Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

MP News: गुना अभ्युदय जैन मर्डर मिस्ट्री में बड़ा अपडेट, मां अल्का जैन को 98 दिन बाद कैसे मिली जमानत, जानिए

MP News: मध्य प्रदेश के गुना जिले में 15 वर्षीय अभ्युदय जैन की मौत का मामला, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, एक बार फिर सुर्खियों में है। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री में अभ्युदय की मां अल्का जैन, जिन पर अपने ही बेटे की हत्या का आरोप लगा था, को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 50,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड पर जमानत दे दी है।

98 दिन जेल में बिताने के बाद अल्का जैन जल्द ही जेल से बाहर आएंगी, लेकिन इस फैसले ने मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह आत्महत्या थी या हत्या? पुलिस की प्रारंभिक जांच में चूक कहां हुई? और अल्का जैन को जमानत कैसे मिली? आइए, इस रोचक और रहस्यमयी कहानी को विस्तार से जानते हैं।

Big update in Guna Abhiyudaya Jain mystery mother Alka Jain gets bail after 98 days

मामला क्या है: 14 फरवरी 2025 की वह मनहूस शाम

14 फरवरी 2025 को गुना की चौधरन कॉलोनी में किराए के मकान में रहने वाले 15 वर्षीय अभ्युदय जैन का शव उनके घर के बाथरूम में मिला। अभ्युदय कक्षा 8 का छात्र था और अपने माता-पिता, अल्का जैन और अनुपम जैन, के साथ रहता था। अनुपम, एक प्राइवेट बैंक में ऑडिट ऑफिसर, उस दिन काम के सिलसिले में शहर से बाहर थे। अल्का ने पुलिस को बताया कि वह शाम को बैडमिंटन खेलने क्लब गई थीं और लौटने पर घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला।

कई बार खटखटाने और फोन करने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार, मकान मालिक से दूसरी चाबी लेकर दरवाजा खोला गया। बाथरूम में अभ्युदय का शव दुपट्टे से लटका मिला, उसके पैर लेगी से बंधे थे, और गले पर निशान थे। शुरुआत में यह आत्महत्या का मामला लगा, लेकिन जिला अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या (स्ट्रैंगुलेशन) की पुष्टि हुई। इसके बाद 22 फरवरी को कोतवाली थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया, और पुलिस की नजरें अल्का जैन पर टिक गईं।

पुलिस की थ्योरी: मां ने रची हत्या की साजिश

पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध बिंदु सामने आए। आसपास के सीसीटीवी फुटेज में कोई बाहरी व्यक्ति घर में आता-जाता नहीं दिखा। घटनास्थल पर मिले साक्ष्य, जैसे दुपट्टे और लेगी के टुकड़े, और अल्का के बयानों में विसंगतियां, पुलिस के शक को गहरा कर रही थीं। पुलिस का दावा था कि अभ्युदय अपनी मां की जीवनशैली, खासकर उनके मॉडर्न कपड़े और बिंदी लगाने, को लेकर अक्सर टोकता था। इससे मां-बेटे में तनाव रहता था।

कोतवाली थाना प्रभारी बृजमोहन भदौरिया ने बताया, "पुलिस को पुख्ता साक्ष्य मिले कि अल्का ने अभ्युदय की गला घोंटकर हत्या की और इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की।" 8 मार्च 2025 को अल्का जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने दावा किया कि अल्का ने हत्या के बाद शव को बाथरूम में लटकाया, दुपट्टा और लेगी बांधी, और फिर बैडमिंटन खेलने चली गईं।

हालांकि, अल्का ने शुरू से ही खुद को निर्दोष बताया और हत्या की बात स्वीकार नहीं की। उनके पति अनुपम जैन ने भी पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। अनुपम ने कहा, "मेरा बेटा उस दिन खुश था। जिस मां ने उसे इतने लाड़-प्यार से पाला, वह उसकी हत्या कैसे कर सकती है? पुलिस ने हमें ही फंसा दिया।"

SIT जांच और यू-टर्न: आत्महत्या की थ्योरी

अनुपम जैन की शिकायत और जांच में खामियों के आरोपों के बाद, ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया। SIT ने भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) से पोस्टमार्टम रिपोर्ट की दोबारा जांच कराई। GMC की मेडिको-लीगल रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ-मौत का कारण "पार्शियल हैंगिंग" (आंशिक फांसी) बताया गया, जो आत्महत्या की ओर इशारा करता था।

SIT की जांच में और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए:

सीसीटीवी और कॉल डिटेल्स: अल्का घटना के समय लगातार फोन पर थीं। केवल 20 मिनट का अंतराल था, जिसमें हत्या कर शव को लटकाना और सीन क्रिएट करना असंभव था।

घटनास्थल: दरवाजा अंदर से बंद था, और चाबी घर के अंदर मिली। कोई बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के सबूत नहीं मिले।

अभ्युदय का मानसिक दबाव: जांच में पता चला कि अभ्युदय पढ़ाई में कमजोर था। वह हिंदी की परीक्षा में 80 में से केवल 28 नंबर लाया था। SIT ने माना कि पढ़ाई के दबाव में उसने आत्महत्या की हो सकती है।

