Ground Report: एमपी के इस गांव को नहीं मिलता सरकारी योजनाओं का लाभ, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप
Satna News: मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक ऐसा भी गांव हैं, जहां के लोगों को प्रदेश और केंद्र सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीण अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों का 35 सालों से चक्कर लगाते रहे, लेकिन इनकी समस्या का निस्तारण अब तक नहीं हो सका। वन इंडिया हिंदी की टीम जब गांव पहुंची तो लोगों ने इसकी वजह हैरान कर देने वाली बताई है।
दरअसल टोस जल विद्युत परियोजना बकिया बराज के लिए वर्ष 1990- 91 में रामपुर बघेलान क्षेत्र के 44 गांव के करीब 5000 किसानो से जमीन अधिग्रहण कर ली थी। खोहर गांव उन 44 गांवों में से एक है जहां के ग्रामीणों ने सरकार के एक आह्वान पर क्षेत्रहित में अपनी जमीनें टोस जल विद्युत परियोजना बकिया बराज के निर्माण के लिए दे दी थी।

लेकिन खोहर वामियों की पीड़ा इन सबसे अलग है। दूसरे डूब प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को प्रशासन कम से कम किसान और यहां के निवासी मानते हुए उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ तो देती है। लेकिन खोहर गांव के ग्रामीणों को यह भी नसीब नहीं है। करण की खोहर अब तक सरकारी दस्तावेजों में राजस्व गांव के तौर पर ही दर्ज नहीं है।
Recommended Video
बकिया बराज के निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों की बेकरारी व्यवस्था की नाफिक्री के कारण बढ़ती जा रही है। उनकी समस्याओं की न तो कोई सुध ले रहा है और बेफिक्र अधिकारी सरकार के आदेत के बाद भी हाथ पर हाथ परे बैठे है। जिसके चलते अधिग्रहित किये गये 44 गांव के करीब 2 हजार किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
उनकी समस्या के निदान के लिए अफसर कितने संजीदा है। इसका अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि कोटर और रामपुर तहसील के अलावा सिरमौर स्थित टोंस हाइडल प्रोजेक्ट कार्यालय के बीच चकर घिन्नी बने किसानों के लिए बीते कई सालों में सरकार द्वारा की जा रही घोषणाएं अब तक कागजी ही साबित हुई है।
उल्लेखनीय है कि बकिया बराज में टोस जल विद्युत परियोजना को मूर्तरूप देने के लिए प्रदेश की तत्कालीन काग्रेस सरकार ने वर्ष 1990-91 में रामपुर बगलान क्षेत्र के 44 गावों के तकरीबन 5 हजार किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। सरकार का अनुमान था कि इस परियोजना के लिए 282.5 मीटर बांध बनाने की आवश्यकता है और इसी अनुरूप जमीनों का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन जब परियोजना ने आकार लिया तो पाया गया कि 280 हजार मीटर की उचाई पर्यात है। बाथ की उचाई 2 मीटर घट जाने से लगभग 2 हजार किसानों की अधिग्रहित जमीन का एक बड़ा हिस्सा खूब क्षेत्र से बाहर आ गया। ऐसे में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह ने बांध की उचाई घटने से डूव क्षेत्र के बाहर हुई जमीन को किसानों को वापस लौटाने का निर्णय लिया और आदेश जारी किए। हालंकि जमीनों को अधिग्रहित कराने वाली सरकार ने डूब क्षेत्र से बाहर हुई जमीन को लौटाने के आदेश तो जारी किए लेकिन जमीन वापसी की प्रक्रिया पूरी नहीं करा सकी।
प्रदेश में भाजपा की सरकार आई तो पुन यह समस्या सरकार के सामने रखी गई। किसानों ने आंदोलन किए तो वर्ष 2007 में जन दर्शन कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से मुलाकात कर आश्वस्त किया कि जमीन वापिसी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। चौहान के निर्देश पर जमीन वापिसी की प्रक्रिया शुरू तो हुई लेकिन यह प्रक्रिया अफसरशाही के कुचक में ऐसी कसी कि वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अब तक किसानों को जमीनों के पटे् नहीं मिल सके।
