UP News: KGMU ट्रॉमा सेंटर की क्षमता दो गुना करेगी योगी सरकार, मरीजों के दबाव से मिलेगी राहत

केजीएमयू में मरीजों के बढ़ते दबाव के मद्देनजर ट्रॉमा सेंटर की क्षमता बढ़ाने का का प्रस्ताव तैयार कर शासन के पास भेजा गया है। प्रस्ताव मंजूरी होने के बाद इसकी क्षमता 400 से बढ़कर 900 हो जाएगी।

King George's Medical University in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ट्रॉमा सेंटर का विस्तार करने की योजना योगी सरकार बना रही है। अधिकारियों की माने तो मरीजों के दबाव को देखते हुए अब यहां 500 बिस्तरों वाला एक नया ब्लॉक बनाकर इसकी क्षमता को दोगुना करने की तैयारी की जा रही है।

योगी

केजीएमयू में अभी 400 बेड का ट्रॉमा सेंटर

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान ट्रॉमा सेंटर में लगभग 400 बिस्तर हैं और यहां न केवल लखनऊ बल्कि अन्य जिलों और यहां तक कि नेपाल से भी मरीज आते हैं। विस्तार का उद्देश्य दबाव कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी रोगियों को समय पर उपचार मिलेगा।

प्रस्ताव मंजूर होन के बाद हो जाएंगे 900 बेड

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ट्रॉमा सेंटर राज्य का पहला ट्रॉमा सेंटर होगा जो 500 बिस्तरों वाला एक नया ब्लॉक जोड़कर अपनी रोगी क्षमता को दोगुना करने की योजना बना रहा है। ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर संदीप तिवारी ने कहते हैं कि, "मुख्य द्वार से सटे एक नए ब्लॉक का प्रस्ताव तैयार किया गया है और शासन के पास जमा कर दिया गया है।"

केजीएमयू ने शासन को भेजा प्रस्ताव

नया ब्लॉक उस भूमि पर बनेगा जहां पुराना नर्सिंग ब्लॉक मौजूद था। वर्तमान ट्रॉमा सेंटर एक लाख वर्ग फुट क्षेत्र में बना है और दिसंबर 2003 से काम कर रहा है। शुरुआत में इसमें मरीजों को भर्ती करने के लिए 150 बिस्तर थे। धीरे-धीरे इसकी क्षमता बढ़ती गई और अब इसमें लगभग 400 बिस्तर हैं।

रोगियों के दबाव से मिलेगी निजात

तिवारी ने कहा कि शीर्ष ट्रॉमा सेंटर होने के नाते, हमारे पास गंभीर रोगियों का दबाव है। हमारे पास सिर्फ लखनऊ से ही नहीं बल्कि नेपाल से भी मरीज आते हैं। अन्य जिलों से यहां रेफर किए गए लोगों की संख्या किसी भी दिन 50 से अधिक है।

अंतर्राष्ट्रीय डॉक्टरों के संघ के महासचिव डॉ. अभिषेक शुक्ला ने कहते हैं कि,

ट्रॉमा सेंटर से मुख्य अस्पताल के वार्ड में स्थानांतरित होने में औसतन लगभग 24 घंटे से 48 घंटे लगते हैं। इसका मतलब यह है कि यदि किसी दिन सभी बिस्तर भर जाते हैं। मरीजों को प्रतीक्षा में रखना पड़ता है या स्ट्रेचर पर भर्ती करना पड़ता है या दूसरे अस्पताल में रेफर करना पड़ता है। अधिक बिस्तरों के साथ यह संकट खत्म हो जाएगा।

प्रोफेसर तिवारी ने कहा, "नए ब्लॉक को सभी आवश्यक उपकरणों के साथ मॉड्यूलर ऑपरेटिंग थिएटर के साथ गंभीर रोगियों के त्वरित उपचार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।"

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