'94 मूर्तियां, प्राचीन शिलालेख, सोने, चांदी के सिक्के...', धार भोजशाला को लेकर ASI की रिपोर्ट में बड़ा दावा
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने धार जिले में स्थिति भोजशाला की साइंटिफिक स्टडी पूरी करने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अदालत ने मामले में सुनाई की अगली तरीख 22 जुलाई तय की है। एसआई की रिपोर्ट को लेकर दावा किया जा रहा है कि यहां 94 से भी अधिक मूर्तियां और बड़ी संख्या में सोने, चांदी और स्टील के सिक्के मिले हैं। ऐसे में कथित रूप से दावा ये भी किया जा रहा है कि विवादित परिसर में मंदिर होने के संकेत मिल रहे हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सोमवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर पर अपनी वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। एएसआई की रिपोर्ट को लेकर दावों के बीच भोजशाला परिसर और इसके आसपास की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

एसपी धार मनोज कुमार सिंह का कहना है, ''हाईकोर्ट के निर्देशों के पालन में एएसआई द्वारा भोजशाला की गहन जांच की गई है और आज रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई है। हमने धार शहर में शांति बनाए रखने की कोशिश की है, हमने एक जारी किया है।"
एसपी ने आगे कहा, "धार के सभी निवासियों को सलाह दी गई है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें, सोशल मीडिया पर कोई भी फर्जी पोस्ट न डालें जिससे समाज में अशांति, अफवाहें फैलें और सांप्रदायिक माहौल खराब हो। पूरा मामला अदालत में लंबित है और सुनवाई चल रही है इस पर अभी सुनवाई होनी है। हमने यह सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं कि कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति न हो। हम सोशल मीडिया पर नजर रख रहे हैं और अफवाह फैलाने वालों के साथ संपर्क में हैं।"
एएसआई की रिपोर्ट को लेकर क्या है दावा?
भोजशाला को लेकर एएसआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वेक्षण के दौरान चांदी, तांबे, एल्यूमीनियम और स्टील से बने कुल 31 सिक्के मिले, जो विभिन्न कालखंडों के हैं। ये सिक्के इंडो-ससैनियन (10वीं-11वीं सदी), दिल्ली सल्तनत (13वीं-14वीं सदी), मालवा सल्तनत (15वीं-16वीं सदी), मुगल (16वीं-18वीं सदी), धार राज्य (19वीं सदी) और (19वीं-20वीं शताब्दी) यानी ब्रिटिश काल के हैं।
प्राचीन शिलालेख
भोजशाला में मिली प्राचीन संरचनाओं में संस्कृत और प्राकृत शिलालेख भी शामिल हैं। एक शिलालेख में परमार वंश के राजा नरवर्मन (जिन्होंने 1094-1133 ईस्वी के बीच शासन किया) का उल्लेख है। अन्य शिलालेखों में खिलजी शासक महमूद शाह का उल्लेख है, जिसने एक मंदिर को मस्जिद में बदल दिया था। जबकि अन्य शिलालेखों में खिलजी शासक महमूद शाह का उल्लेख है, जिसने एक मंदिर को मस्जिद में बदल दिया था।
सर्वे में मिलीं 94 मूर्तियां
हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई की ओर से किए सर्वे में कुल 94 मूर्तियां, मूर्तियों के टुकड़े और वास्तुशिल्प तत्व भी सामने आए। प्राचीन मूर्तियों की संरचना की बात करें तो मूर्तियां बेसाल्ट, संगमरमर, शिस्ट, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से बनी हैं। वे गणेश, ब्रह्मा, नरसिम्हा, भैरव, अन्य देवी-देवताओं, मनुष्यों और जानवरों जैसे देवताओं की आकृतियां दर्शाती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंसानों और जानवरों की कई तस्वीरे देखी गईं। ये कलाकृतियां और मूर्तियां परिसर में उस जगह भी मिली हैं, जहां अब मस्जिदें बनी हुई हैं। भोजशाला के अंदर मिली मूर्तियों में जानवरों की आकृतियां जैसे शेर, हाथी, घोड़े, कुत्ते, बंदर, सांप, कछुए, हंस और पक्षी शामिल हैं। पौराणिक आकृतियों में कीर्तिमुख और व्याल (मिश्रित जीव) के विभिन्न रूप शामिल हैं।












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