इस मामले में टोस हाइड्ल प्रोजेक्ट बकिया बराज संघर्ष समिति ने कई मर्तबा आंदोलन भी किया लेकिन उन्हें हर बार आश्वासन ही मिल सका है। इन दिनों पदेश के किसानों की समस्याओं को संवेदनशीलता से निराकृत कर रहे मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से स्थानीय किसानों को आस है कि वे इस मामले को संजीदगी से लेकर डेढ़ दशक से अधिक समय से संघर्षात किसानों को उनकी जमीन के पटे् देकर उन्हें राहत देंगे।
इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने तीन मर्तबा जमीन लौटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। वर्ष 2007 में की गई घोषणा 2011 में उनके द्वारा दिए आदेश के बाद भी अब किसानों की समस्या निराकृत नहीं हुई तो स्थानीय किसानों ने टोस हाइड्रल प्रोजेक्ट बकिया बराज सघर्ष समिति के बैनर तले समिति के संयोजक कमलेंद्र सिंह कमलू व समिति अध्यक्ष अवधेश सिंह के नेतृत्व में आंदोलन किया। सांसद गणेश सिंह ने भी लगातार इस मामले में क्षेत्रीय किसानों के हित में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौहान से चचर्चा करते रहे जिसके बाद चौहान ने वर्ष 2016 से वर्ष 2018 के बीच दो मर्ता किसानों को पट्टा वितरण करने के लिए आदेश दिया। लेकिन टोस हाइइल प्रोजेक्ट के अलावा सबंधित विभाग के अधिकारियों की उदासीनता अब तक बनी हुई है।
समिति पदाधिकारी ने वन इंडिया हिंदी के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार से सवाल उठाया कि जब डूब क्षेत्र से बाहर हुई जमीन की मुआवजा राशि भी किसानों से डीडी के जरिए सरकार ने जमा कर लिया गया है तो फिर उन्हें मालिकाना हक देने में सरकार को आपत्ति क्योंहै।
प्रभावित किसानों ने यह सवाल भी उठाया की क्या वर्तमान व्यवस्था में अधिकारी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को ताबाजों नहीं दे रहे हैं तो फिर उनका हक कौन दिलाएगा किसानों का यह सवाल लाजिमी है क्योंकि 17 साल पहले किसानों के साथ किए गए मुख्यमंत्री के आदेश को अधिकारी अब तक अमली जामा नहीं पहन सके हैं।
-
Iran Israel War: 'भारत युद्ध रुकवा सकता है', खामेनेई के दूत ने कही ऐसी बात, टेंशन में ट्रंप -
Rajat Dalal Caste: Bigg Boss 18 फेम रजत दलाल किस जाति से हैं? शेरवानी में गंगा किनारे रचाई शादी, दुल्हन कौन? -
Silver Rate Today: चांदी फिर हुई सस्ती, अचानक 11,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 100 ग्राम सिल्वर का रेट -
ट्रंप ने सऊदी प्रिंस का उड़ाया मजाक, की बेदह गंदी टिप्पणी, क्या टूट जाएगी अमेरिका-सऊदी अरब की दोस्ती? -
3 शादियां कर चुकीं 44 साल की फेमस एक्ट्रेस ने मोहनलाल संग शूट किया ऐसा इंटीमेट सीन, रखी 2 शर्तें और फिर जो हुआ -
Iran Vs Israel: 'सभी देश भुगतेंगे परिणाम', शांति प्रयासों के बीच ईरानी विदेश मंत्री की बड़ी चेतावनी -
37 साल से लापता है ये फेमस एक्ट्रेस, गुमनामी में लुट गया सबकुछ, ऋषि कपूर पर लगाया था ऐसा आरोप -
VIDEO: 10 साल की दुश्मनी! बीच मैदान पर एक झप्पी और सब खत्म! विराट-कुंबले का वीडियो देख दुनिया दंग -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच सोना में भारी गिरावट, अबतक 16000 सस्ता! 22k और 18k का अब ये है लेटेस्ट रेट -
LPG Price Today Delhi NCR: दिल्ली में गैस सिलेंडर महंगा, 14.2Kg का नया रेट क्या है? जानें आज का ताजा भाव -
Kal Ka Match Kon Jeeta 28 March: कल का मैच कौन जीता- RCB vs SRH -
Iran Vs America War: कब खत्म होगा अमेरिका ईरान युद्ध, ट्रंप के विदेश मंत्री ने बता दी तारीख












Click it and Unblock the Notifications