पश्चिमी यूपी को फिर दंगों में झोंकने की साजिश

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) मुजफ्फरगर में भड़के दंगों से अब भी उत्तर प्रदेश कांप रहा है। पर उसी इलाके में फिर दंगे के हालात बन रहे हैं। 1 मई की रात कुछ लोग कांधला की तबलीगी जमात में शामिल होने आ रहे थे। उनसे बागपत के पास रेल में झड़प या मारपीट हुई।

बेशक, किसी भी संप्रदाय के लोगों को आपराधिक हिंसा की छूट मिलना या हिंसा के बाद कठोर कानूनी कार्रवाई न करना गलत संदेश देगा। प्रतिक्रिया में दूसरे समुदाय में प्रतिहिंसा का भाव प्रबल होगा।

हंगामा किया

अफसोस कि बड़ौत में भीड़ ने रेलवे स्टेशन घेरा और हंगामा किया। दिल्ली- सहारनपुर रेल मार्ग के कासिमपुर खेरी रेलवे स्टेशन पर भी ट्रेन संचालन को बाधित किया गया और भीड़ ने ट्रेन पर पथराव किया। दिल्ली-शामली रेलमार्ग पूरी तरह से बाधित रहा। चारों ओर हिंसा और उसके कारण भय और आतंक का माहौल।

उग्र भाषण दिए गए

परसो कांधला-बुढ़ाना मार्ग फाटक पर सपा विधायक नाहिद हसन के नेतृत्व में भीड़ ने ट्रेनों को रोका। वहां उग्र भाषण दिए गए, नारे लगाए। भीड़ ने रेलवे स्टेशन पर खड़ी हरिद्वार-बीकानेर एक्सप्रेस पर हमला बोल दिया। जो जहां मिला उसे मारने लगे। इन उग्रवादी तत्वों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी। उनमें कैसे तत्व थे इसका अंदाजा आपको इसी से मिल जाएगा कि पुलिस के जवाब में दूसरी ओर से भी गोली चली। कांधला थाने पर ही धावा बोल दिया गया।

वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार कहते हैं कि कुछ लोग सांप्रदायिक एवं उग्रवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे है। क्या कुछ तत्व इस घटना की आड़ में फिर से सांप्रदायिक हिंसा पैदा करना चाहते हैं? अभी तक एकपक्षीय कार्रवाई रही। दूसरी तरफ के भी कुछ ऐसे तत्व सामने आ गए तो क्या होगा?

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