MP News: मध्य प्रदेश में शानदार जीत के बाद NDA सरकार के मोदी मंत्रिमंडल में एमपी के 5 सांसदों को मिली जगह
MP News: नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में मध्यप्रदेश से शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेंद्र खटीक, दुर्गादास उईके और सावित्री ठाकुर को जगह मिली है। मंत्री पद की शपथ लेने वाले पांचों सांसदों में दुर्गादास उईके और सावित्री ठाकुर दो नाम चौंकाने वाले हैं।
दरअसल, सावित्री एनजीओ से जुड़ने के बाद राजनीति में प्रवेश किया। वहीं, बैतूल से लगातार दूसरी बार सांसद बनने और अब केंद्र में पहली बार मंत्री बनने वाले दुर्गादास उईके ने अपनी शिक्षकीय नौकरी को छोड़कर राजनीति में कदम रखा है।

मध्यप्रदेश में कमलनाथ की 15 महीने की सरकार को गिराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह की युगलबंधन अब केंद्र की राजनीति में नजर आएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने तीनों बेटियों को में लिया था गोद
पहली बार सांसद बनते ही शिवराज सिंह चौहान ने तीनों बेटियों को गोद में लिया था। वे विदिशा संसदीय सीट से छठी बार चुने गए हैं और इस बार उन्होंने 8.21 लाख वोटों की भारी जीत दर्ज की है। उन्होंने पहले से छह बार विधायक और चार बार प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। जिन सीटों से वे प्रतिनिधित्व करते हैं, वहां से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी सांसद रह चुकी हैं।
दर्शन शास्त्र से एमए शिवराज सिंह चौहान पहली बार केंद्र में मंत्री बने हैं। 1972 में आरएसएस से जुड़े थे। छात्र संघ के अध्यक्ष से राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी और संगठन में भी काफी समय तक सक्रिय रहे। शिवराज सिंह ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने जीवन का एक संवेदनशील किस्सा साझा किया था।
उन्होंने बताया कि जब वे सांसद बनकर विदिशा संसदीय क्षेत्र पहुंचे थे, तो उन्हें वहां तीन अनाथ बच्चियां मिलीं। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चियों में एक की उम्र 6 महीने है, दूसरी डेढ़ साल की और तीसरी बेटी 3 साल की है। उनकी मां की मौत हो चुकी है, जबकि उनका पिता जेल में है। फिर वे तीनों बच्चियों को लेकर घर गए और उनका मां-पिता की तरह लालन-पालन किया। उन्हें पढ़ाया-लिखाया और शादी भी की। शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा क्षेत्र की 7 बेटियों और दो बेटों को दत्तक पुत्र मानकर पालन-पोषण किया है।
पिता के निधन के बाद राजनीति में आए थे सिंधिया
ज्योतिरादित्य सिंधिया को पिता के निधन के बाद अचानक राजनीति में आना पड़ा था। गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर केंद्रीय मंत्री की शपथ ली। वर्ष 2001 में पिता माधवराव सिंधिया के आकस्मिक निधन के चलते उन्हें राजनीति में आना पड़ा था। 2007 में पहली बार केंद्रीय मंत्री बने थे। गुना से पांचवीं बार सांसद चुने गए सिंधिया की ये पारिवारिक सीट है।
इस सीट से उनकी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया भी सांसद रह चुके हैं। अमेरिका के हार्वर्ड कॉलेज से ग्रेजुएशन, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए डिग्री हासिल करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बैंकर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी।
मंत्री वीरेंद्र खटीक ने साइकिल पंक्चर बनाकर की पढ़ाई
