यूपी: सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से रिकवरी के लिए बने कानून को राज्यपाल ने दी मंजूरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने यूपी सरकार के 'उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेजेज टु पब्लिक ऐंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश-2020' को मंजूरी दे दी है। इसके तहत वसूली से जुड़ी सुनवाई और कार्रवाई के लिए सरकार रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में क्लेम ट्रिब्यूनल बनाएगी। इसके फैसले को किसी भी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। ऐसे में अब प्रदेश में जुलूस, प्रदर्शन, बंदी और हड़ताल के दौरान सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ वसूली का आदेश होते ही उनकी संपत्तियां कुर्क हो जाएंगी और उनके पोस्टर लगा दिए जाएंगे।

यूपी सरकार ने तैयार किया सख्त अध्यादेश

यूपी सरकार ने तैयार किया सख्त अध्यादेश

बता दें, यूपी सरकार ने उपद्रवियों पर कार्रवाई करने के लिए सख्त अध्यादेश तैयार किया है। इसमें क्लेम ट्रिब्यूनल को आरोपियों की संपत्तियां अटैच करने के साथ इन्हें कोई और न खरीद सके इसके लिए पोस्टर और होर्डिंग लगवाने का पूरा अधिकार होगा। 3 महीने में क्लेम ट्रिब्यूनल के समक्ष अपना दावा पेश करना होगा। उपयुक्त वजह होने पर दावे में हुई देरी को लेकर 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा।

आरोपियों को क्लेम आवेदन की प्रति नोटिस के साथ भेजी जाएगी

आरोपियों को क्लेम आवेदन की प्रति नोटिस के साथ भेजी जाएगी

दावा पेश करने के लिए 25 रुपए की कोर्ट फीस के साथ आवेदन करना होगा। अन्य आवेदन के लिए 50 रुपए कोर्ट फीस, 100 रुपए प्रॉसेस फीस देनी होगी। आरोपियों को क्लेम आवेदन की प्रति नोटिस के साथ भेजी जाएगी। आरोपियों के न आने पर ट्रिब्यूनल को एकपक्षीय फैसले का अधिकार होगा। ट्रिब्यूनल संपत्ति को हुई क्षति के दोगुने से अधिक मुआवजा वसूलने का आदेश नहीं कर सकेगा, मुआवजा संपत्ति के बाजार मूल्य से कम भी नहीं होगा। अध्यादेश के मुताबिक, ट्रिब्यूनल में अध्यक्ष के अलावा एक सदस्य भी होगा। यह सहायक आयुक्त स्तर का अधिकारी होगा। ट्रिब्यूनल नुकसान के आकलन के लिए क्लेम कमिश्नर की तैनाती कर सकेगा। वह क्लेम कमिश्नर की मदद के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक सर्वेयर भी नियुक्त कर सकता है, जो नुकसान के आकलन में तकनीकी विशेषज्ञ की भूमिका निभाएगा।

कोर्ट ने कार्रवाई पर उठाया था सवाल

कोर्ट ने कार्रवाई पर उठाया था सवाल

बता दें कि यूपी में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैलाने व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से शासनादेश के जरिए क्षतिपूर्ति के लिए सक्षम अधिकारी नामित एडीएम ने कार्रवाई की थी। इसे कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसपर कोर्ट ने कानून बनाए बिना कार्रवाई पर सवाल उठाया था। इसके बाद राज्य विधि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के दिए निर्देश के क्रम में यूपी प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी के संबंध में विधेयक का ड्राफ्ट तैयार किया। ड्राफ्ट के अध्ययन के लिए शासन स्तर पर एक कमेटी गठित की गई, जिसने पुलिस महानिदेशक व अभियोजन निदेशालय के अधिकारियों से विचार-विमर्श कर 'द यूपी रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश-2020' को अंतिम रूप दिया। कैबिनेट ने इसे शुक्रवार को मंजूरी दी थी, जिसे अब राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की मंजूरी मिल गई है।

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