाफ मिला। जिसकी उन्हें दरकार की थी। जिला अभियोजन अधिकारी राजकुमार नेमा के मुताबिक 17 नवंबर 2022 को उसका बहनोई घर पर आया था। उसके अगले दिन घर के सभी लोग काम पर गए हुए थे, उसकी बेटी और बेटा घर पर बहनोई राहुल के साथ थे। इसी दौरान राहुल उसकी मासूम बेटी को बाइक पर चाकलेट दिलाने के बहाने ले गया और जंगल में दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने के बाद लड़की को मौत के घाट उतार दिया। बाद में आरोपी ने चालाकी दिखाई और पुलिस को गुमराह करने की भी कोशिश की थी। हालांकि पेशी दौरान उसने अपना जुर्म कबूल लिया।

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    इस मामले के अपर लोक अभियोजक राजीव शुक्ला ने बताया कि फांसी की सजा के फैसले पर स्थानीय न्यायालय हाईकोर्ट को प्रकरण पेश करेगा, यहां उच्च न्यायालय विचार करते हुए सजा यथावत रखता है, तो प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली जाएगा। इस अवधि में अभियुक्त जेल अपील या परिवार की मदद से क्षमादान याचिका कर सकेगा। यदि सुप्रीम कोर्ट भी सजा जारी रखते हुए दोनों न्यायालयों के फैसले को मंजूर करता है तो फिर अंतिम फैसले के लिए इसे राष्ट्रपति के समक्ष भेजा जाएगा, दूसरी बार फांसी सजा माफी के लिए बंदी क्यूरेटिव याचिका दायर कर सकता है, यदि राष्ट्रपति भी क्षमादान याचिका मंजूर कर देते हैं, तब हाईकोर्ट इस फैसले के तहत फांसी की सजा के लिए दिन-तारीख मुर्करर करते हुए न्यायालय को सूचित करेगा।

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