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MP News: मध्य प्रदेश के इस शहर में अब भीख लेना और देना दोनों पड़ेगा बहुत महंगा, कलेक्टर ने जारी किया बड़ा आदेश

Bhopal Begging Ban News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह द्वारा जारी किए गए नए आदेश के तहत अब भीख मांगना और भीख देना दोनों को अपराध की श्रेणी में डाला गया है। यह कदम कलेक्टर आशीष सिंह की इंदौर में शुरू की गई पहल के बाद उठाया गया है, जिससे भीख मांगने को लेकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है नया आदेश?

भोपाल में अब कोई भी व्यक्ति अगर भीख मांगता है या भीख देता है, तो उसके खिलाफ BNSS की धारा 163 के तहत कानूनी कार्यवाही की जाएगी। यह आदेश शहर के सभी चौक-चौराहों, सड़कों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों, और सार्वजनिक स्थानों पर लागू होगा। इस आदेश का उद्देश्य भोपाल शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में भीख मांगने की समस्या पर रोक लगाना है, जो शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और सार्वजनिक शांति को बाधित करती है।

Begging is now a crime in MP Bhopal Collector Kaushalendra Vikram Singh issued order

प्रशासन की चिंता और आदेश का कारण

कलेक्टर ने इस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि बहुत से भिखारी नशे में लिप्त होते हैं और अनैतिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं। प्रशासन को कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें यह भी बताया गया कि भीख मांगने की आड़ में अपराधिक गिरोह भी काम कर रहे हैं। कई भिखारी ऐसे होते हैं जिनका क्रिमिनल रिकॉर्ड होता है और वे गलत संगत में पड़कर नशे की लत में शामिल होते हैं, जिससे शहर में सुरक्षा और शांति का माहौल प्रभावित हो रहा है।

किसे होगा नुकसान?

यह आदेश केवल उन व्यक्तियों को ही प्रभावित नहीं करेगा जो भीख मांगते हैं, बल्कि जो लोग भीख देंगे उन्हें भी इसके तहत अपराधी माना जाएगा। आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति से भीख खरीदना भी अपराध होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोग भीख देने से बचें, जिससे भिखारियों को आर्थिक मदद न मिल सके और वे इस पर निर्भर न रहें।

क्यों जरूरी था यह कदम?

कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह के अनुसार, भीख मांगने वाले लोग अक्सर ट्रैफिक सिग्नल, चौक-चौराहे, धार्मिक स्थलों, और पर्यटन स्थलों पर जमा होते हैं, जिससे ट्रैफिक बाधित होता है। इसके अलावा, यह देखा गया है कि कई भिखारी बाहर से आकर भोपाल में भीख मांगते हैं, जो शहर की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हैं। प्रशासन की मंशा है कि इस प्रकार के असामाजिक तत्वों से निजात पाकर शहर में सुरक्षा और शांति बनाए रखी जा सके।

आदेश का प्रभाव

यह आदेश भोपाल के सभी कस्बों और गांवों तक लागू होगा, जिससे भीख मांगने के खिलाफ एक कठोर कदम उठाया गया है। कलेक्टर का कहना है कि अब से भोपाल शहर में भीख मांगने की आगामी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने भोपाल कलेक्टर के आदेश पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने भोपाल कलेक्टर द्वारा जारी किए गए भीख मांगने और देने पर आधारित आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कई अहम सवाल उठाए हैं। उन्होंने कलेक्टर के आदेश का स्वागत करते हुए इसे सुखद बताया, लेकिन साथ ही भिक्षावृत्ति के बड़े स्तर पर चलने वाली सिस्टमेटिक भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए हैं।

क्या कहा केके मिश्रा ने?

केके मिश्रा ने अपने बयान में कहा कि, "निःसंदेह कलेक्टर का आदेश भोपाल में भीख मांगने के खिलाफ एक सकारात्मक कदम है, लेकिन वहीं भोपाल में एक-दो रुपये नहीं, बल्कि करोड़ों की भिक्षावृत्ति चल रही है। यहां यह सवाल उठता है कि, जो लोग भिखारियों से सामान खरीदते हैं, क्या उनका इस बड़े भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना है?"

उन्होंने यह भी कहा कि भिक्षावृत्ति की आड़ में एक बड़ी डील हो रही है, जिसे परोक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बहुत बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। उनका यह कहना है कि कलेक्टर के आदेश में भी भिखारियों से सामान खरीदने को अपराध माना गया है, लेकिन सवाल यह है कि यह बड़े स्तर पर चलने वाला भ्रष्टाचार क्यों नहीं रुक रहा?

भ्रष्टाचार और भिक्षावृत्ति का बड़ा खेल

केके मिश्रा ने यह भी सवाल उठाया कि, "भोपाल में भिखारियों से जो सामान खरीदा जा रहा है, वह कहीं न कहीं एक बड़े भ्रष्टाचार का हिस्सा है। क्या प्रशासन उन बड़े नेताओं या व्यापारियों पर कार्रवाई करेगा जो भिखारियों से सामान खरीदकर अपनी काली कमाई को छिपाने का काम करते हैं?"

उन्होंने यह भी कहा कि, "यह सिर्फ भिक्षावृत्ति के छोटे पैमाने पर नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। ये बड़े पैमाने पर हो रहा खेल आधिकारिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में है, फिर भी क्यों नहीं इसे रोका जा रहा?"

सिस्टमेटिक भ्रष्टाचार पर सवाल

कांग्रेस नेता ने यह बात भी उठाई कि यदि भिक्षावृत्ति की आड़ में कोई बड़ा खेल चल रहा है, तो वह व्यक्तिगत स्तर पर भिखारियों से सामान खरीदने से कहीं ज्यादा गंभीर समस्या है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि कलेक्टर और प्रशासन को इस बड़े स्तर के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए और ठोस कदम उठाने चाहिए।

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