UP Nikay Chunav 2023: निकाय चुनाव में इस बार बदलेगा Lucknow के वोटरों का मिजाज या पिछला ट्रेंड रहेगा कायम

UP Nikay Chunav में इस बार क्या बदलेगा Lucknow का मिजाज या पुराना ट्रेंड रहेगा बरकरार। दरअसल लखनऊ के लोग निकाय चुनाव की अपेक्षा विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में ज्यादा मतदान करते हैं।

योगी आदित्यनाथ

LMC elections: उत्तर प्रदेश के 37 जिलों में निकाय चुनाव के पहले चरण का मतदान हो रहा है। इन जिलों में यूपी की राजधानी लखनऊ भी शामिल है। लखनऊ में सुबह से ही मतदाताओं में वोटिंग को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। लेकिन सवाल ये है कि क्या इस बार लखनऊवासी पिछले 16 सालों का रिकार्ड तोड़ने में सफल रहेंगे या फिर लखनऊ के लोगों पर वोटिंग के लिए बाहर न निकलने का जो टैग लगा हुआ है वह बना रहेगा। हांलाकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तुलना में लखनऊ में निकाय चुनावों में मतदान हमेशा कम होता रहा है।

2007 के निकाय चुनाव में हुआ था 44 फीसदी मतदान

पिछले निकाय चुनावों में हुए मतदान के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2007 में 44.70% मतदान दर्ज किया गया जो 2012 में 10% गिर गया और नगर निगम की सीमा में कुल मतदाता 34.10% ही मतदान हुआ था। हालांकि 2012 के बाद 2017 में हुए निकाय चुनाव में एक बार फिर मतदान में इजाफा हुआ था। पिछले निका चुनाव में लखनऊ में 4.5% की वृद्धि दर्ज की गई थी जबकि कुल मतदान 38.60% हुआ था।

निकाय चुनाव के बजाए लोकसभा-विधानसभा में ज्यादा वोटिंग

नगर निकाय चुनाव की जगह विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में लखनऊवासी ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। 2022 के राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान लखनऊ नगर की सीमा के तहत पांच निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी 55.8% थी। वहीं विधानसभा के चुनाव से पहले 2019 के लोकसभा चुनावों में लखनऊ निर्वाचन क्षेत्र में 54.7% मतदान हुआ था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नवाबों की नगरी कहा जाने वाले लखनऊ के लोग निकाय चुनाव में कितनी कम दिलचस्पी दिखाते हैं।

दोनों चुनावों में इतने अंतर को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि,

निकाय चुनावों में कम मतदान का सबसे बड़ा कारण राजनीतिक दिग्गजों द्वारा कम प्रचार करना है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक दल राष्ट्रीय नेताओं को साथ लेते हैं और एक ही दिन में कई सार्वजनिक रैलियां करते हैं। इसके ठीक विपरीत नगर निकाय में केवल उम्मीदवार और स्थानीय नेता ही जनसभा करते हैं। इस बार राज्य के सीएम और पूर्व सीएम ने सार्वजनिक रैलियां कीं, लेकिन यह केवल पिछले कुछ दिनों में हुई थी। इसका असर पड़ने की उम्मीद है।

लखनऊ के इन इलाकों में पिछली बार इतनी हुई थी वोटिंग

राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, 2017 में एलएमसी के जोन 4 में निशातगंज, गोमतीनगर, अर्जुनगंज, अहममऊ, पेपरमिल कॉलोनी, पॉलिटेक्निक, हुसेरिया, पत्रकारपुरम, चिनहट, मटियारी, मालसेमऊ और कामता में सबसे कम 35.43 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बाद हजरतगंज, चारबाग, अमीनाबाद, लालबाग, कैसरगंज, गोलागंज, बांसमंडी और नाका जैसे जोन 1 क्षेत्रों में 36.83% मतदान दर्ज किया गया था।

सबसे अधिक निगम के जोन 6 में हुआ था मतदान

वहीं आलमबाग, चंदरनगर, मवैया, सूर्यनगर, देवपुर पारा, तालकटोरा रोड, जय प्रकाश नगर और हरिहर प्रसाद नगर सहित जोन 5 क्षेत्रों में 36.84% मतदान हुआ था जबकि ऐशबाग, मिल रोड, रेलवे कॉलोनी, शास्त्री नगर, गुडशेड रोड के जोन 2 क्षेत्र और चौक, अंबरगंज, हुसैनाबाद, दौलतागंज, बालागंज, सदातगंज, आलमनगर के जोन 6 में सबसे अधिक 41.62% मतदान दर्ज किया गया था।

अयोग को मतदान का प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद

हालांकि इस बार निर्वाचन आयोग ने काफी कोशिश की है। आयोग के मुताबिक लखनऊ की सीमा में 29.24 लाख मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 13.67 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। 110 वार्डों में कुल 2510 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए SEC ने मॉल एवेन्यू के पास म्युनिसिपल नर्सरी स्कूल में एक पिंक बूथ स्थापित किया है। शहर की सीमा में 760 संवेदनशील मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

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