साइकिल पंक्चर बनाकर की पढ़ाई, एबीवीपी से जुड़कर राजनीति में आए। बुंदेलखंड से आने वाले डॉ वीरेंद्र खटीक 8वीं बार सांसद बने हैं। एससी खटीक समाज से आने वाले खटीक ने 1977 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर राजनीति में कदम रखा। वे पिछली सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
1996 में पहली बार सांसद बने वीरेंद्र खटीक सागर और टीकमगढ़ दोनों लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वीरेंद्र कुमार 17वीं लोकसभा में प्रोटेम स्पीकर चुने गए थे। वे इतने सरल और सहज हैं कि जब वे सागर सांसद थे तो अपनी पुरानी स्कूटर से बिना सुरक्षा घूमते थे।
पहली बार मंत्री बने बैतूल सांसद दुर्गादास उईके
पहली बार मंत्री बने दुर्गादास टीचर की नौकरी छोड़कर आए थे राजनीति में। 29 अक्टूबर 1963 को बैतूल के मीरापुर में जन्मे दुर्गादास के पिता का नाम सूरत लाल उईके और उनकी मां का नाम रामकली उईके हैं। दुर्गादास दूसरी बार बैतूल से सांसद चुने गए हैं। पहले वे जनजातीय कार्य मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे हैं।
खंडवा से बीएड की पढ़ाई करने वाले दुर्गादास टीचर थे। टीचर की नौकरी छोड़कर वे राजनीति में सक्रिय हुए। नशामुक्ति अभियान से संबंधित गतिविधियों में शामिल रहे हैं। साथ ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी लंबे समय तक जुड़े रहे। आदिवासियों में उनकी पकड़ को देखते हुए ही संघ के कहने पर ही उन्हें 2019 में बैतूल से टिकट मिला था। 24 अक्टूबर 1990 को उनकी ममता उईके से शादी हुई। परिवार में एक बेटा व दो बेटियां हैं। उन्हें ऐतिहासिक प्राचीन धार्मिक स्थलों की सैर, गीत, संगीत, भजन, आदि सुनना काफी पसंद है।
क्यों मिला मौका : बैतूल मप्र का सेंटर पॉइंट माना जाता है। दुर्गादास को मंत्री बनाकर मोदी ने प्रदेश के महाकौशल और निमाड़ दोनों अंचलों की आदिवासी राजनीति को साधने की कोशिश की है। वे नर्मदा पट्टी से आते हैं।
12वीं पास धार की भाजपा सांसद सावित्री ठाकुर ने अपने दम पर राजनीति में मुकाम बनाया है। पिता राज्य वन विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। पति तुकाराम ठाकुर किसान है। मायके और ससुराल में कोई भी राजनीति में नहीं था। सावित्री राजनीति में आने से पहले एनजीओ में को-ऑर्डिनेटर थीं। इसी दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आईं। पढ़ी-लिखी महिला आदिवासी होने का लाभ सावित्री को मिला।
उमंग सिंघार को चुनाव हरा चुकी है सावित्री
वर्ष 2004 में सावित्री जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं। उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का मौका मिला। 2014 में भाजपा ने धार लोकसभा से प्रत्याशी बनाया। सावित्री ने इस चुनाव में कांग्रेस के उमंग सिंघार को हराया। उमंग की बुआ जमुना देवी डिप्टी सीएम रह चुकी हैं। सावित्री ठाकुर को उद्योग पर बनी संसदीय समिति का सदस्य बनने का अवसर मिला।
2019 में उनका टिकट काटकर भाजपा ने छतर सिंह दरबार को प्रत्याशी बनाया था। भाजपा ने इस बार छतर का टिकट काटकर सावित्री को मौका दिया और वे दूसरी बार संसद में पहुंच गईं। उन्होंने कांग्रेस के राधेश्याम मुवैल को 2.18 लाख वोट के अंतर से हराया है। सावित्री कहती हैं कि मैं राजनीति में आउंगी, ऐसा सोचा भी नहीं था। एनजीओ में सक्रियता के चलते आरएसएस से जुड़ी और फिर मेरी राजनीति में इंट्री हुई। सावित्री के दो बेटे हैं।












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