क्या बुधनी और विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में पोस्टल बैलेट से कराए जाएंगे मतदान, कांग्रेस-बसपा और आप ने की मांग
MP News: मध्य प्रदेश की बुधनी और विजयपुर विधानसभा उपचुनावों की घोषणा के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुखबीर सिंह द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में राजनीतिक दलों ने कुछ अहम मांगें रखी हैं। इसके बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि क्या उपचुनाव पोस्टल बैलेट से कराए जाएंगे।
दरअसल, इस बैठक में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रतिनिधियों ने पोस्टल बैलेट के माध्यम से चुनाव कराने की मांग की है।

निर्वाचन आयोग ने दिया आश्वासन
कांग्रेस के चुनाव संबंधी कार्य देख रहे जेपी धनोपिया ने बैठक में यह प्रस्ताव रखा कि बुधनी और विजयपुर उपचुनावों को पोस्टल बैलेट के जरिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आयोजित किया जाए। उनका कहना था कि इससे चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाया जा सकेगा। इस मांग का समर्थन बसपा और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी किया।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुखबीर सिंह ने इस मांग को भारत निर्वाचन आयोग को भेजने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर निर्णय आयोग द्वारा ही लिया जाएगा।

बैठक में हुई चर्चाएं
बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए। नवागत मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुखबीर सिंह का स्वागत किया गया और पूर्व सीईओ अनुपम राजन के सफल कार्यकाल के लिए उनका आभार व्यक्त किया गया।
बैठक में शामिल अन्य अधिकारियों में एडिशनल सीईओ राजेश कौल, जॉइंट सीईओ बसंत कुरे, और विवेक श्रुति शामिल थे। भाजपा की ओर से एसएस उप्पल, कांग्रेस की ओर से जेपी धनोपिया, और बसपा व आप के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
आचार संहिता और मतदाता सूची के मुद्दे
कांग्रेस के प्रतिनिधि जेपी धनोपिया ने आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों के पालन में लापरवाही का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तीन साल से जमे अधिकारियों को हटाने की आवश्यकता है और मतदाता सूची के कार्य को सही तरीके से करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर चुनाव प्रक्रिया में इस तरह की समस्याएँ बनी रहीं, तो इसका प्रभाव मतदान और लोकतंत्र पर पड़ेगा।
बुधनी और विजयपुर विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों की पोस्टल बैलेट की मांग एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनती जा रही है। इस प्रस्ताव पर भारत निर्वाचन आयोग के निर्णय का इंतज़ार रहेगा, जो यह तय करेगा कि क्या आगामी चुनाव इस नई प्रक्रिया के तहत कराए जाएंगे। राजनीतिक दलों के इस प्रयास से चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और सुलभता आने की उम्मीद जताई जा रही है।












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