UP Vidhansabha: 43 साल बाद सार्वजनिक हुई मुरादाबाद दंगे की रिपोर्ट, जानिए किसको ठहराया गया दोषी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सदन में मुरादाबाद दंगे की रिपोर्ट पेश की।

Uttar Pradesh Assembly: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1980 में कांग्रेस सरकार के दौरान हुए मुरादाबाद दंगे की जांच रिपोर्ट को विधानसभा में सदन के पटल पर रखा। रिपोर्ट में मुस्लिम लीग के डॉ शमीम खान को दोषी ठहराया गया है। हालांकि इस रिपोर्ट के सदन में आने को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर हमला बोला।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को रिपोर्ट को सदन में सार्वजनिक किया। मुरादाबाद में 43 साल पहले जुम्मे की नमाज के बाद दंगे भड़क उठे थे जिसमें 83 लोगों की जान चली गई थी। इस दंगे की जांच करने वाले एमपी सक्सेना ने अपनी रिपोर्ट में कई तरह के गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसमें सक्सेना ने कहा है कि मुसलमानों को वोट बैंक समझने वालों को हतोत्साहित करना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने मई में ही यह ऐलान किया था कि वह 1980 में हुए दंगों पर न्यायमूर्ति एम पी सक्सेना आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश करेगी जिसमें 83 लोग मारे गए थे। सदन में पेश करने से पहले कैबिनेट से इसकी मंजूरी भी ली गई थी।

सक्सेना उसी वर्ष 1 अगस्त को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। इन्होंने नवंबर 1983 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। लेकिन इसकी सामग्री कभी सार्वजनिक नहीं की गई और इसकी सिफारिशों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

दरअसल , 13 अगस्त 1980 को मुरादाबाद शहर के ईदगाह में शुरू हुई हिंसा संभल, अलीगढ़, बरेली, इलाहाबाद (अब प्रयागराज) और मुरादाबाद के ग्रामीण इलाकों में 1981 की शुरुआत तक जारी रही। साल 1980 में मुरादाबाद के अंदर हुए दंगों में करीब 83 लोगों की जान चली गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

यूपी में जिस वक्त ये दंगे हुए थे उस समय प्रदेश में वीपी सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार थी। मुरादाबाद में हुए इन दंगों की रिपोर्ट जांच आयोग ने नवंबर 1983 में सरकार को सौंप दी थी, लेकिन सरकार ने कभी इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया।

बीजेपी का आरोप है कि साल 1983 में रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश में कई पार्टियों की सरकार सत्ता में आई लेकिन, इस रिपोर्ट को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। इन दंगों के बाद से अभी तक 15 मुख्यमंत्री बने, लेकिन कोई भी सीएम इस रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

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