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Bhopal News: पशु प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी, भोपाल वन विहार में जल्द होगा नए बब्बर शेरों का दीदार

MP News: मध्य प्रदेश के वन विहार नेशनल पार्क में गुजरात के जूनागढ़ के सक्करबाग चिड़ियाघर से दो नए सिंह का जोड़ा शनिवार शाम तक पहुंच जाएगा।

यह एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसके तहत गिर के सिंहों का जोड़ा भोपाल लाया जा रहा है। इसके बदले वन विहार से बाघों का जोड़ा सक्करबाग चिड़ियाघर भेजा गया है।

Van Vihar Pair of lions brought from Junagadh Gujarat in MP Breeding program

16 साल बाद हुआ ये बड़ा बदलाव

गुजरात सरकार ने 16 साल बाद वन विहार की मांग को स्वीकार किया है और यह युवा सिंहों का जोड़ा भेजा है। वन विहार प्रबंधन ने इस प्रजाति संरक्षण योजना के तहत गिर के सिंहों की अहमियत को देखते हुए इनका आदान-प्रदान किया है। डिप्टी डायरेक्टर एस.के. सिन्हा ने बताया कि यह एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है और इससे वन विहार में सिंहों की संख्या बढ़ेगी।

गुजरात ने पहले वन विहार को बूढ़े सिंह देने का प्रस्ताव दिया था, जिसे वन विहार प्रबंधन ने ठुकरा दिया था। इसके बाद अब यह चार साल के युवा सिंहों का जोड़ा भेजा जा रहा है, जो स्थानीय प्रजनन कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इसके बदले में, वन विहार ने बांधवगढ़ नेशनल पार्क से लाए गए बाघों का जोड़ा भेजा है। इन बाघों की उम्र क्रमशः सात और छह साल है।

अब तक वन विहार में 3 सिंह

इस समय वन विहार में तीन सिंह हैं-नर सत्या और दो मादा सिंह, गंगा और नंदी। यह सिंह नंदन कानन चिड़ियाघर से लाए गए थे। अब नए सिंहों के आने से इनकी संख्या बढ़कर पांच हो जाएगी। डिप्टी डायरेक्टर एस.के. सिन्हा के अनुसार, इस नए जोड़े के दीदार के लिए प्रबंधन जल्द ही तारीख तय करेगा, हालांकि यह उम्मीद की जा रही है कि लोग इन्हें नए साल के बाद देख सकेंगे।

ब्रीडिंग प्रोग्राम को मिलेगा बढ़ावा

मध्यप्रदेश सरकार और वन विहार प्रशासन लंबे समय से गिर के सिंहों को लाने के प्रयास कर रहे थे। गुजरात से आए इस नए सिंह के जोड़े से पार्क में प्रजनन कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा। मादा सिंह गंगा को नया साथी मिलेगा, जबकि मादा सिंह नंदी को भी साथी मिलेगा। इस कदम से इन-ब्रीडिंग (अर्थात एक ही परिवार के भीतर प्रजनन) को रोका जा सकेगा, जो कि प्रजातियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

आखिरकार, गुजरात ने दिया साथ

2006 से गिर के सिंहों को लाने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन विभिन्न कारणों से यह कार्य पूरा नहीं हो सका था। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देशों के बावजूद गुजरात वन विभाग और चिड़ियाघर प्रबंधन ने पहले युवाओं के बदले बूढ़े सिंह देने की पेशकश की थी, लेकिन वन विहार ने इसे ठुकरा दिया था।

अब 16 साल बाद, गुजरात वन विभाग ने अपना रुख बदलते हुए चार साल के युवा सिंह भेजने का फैसला किया है। इन सिंहों के आने से वन विहार में न केवल सिंहों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि यह ब्रीडिंग प्रोग्राम को भी गति देगा, जिससे मध्यप्रदेश की जैव विविधता को भी फायदा होगा।

वन विहार के लिए नया अध्याय

गुजरात से आने वाले सिंहों के इस नए जोड़े से वन विहार नेशनल पार्क में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। इससे न केवल पर्यटकों को नए जानवरों के दीदार का अवसर मिलेगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

वन विहार प्रबंधन द्वारा उठाए गए इस कदम से यह साफ है कि पार्क का उद्देश्य न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण केंद्र बनना है, बल्कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों और जीवों की सुरक्षा और प्रजनन को बढ़ावा देना भी है।

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