SIT ने अल्का को निर्दोष मानते हुए खात्मा रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) दाखिल करने की तैयारी शुरू की। पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी ने कहा, "प्रारंभिक पोस्टमार्टम में स्ट्रैंगुलेशन मार्क के आधार पर हत्या का केस दर्ज किया गया था, लेकिन GMC की नई रिपोर्ट ने आत्महत्या की पुष्टि की।"

कोर्ट में टकराव: CJM कोर्ट ने खारिज की खात्मा रिपोर्ट

SIT की खात्मा रिपोर्ट को गुना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) कोर्ट ने मई 2025 में खारिज कर दिया। कोर्ट ने पुलिस की जांच पर 13 गंभीर सवाल उठाए, जिनमें शामिल थे:

  1. अभ्युदय के पैर क्यों बंधे थे?
  2. दुपट्टे और लेगी के टुकड़ों में गठान क्यों नहीं थी?
  3. पुलिस ने प्रारंभिक जांच में साक्ष्य क्यों नजरअंदाज किए?
  4. अगर आत्महत्या थी, तो पोस्टमार्टम में स्ट्रैंगुलेशन मार्क कैसे आए?

कोर्ट ने कहा कि जांच अधूरी है और कई बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया। इसके बाद मामला फिर से हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं के तहत आगे बढ़ा। अल्का जैन जेल में ही रहीं, और मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया।

हाई कोर्ट का फैसला: 50,000 के बॉन्ड पर जमानत

17 जून 2025 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अल्का जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई की। अल्का के वकील ने तर्क दिया कि SIT की जांच और GMC की मेडिको-लीगल रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि हुई है। साथ ही, अल्का के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अल्का 98 दिन से जेल में हैं, और उनकी मानसिक स्थिति खराब हो रही है।

विपक्ष में सरकारी वकील ने CJM कोर्ट के सवालों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। हालांकि, हाई कोर्ट ने SIT की रिपोर्ट और अभ्युदय के पढ़ाई के दबाव से आत्महत्या की संभावना को गंभीरता से लिया। जस्टिस शील नागू की एकल पीठ ने 50,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और दो जमानतदारों की शर्त पर अल्का को जमानत दे दी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अल्का जांच में सहयोग करेंगी और गुना छोड़कर नहीं जाएंगी।

कांग्रेस ने इस मामले को पुलिस की नाकामी से जोड़ा। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने X पर लिखा, "गुना मर्डर केस में पुलिस ने जल्दबाजी में मां को आरोपी बनाया। अब जमानत से साफ है कि जांच में खामियां थीं।" जवाब में, बीजेपी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा, "कांग्रेस हर मामले को सियासत का रंग देती है। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की थी।"

अनुपम जैन का संघर्ष: "मेरी पत्नी निर्दोष है"

अभ्युदय के पिता अनुपम जैन इस पूरे मामले में अपनी पत्नी के पक्ष में डटकर लड़े। उन्होंने 11 बिंदुओं पर SIT जांच की मांग की थी, जिसके बाद मामला आत्महत्या की ओर मुड़ा। अनुपम ने कहा, "हमारा परिवार टूट गया। मेरा बेटा चला गया, और मेरी पत्नी को बेवजह जेल में डाल दिया गया। मैंने हमेशा निष्पक्ष जांच की मांग की। हाई कोर्ट के फैसले से हमें थोड़ी राहत मिली है।"

अनुपम ने यह भी बताया कि अभ्युदय को पढ़ाई का दबाव था। "वह एक संवेदनशील बच्चा था। शायद हम उसकी मानसिक स्थिति को समझ नहीं पाए। लेकिन मेरी पत्नी ने उसे कभी नुकसान नहीं पहुंचाया।"

अनसुलझे सवाल और भविष्य

हाई कोर्ट के जमानत फैसले ने अल्का जैन को राहत दी है, लेकिन अभ्युदय की मौत का रहस्य अभी भी अनसुलझा है। अगर यह आत्महत्या थी, तो पुलिस की प्रारंभिक जांच में स्ट्रैंगुलेशन की थ्योरी कैसे आई? अगर हत्या थी, तो SIT की आत्महत्या वाली रिपोर्ट कैसे सही हो सकती है? CJM कोर्ट के 13 सवालों का जवाब अभी भी अधूरा है।

पुलिस अब हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत मामले की आगे की जांच करेगी। सूत्रों के अनुसार, SIT को दोबारा कुछ बिंदुओं पर जांच करने के लिए कहा गया है, जैसे दुपट्टे और लेगी के टुकड़ों का विश्लेषण और घटनास्थल की फॉरेंसिक रिपोर्ट की समीक्षा।

यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज में कई सवाल भी छोड़ गया है। पढ़ाई का दबाव, माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी, और पुलिस की जल्दबाजी में की गई कार्रवाइयां-ये सभी इस केस के महत्वपूर्ण पहलू हैं। गुना के कई स्कूलों ने इस घटना के बाद बच्चों के लिए काउंसलिंग सत्र शुरू किए हैं, ताकि पढ़ाई के दबाव को कम किया जा सके।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+