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स्मार्ट सिटी लिस्ट में यूपी का डब्बा गोल होने के कारण!

लखनऊ। स्मार्ट सिटी परियोजना की पहली लिस्ट आने के साथ ही सियासत की खातिर सियासतदानों को मुद्दा मिल गया, क्योंकि पहले 20 शहरों की सूची में यूपी का डब्बा गोल है। लेकिन इसके कारण क्या रहे, यह हमने पूछा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी से। यह पूछना इसलिये जरूरी था, क्योंकि स्वयं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के संसदीय क्षेत्र यूपी में हैं, फिर ऐसा क्यों हुआ?

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Lucknow

दरअसल सवाल तैयार होने लगे कि आखिर क्यों यूपी के साथ मुंहदेखा व्यवहार किया जाता है। क्यों बार-बार यूपी को नजरंदाज किया जाता है। जिस पर हमने बात की यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेई से। आईये जानते हैं उन्होंने यूपी के किसी भी शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल न होने के पीछे किस वजह का हवाला दिया।

सवाल- स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत यूपी के किसी भी शहर को शामिल नहीं किया जबकि पीएम खुद यूपी से ही सांसद है। क्या कहना है इस पर आपका?

जवाब- प्रधानमंत्री जी से इसका कोई लेना देना नहीं है। इसमें दो स्तरीय प्रतिस्पर्धा थीं। पहली तो प्रतिस्पर्धा थी राज्य की। जिसमें राज्य से बारह नाम चयनित हुए। फिर दिल्ली में इनकी दो तीन बैठकें हुईं। मुख्य नगर अधिकारी, नगर प्रमुख या चेयरमैन की। इनको डीपीआर बनाने के लिए कंपनियां एलॉट हुईं। फिर डीपीआर बनके जब दूसरी प्रतिस्पर्धा होनी थी इन 98 शहरों में और 20 चयन होने थे तो पहले 20 चयन हो गए। ये दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश का चयन नहीं हुआ लेकिन इसकी जिम्मेदार तो सूबे की सरकार है। क्यों डीपीआर फिट नहीं बनी।

सवाल- तो किस तरह से स्मार्ट सिटी में यूपी के एक भी शहर के शामिल न होने की वजह आप सपा सरकार को मानते हैं?

जवाब- दूसरी तीसरी क्लास में बच्चे को अगर कुदा दिया जाएगा तो आगे क्या होगा। यही हुआ है। जिस तरह से इन्होंने शहरों का चयन किया और फिर डीपीआर बना नहीं पाए। उस कारण से स्मार्ट सिटी में यूपी के एक भी शहर को जगह नहीं मिल पाई है। बाकी डिटेल मैं पता करूंगा। इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश सरकार दोषी है।

बहरहाल स्मार्ट सिटी की रेस में यूपी के एक भी शहर के न शामिल होने को लेकर बीजेपी ने सपा को दोषी करार दिया है। साथ ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेई ने सपा सरकार के लोगों की बराबरी दूसरी तीसरी क्लास में कुदाकर आगे बढ़ने वाले बच्चों से भी कर दी।

कुल मिलाकर एक दूसरे पर दोष जितना मढ़ते रहिए लेकिन न तो प्रदेश उत्तम ही बन पाया और न स्मार्ट बनने की रेस में ज्यादा देर तक दौड़ पाया। जबकि विकास की खातिर नेतागिरी करने वालों की फौज उत्तर प्रदेश ही तैयार करके देता है। हां ये देखना जरूर दिलचस्प होगा कि इन सभी बातों का असर यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में कितना पड़ता है।

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