MP News: मध्य प्रदेश अंशकालीन कर्मचारी DPI का करेंगे घेराव, चतुर्थ श्रेणी की नियमित भर्तियों का मुद्दा
Bhopal MP News: मध्य प्रदेश में अंशकालीन कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी मोर्चा ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का घेराव करने का निर्णय लिया है।
यह कदम कर्मचारियों द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर उठाया जा रहा है, जिनका समाधान सरकार द्वारा समय पर नहीं किया गया है।

क्या है मामला?
मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के मुताबिक, नवंबर 2022 में पशुपालन विभाग ने अंशकालीन कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी का दर्जा देने का नोटिफिकेशन जारी किया था। लेकिन, दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद इस आदेश का पालन नहीं हुआ है। परिणामस्वरूप, अंशकालीन कर्मचारियों को अभी भी केवल 5,000 रुपए मासिक वेतन पर काम करना पड़ रहा है।
DPI द्वारा जारी आदेश और असमानता
इसके अलावा, DPI ने 2 अक्टूबर 2024 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें मुख्य रसोईया, सहायिका, सुरक्षा कर्मियों और भृत्यों को कलेक्टर दर पर भुगतान करने की बात की गई थी। हालांकि, यह लाभ सिर्फ उत्कृष्ट और मॉडल स्कूलों के अस्थाई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक ही सीमित रखा गया है, जिससे बाकी कर्मचारियों को इससे वंचित कर दिया गया।
चतुर्थ श्रेणी की नियमित भर्तियों का मुद्दा
शर्मा ने यह भी कहा कि पिछले 20 वर्षों से चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित भर्तियां नहीं हुई हैं और अधिकांश पद आउटसोर्स कर दिए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, कर्मचारियों को कम वेतन और असुरक्षित रोजगार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पिछले एक साल से अंशकालीन कर्मचारियों ने संगठित होकर अपनी मांगों को उठाया है और शासन स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा भी शुरू हो गई है।
घेराव की चेतावनी
यदि सरकार और DPI के आदेशों का पालन नहीं किया जाता है, तो स्कूलों और छात्रावासों के अंशकालीन कर्मचारी, एसएमडीसी के भृत्य, रसोईया, चौकीदार और सहायिका मिलकर DPI का घेराव करेंगे। इन कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण वे मजबूर होकर इस आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं।
यह आंदोलन इस बात का संकेत है कि प्रदेश में आउटसोर्स और अस्थाई कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों के इस संघर्ष के परिणामस्वरूप, सरकार पर दबाव बन सकता है कि वह अपने आदेशों का पालन कर उचित न्याय प्रदान करे और कर्मचारियों को उनके कानूनी अधिकारों का सम्मान मिले।












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