जेलरों के बगैर यूपी की जेलों में कैदियों का राज

Faizabad Jail
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की जेलों में जहां संख्या से लगभग दोगुना कैदी बंद हैं, वहीं इन जेलों को संभालने के लिए जेलरों की संख्या उतनी भी नहीं है जितनी होनी चाहिए। लोग तो यह भी कहते हैं कि जेलों में 'कैदियों की सत्ता' है। कर्मचारियों की कमी ने प्रदेश की जेलों में कैदियों व जेल के कर्मचारियों की संख्या के अनुपात को बिगाड़ दिया है, जिसके चलते अब जेलों में अब कैदी ज्यादा और उन पर नजर रखने वाले कम हो गए हैं।

सूत्रों का कहना है कि कैदी इसका बड़ा फायदा उठा रहे हैं। जेलों में कैदियों की संख्या निर्धारित संख्या से दोगुना है। यही वजह है कि जेलों में अब अराजकता और निरंकुशता बढ़ गई है। दबी जबान पर लोग यह कहने से गुरेज नहीं कर रहे कि जेल में 'कैदियों की सत्ता' है।

बताया जाता है कि प्रदेश में केवल उन्हीं जेलों में कर्मचारियों की कमी नहीं है जिनकी गिनती खास जेलों में की जाती है। वैसे तो प्रदेश में 65 जेल हैं जिनमें जेलरों के 87 पद हैं। लेकिन इनमें से 30 पद आजकल खाली पड़े हैं। यही कारण है कि ऐटा उरई, हरदोई, प्रतापगढ़, मिजार्पुर फतेहपुर और गाजीपुर जैसी जेलों में जेलर नहीं हैं। जहां जेलों में जेलरों की कमी है वहीं इन जेलों में कैदी ठूंस-ठूंस कर भरे हुए हैं।

यही नहीं, जेलरों की कमी से जूझ रहे विभाग के दो जेलरों आलोक सिंह और शशिकांत को प्रदेश के कारागार मंत्री राजेंद्र चौधरी और राज्य मंत्री अभिषेक मिश्र के घर तैनात किया गया है। इस कमी को पूरा करने के लिए हालांकि, काफी समय से 3000 लोगों की भर्ती की बात कही जा रही है। अगर देखा जाए तो पुलिस विभाग ऊपर से लेकर नीचे तक अपने बड़े अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है।

ऐटा उरई, हरदोई, प्रतापगढ़, मिजार्पुर फतेहपुर और गाजीपुर जैसी जेलों में जेलर नही

प्रदेश में एडीजी का एक पद रिक्त पड़ा है। वहीं डीआईजी के चार पदों पर किसी अधिकारी को नहीं बैठाया गया है। इसी तरह जेल अधीक्षक के 64 पदों में से 28 पद रिक्त चल रहे हैं और एक निलंबित है। डिप्टी जेलरों के वैसे तो 448 पद हैं, लेकिन लगभग आधे 268 पद खाली हैं और सात निलंबित हैं। बंदी रक्षक व प्रधान बंदी रक्षकों के 2029 पद रिक्त है। कैदियों की सेहत की बात की जाए तो जेलों में चिकित्सकों के वैसे तो 134 पद हैं जिनमें से 46 पद खाली हैं। इसी प्रकार 134 फार्मेसिस्ट पदों में से 52 रिक्त हैं।

कारागार मंत्री राजेंद्र चौधरी भी मानते हैं कि प्रदेश की जेलों में बंदी रक्षकों और डिप्टी जेलरों की कमी है। उन्होंने बताया कि जेलों में बंदी रक्षकों व डिप्टी जेलरों की कमी है। इस कमी को पूरा करने व नई भर्ती के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जेलों में 48 हजार कैदियों के लिए स्थान है, जहां लगभग 84,000 कैदी बंद हैं। जेलों में कैदियों की निर्धारित संख्या से दोगुना कैदियों के होने की समस्या नए जिले बनने के कारण खड़ी हुई है, जिसे दूर करने के लिए सरकार एक दर्जन नई जेले बनवा रही है। उन्होंने कहा कि 2014 तक जेलों से जुड़ी हर समस्या हल कर ली जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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