MP के मंत्री ने आचार्य विद्यासागर को बताया दुर्लभ संत, कहा भारत रत्न की उपाधि मिलना चाहिए
Madhya Pradesh के नगरीय विकास एवं आवास ने सागर जिले के खुरई में जैन संतों के एक कार्यक्रम में कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज दुर्लभ संत हैं। उनका आर्शीवाद लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जाते हैं। मेरा मानना है कि उन्हें भारत रत्न की उपाधि मिलना चाहिए। मंत्री सिंह ने कहा कि आत्मा के प्रकाशयुक्त के रूप में हमारे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज अस्त्त्विमान हैं, उन्हें भारतरत्न की उपाधि मिलना चाहिए ऐसा मैं मानता हूं। उन्होंने कहा कि आज देश की जैन समाज ने संस्कृति, संस्कारों और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अपना और देश का विकास किया है। धर्म पर चलने वाला व्यक्ति ही सफल होता है।

मप्र के खुरई में संतशिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के निर्यातक श्रमण मुनिश्री संभवसागर महाराज के ससंघ पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम में शिरकत कर श्रीफल भेंट कर संतों का आर्शीवाद लिया। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने खुरई में 6 एकड़ भूमि पर तीन करोड़ रुपए लागत से एक विशाल गौशाला निर्माण की घोषणा की है। दो हजार गौवंश की क्षमता वाली यह गौशाला तीन महीने में बन कर तैयार हो जाएगी। मंत्री भूपेंद्र सिंह ने पिच्छिका परिवर्तन समारोह को जीवदया और जीवरक्षा का प्रतीक आयोजन बताया है। मंत्री सिंह ने आचार्यश्री विद्यासागर महाराज को भारतरत्न दिए जाने की मांग भी मंच से रखी।

कामन सिविल कोर्ड की आश्यकता बताई
मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि आज देश में जाति असंतुलन दूर करने और देश को विभाजित करने वाली ताकतों को खत्म करने की दिशा में कामन सिविल कोड ;समान नागरिक संहिताद्ध की आवश्यकता है, ताकि देश में हरेक नागरिक के कानूनी अधिकार और कर्तव्य समान रहें। इसी कार्यक्रम में संत मुनि संभवसागर ने मंत्री सिंह को मंच पर बुलाकर आशीर्वाद दिया और उनसे विचार-विमर्श भी किया। जैन समाज के प्रतिनिधियों ने मंच से मंत्री सिंह का सम्मान का कार्यक्रम रखा था, लेकिन सिंह ने यह कहते हुए सम्मान कराने से इंकार कर दिया कि जिस मंच पर तपस्वी और पूज्य जैनमुनि विराजमान हों उस पावन मंच से मैं अपना सम्मान नहीं करा सकता।

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दानवीर डॉ. हरीसिंह गौर को भारत रत्न दिलाने चल रही मुहीम
सागर से महान शिक्षाविद, दानवीर डॉ. हरीसिंह गौर को भारत रत्न दिलाने की मांग उठती रही है। बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाके में आजादी के पहले अपनी सारी संपति दान कर राष्ट्रीय स्तर का विश्वविद्यालय स्थापित करने वाले डॉ. हरीसिंह गौर को सागर सहित मप्र और देशभर के अलग-अलग हिस्सों से उन्हें भारत रत्न देने की अलग-अलग मंचों से की जाती रही है। इनको लेकर सत्तापक्ष की तरफ से अभी तक आश्वासन मिलते रहे हैं। अधिकांश समय सरकार के मंत्री डॉ. गौर को भारत रत्न के मुद्दे पर चुप्पी साधे रहते हैं।












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